जनजातीय अंचलों की पगडंडियों तक मोहन सरकार

विरासत और विकास के साथ जनजातीय अंचलों की पगडंडियों तक मोहन सरकार

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विरासत और विकास के साथ जनजातीय अंचलों की पगडंडियों तक मोहन सरकार

मध्य प्रदेश की धरती एक नए युग की साक्षी बनी है, जहाँ सत्ता के गलियारे राजधानी के वातानुकूलित कमरों से निकलकर सुदूर जनजातीय अंचलों की पगडंडियों तक जा पहुँचे हैं। राज्य सरकार द्वारा वर्ष 2026 को ‘किसान कल्याण वर्ष’ के रूप में मनाने का संकल्प केवल एक सरकारी घोषणा मात्र नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था की धुरी को सशक्त करने का एक महायज्ञ है। बड़वानी जिले के नागलवाड़ी ग्राम में आयोजित पहली ‘कृषि कैबिनेट’ इस बात का जीवंत प्रमाण है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में सरकार अंतिम छोर के व्यक्ति तक पहुँचने के लिए कटिबद्ध है। किसी जनजातीय अंचल में होने वाली यह पहली कृषि कैबिनेट न केवल निमाड़ और मालवा अंचल के लिए सौभाग्य की बात है, बल्कि यह प्रदेश के समावेशी विकास का एक नया अध्याय भी लिख रही है।
​इतिहास गवाह है कि नीतियां जब जमीन से जुड़कर बनाई जाती हैं, तभी वे यथार्थ में परिवर्तन लाती हैं। नागलवाड़ी में जुटने वाले पूरे मंत्रिमंडल ने मिट्टी की गंध के बीच बैठकर किसानों के भविष्य का खाका खींचा है। मुख्यमंत्री का यह विजन सराहनीय है कि खेती को केवल पेट भरने का साधन न मानकर उसे एक लाभकारी व्यवसाय के रूप में स्थापित किया जाए। नर्मदा घाटी परियोजना के माध्यम से जिस प्रकार खंडवा, खरगोन, बुरहानपुर और बड़वानी के क्षेत्रों में जल की धारा ने समृद्धि की फसल उगाई है, वह इस बात का उदाहरण है कि सही बुनियादी ढांचे और दृढ़ राजनीतिक इच्छाशक्ति से किसी भी क्षेत्र की तकदीर बदली जा सकती है। आज यह पूरा क्षेत्र जिस समृद्धि की नई पहचान बना रहा है, उसे और अधिक ऊर्जा देने का कार्य यह कृषि कैबिनेट करेगी।
​इस आयोजन की सबसे सुंदर कड़ी लोक-संस्कृति और शासन का अद्भुत संगम है। सरकार ने न केवल फाइलों पर हस्ताक्षर करने का मन बनाया है, बल्कि जनजातीय संस्कृति के गौरव ‘भगोरिया’ को राजकीय पर्व के रूप में समाज के साथ मनाने का निर्णय लेकर यह सिद्ध कर दिया है कि विकास और विरासत साथ-साथ चल सकते हैं। बाबा भीलट देव के मंदिर को ‘भीलट देव लोक’ का स्वरूप देना और उनके आशीर्वाद के साथ जन-कल्याण की योजनाओं को नई दिशा देना, सरकार की गहरी सांस्कृतिक समझ और आस्था को दर्शाता है। जब मुख्यमंत्री स्वयं जुलवानिया के भगोरिया उत्सव में ढोल-मांदल की थाप के बीच जनजातीय भाई-बहनों के साथ खड़े होंगे, तो यह दृश्य सामाजिक समरसता की एक ऐसी तस्वीर पेश करेगा जिसे युगों तक याद रखा जाएगा।
​प्रशासनिक दृष्टिकोण से भी यह पहल अत्यंत प्रभावी है। नागलवाड़ी में बैठक स्थल को पूरी तरह निमाड़ी शैली में सजाना, स्थानीय वास्तुकला से प्रेरित डोम तैयार करना और आधुनिक सुविधाओं के साथ पारंपरिक परिवेश का सामंजस्य बिठाना यह बताता है कि सरकार स्थानीय अस्मिता का कितना सम्मान करती है। यह केवल एक बैठक नहीं, बल्कि एक उत्सव है, जहाँ किसान, जनप्रतिनिधि और प्रबुद्धजन एक साथ बैठकर संवाद करेंगे। संवाद ही वह सेतु है जिससे समस्याओं का समाधान निकलता है और नई योजनाओं का जन्म होता है। कृषि और जनजातीय कल्याण की प्रदर्शनी के माध्यम से नवाचारों को सीधे धरातल पर दिखाने का प्रयास किसानों को आधुनिक तकनीक से जोड़ने में मील का पत्थर साबित होगा।
​विशेष रूप से उल्लेखनीय है वह भोजन जो इस अवसर पर परोसा गया है। अमाड़ी की भाजी, मक्के की रोटी, दाल पानिये और निमाड़ी मिर्च के भजिये जैसे पारंपरिक व्यंजन भविष्य में न केवल अतिथियों का स्वाद बढ़ाएंगे, बल्कि यह हमारी समृद्ध पाक कला और स्थानीय कृषि उत्पादों के ब्रांडिंग का एक सशक्त माध्यम बनेंगे। ‘श्रीअन्न’ यानी कोदो का पुलाव और रागी की मिठाई का मीनू में शामिल होना प्रधानमंत्री के मोटे अनाज को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने के अभियान को मजबूती प्रदान करता है। यह संदेश देता है कि हमारे खेतों में उपजा हर दाना अनमोल है और उसका मूल्य संवर्धन ही किसानों की आय दोगुनी करने की कुंजी है।
​मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का ‘सबका साथ और सबकी सहभागिता’ का मंत्र नागलवाड़ी की इस पहली कृषि कैबिनेट के माध्यम से साकार होता दिख रहा है। जब पूरा मंत्रिमंडल एक दिन के लिए गांव की चौपाल पर बैठता है, तो आम जनमानस में यह विश्वास जागता है कि उनकी सरकार उनके द्वार पर है। यह किसान कल्याण वर्ष निश्चित रूप से प्रदेश के कृषि परिदृश्य को बदल देगा। विभिन्न योजनाओं को नई दिशा देने का संकल्प और जनजातीय अंचलों को मुख्यधारा से जोड़ने का यह प्रयास मध्य प्रदेश को देश के कृषि मानचित्र पर एक आदर्श राज्य के रूप में स्थापित करेगा। यह बैठक केवल प्रस्तावों को मंजूरी देने के लिए नहीं थी, बल्कि यह मध्य प्रदेश के उज्ज्वल और समृद्ध भविष्य की नींव रखने के लिए है। समृद्धि की यह लहर जब नर्मदा की लहरों के साथ मिलकर मालवा और निमाड़ के खेतों तक पहुँचेगी, तब सही अर्थों में ‘किसान कल्याण’ का सपना साकार होगा। यह आयोजन राजनीति से ऊपर उठकर राष्ट्र निर्माण और कृषक समाज के उत्थान का एक पवित्र प्रयास है, जिसकी सराहना हर स्तर पर होनी चाहिए।

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