एजेंसी, तेल अवीव। Iran War Update : ईरान के खिलाफ जारी युद्ध की रणनीतियों को लेकर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच के गहरे मतभेद अब पूरी दुनिया के सामने खुलकर उजागर हो गए हैं। अमेरिकी मीडिया संस्थान सीएनएन की एक विशेष रिपोर्ट के अनुसार, इजराइली प्रधानमंत्री नेतन्याहू किसी भी कीमत पर ईरान के खिलाफ सैन्य हमलों को रोकने के पक्ष में नहीं हैं और वे इसे लगातार जारी रखना चाहते हैं। वहीं दूसरी तरफ, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प इस समय युद्ध को आगे बढ़ाने के बजाय कूटनीतिक बातचीत और एक बड़ी अंतरराष्ट्रीय डील (समझौते) को मौका देने की वकालत कर रहे हैं। दोनों देशों के बीच पैदा हुए इस भारी तनाव के बाद अब पश्चिम एशिया के युद्ध की दिशा बदलने की उम्मीद जताई जा रही है।
STORY | Trump, Netanyahu had tense phone call on future of Iran war: reports
US President Donald Trump and Israel’s Prime Minister Benjamin Netanyahu had a tense phone call over the future course of the war on Iran as Washington appeared to be in favour of a deal instead of the… pic.twitter.com/p4SMIGp1x5
— Press Trust of India (@PTI_News) May 21, 2026
फोन पर एक घंटे तक चली तीखी बहस, नेतन्याहू ने हमलों को रोकने को बताया बड़ी भूल
सुरक्षा सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, मंगलवार को दोनों वैश्विक नेताओं के बीच फोन पर करीब एक घंटे तक बेहद गंभीर और लंबी बातचीत हुई। इस बातचीत के दौरान अमेरिकी अधिकारियों ने पुष्टि की है कि बेंजामिन नेतन्याहू ने डोनाल्ड ट्रम्प के रुख का कड़ा विरोध किया है। नेतन्याहू ने ट्रम्प से साफ शब्दों में कहा कि इस नाजुक मोड़ पर आकर ईरान के खिलाफ तय किए गए हमलों को टालना या रोकना एक बहुत ही ऐतिहासिक और रणनीतिक भूल साबित होगी। इजराइली प्रधानमंत्री का मानना है कि ईरान पर चौतरफा सैन्य कार्रवाई लगातार जारी रहनी चाहिए ताकि उसके हौसलों को पूरी तरह पस्त किया जा सके। जबकि ट्रम्प इस समय खाड़ी देशों के दबाव और घरेलू राजनैतिक परिस्थितियों के कारण फूंक-फूंक कर कदम रख रहे हैं।
कतर और सऊदी अरब की अपील पर ऐन वक्त पर रुका ‘ऑपरेशन स्लेजहैमर’
सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने इससे पहले रविवार को नेतन्याहू को यह भरोसा दिलाया था कि अमेरिकी सेना ईरान के ठिकानों पर नए सिरे से बड़े टारगेटेड हमले करने की पूरी तैयारी कर चुकी है। इस गुप्त और आक्रामक सैन्य अभियान को बकायदा ‘ऑपरेशन स्लेजहैमर’ नाम भी दे दिया गया था। लेकिन इस घोषणा के महज 24 घंटे बाद ही ट्रम्प ने अचानक यू-टर्न लेते हुए एक बड़ा ऐलान कर दिया कि मंगलवार के दिन होने वाले इन विनाशकारी हमलों को फिलहाल के लिए पूरी तरह से रोक दिया गया है। ट्रम्प ने इस फैसले के पीछे की वजह बताते हुए कहा कि कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) जैसे प्रभावशाली खाड़ी देशों ने अमेरिका से इस युद्ध को तुरंत रोकने की विशेष अपील की थी, जिसका सम्मान करते हुए उन्होंने यह कदम उठाया है।
अमेरिकी संसद ने कतरनी ट्रम्प की शक्तियां, राष्ट्रपति बोले- ईरान की सेना हुई खत्म
इस युद्ध के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को अपने ही देश के भीतर एक बड़ा राजनैतिक झटका लगा है। अमेरिकी सीनेट (संसद) में राष्ट्रपति की सैन्य शक्तियों को सीमित करने वाला एक बेहद महत्वपूर्ण प्रस्ताव 50 के मुकाबले 47 वोटों से पास हो गया है। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि ट्रम्प की खुद की रिपब्लिकन पार्टी के 4 सांसदों ने अपनी ही सरकार के खिलाफ जाकर इस प्रस्ताव के पक्ष में वोट डाला। यदि यह प्रस्ताव अंतिम कानून का रूप ले लेता है, तो ट्रम्प को ईरान के खिलाफ युद्ध जारी रखने के लिए अमेरिकी संसद (कांग्रेस) की आधिकारिक मंजूरी लेना अनिवार्य हो जाएगा। इस राजनैतिक रस्साकशी के बीच यूएस कोस्टगार्ड एकेडमी में भाषण देते हुए ट्रम्प ने एक बड़ा दावा भी किया। उन्होंने कहा कि अमेरिकी कार्रवाई से ईरान की नौसेना (नेवी) और वायुसेना (एयरफोर्स) लगभग पूरी तरह से तबाह हो चुकी है, अब फैसला ईरान को करना है कि वह आत्मसमर्पण कर समझौता करेगा या फिर पूरी तबाही झेलेगा।
होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव और भुखमरी को लेकर संयुक्त राष्ट्र की बड़ी चेतावनी
पश्चिम एशिया के इस महायुद्ध का सीधा और बेहद घातक असर अब वैश्विक व्यापारिक मार्गों पर भी दिखने लगा है। ईरानी सैन्य संगठन आईआरजीसी ने दावा किया है कि पिछले 24 घंटों के दौरान उनकी विशेष अनुमति और चेकिंग के बाद ही 26 बड़े तेल टैंकर और कमर्शियल जहाज होर्मुज स्ट्रेट (जलडमरूमध्य) से सुरक्षित गुजर सके हैं। इस भारी खतरे को देखते हुए संयुक्त अरब अमीरात की राष्ट्रीय तेल कंपनी एडनॉक ने होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते को पूरी तरह बायपास करने वाली एक नई तेल पाइपलाइन का 50 प्रतिशत निर्माण कार्य आपातकालीन स्थिति में पूरा कर लिया है, क्योंकि युद्ध के कारण फुजैराह तेल हब पर लगातार ड्रोन हमलों की घटनाएं सामने आ रही हैं। इस पूरे संकट पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए संयुक्त राष्ट्र (यूएन) की संस्था खाद्य और कृषि संगठन ने दुनिया को चेतावनी दी है कि यदि होर्मुज के इस मुख्य समुद्री मार्ग में रुकावट इसी तरह बनी रही, तो पूरी दुनिया में एक भयानक खाद्य संकट (फूड क्राइसिस) पैदा हो जाएगा और महंगाई सातवें आसमान पर पहुंच जाएगी। एजेंसी ने सभी देशों से तुरंत अपने वैकल्पिक सप्लाई रूट तैयार करने की पुरजोर अपील की है।
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