किसानों के साथ सख्ती उन्हीं की भलाई के लिए, कड़वी दवा के समान

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बीमारियों और उनके इलाज के बारे में व्यवहारिक धारणा है कि जब रोग हद से ज्यादा बिगड़ जाए तब मरीज को कड़वी और असरदार दवाइयां देकर उसे रोग मुक्त करने का रास्ता अपनाना पड़ता है। इस दौरान हालिया तौर पर भले ही रोगी को तकलीफ पहुंचती हो लेकिन इसके दूरगामी परिणाम सकारात्मक और लाभदायक होते हैं। अंततः बीमार को हमेशा के लिए बीमारियों से मुक्ति मिल जाती है। मध्य प्रदेश सरकार के किसानों से संबंधित फैसले को इसी नजरिए से देखने की आवश्यकता है। सभी को मालूम है कि मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने किसानों की भलाई को केंद्र में रखकर कुछ कड़े निर्णय लिए हैं। जिनसे तात्कालिक तौर पर भले ही किसानों को थोड़ी बहुत परेशानी महसूस हो सकती है, लेकिन भविष्य में उनका भला ही होने वाला है। उल्लेखनीय है कि मध्य प्रदेश की भाजपा सरकार ने फैसला किया है कि अब यदि किसी भी किसान ने खेत में नरवाई जली तो उसे मुख्यमंत्री किसान सम्मन निधि नहीं दी जाएगी। इसी से जुड़ा हुआ दूसरा फैसला यह है कि ऐसे किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य पर उनकी फसलों की खरीदी भी नहीं की जाएगी। मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव के इस फैसले की जितनी तारीफ की जाए उतनी कम है। क्योंकि अधिकतर मुख्यमंत्री और सरकारें वोट बैंक को ध्यान में रखकर कड़े फैसले लेने से डरती हैं। इससे राजनेताओं का तात्कालिक लाभ भले ही सिद्ध हो जाता हो, लेकिन जनता को लंबे समय तक नुकसान का सामना करना पड़ जाता है। लेकिन मध्य प्रदेश की सरकार ने राजनीति से ऊपर उठकर यह साबित कर दिया है कि यदि देश हित में, प्रदेश हित में और जनहित में कड़े फैसले लेने पड़ जाएं तो उन्हें नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। उल्लेखनीय है कि मध्य प्रदेश समेत देश के अधिकांश हिस्सों में नरवाई को जलाया जाना परेशानी का सबब बनता जा रहा है। पंजाब और हरियाणा में तो यह मामले इतने कष्टकारी हो चले हैं कि इनकी वजह से देश की राजधानी दिल्ली बुरी तरह प्रदूषित हो चुकी है। फल स्वरुप साल भर वहां वायु प्रदूषण का माहौल बना रहता है। साल में कुछ महीने ऐसे भी आते हैं जब वहां के लोगों का दम घुटने लगता है। जैसे-जैसे इस समस्या से छुटकारे की अपेक्षा बढ़ रही है, वैसे ही फसल कटाई के बाद खेतों में नरवाई जलाने के मामलों में वृद्धि होती जा रही है। इससे वायु प्रदूषण सहित कई तरह से पर्यावरण को बेहद नुकसान पहुंचता है। फल स्वरुप सांस से संबंधित अनेक गंभीर बीमारियां आम आदमी को अपनी जकड़ में लेती जा रही हैं । वहीं खेत में आग लगने से जमीन के पोषक तत्व नष्ट हो जाते हैं। जो छोटे-मोटे कीट और कीड़े मकोड़े खेती के लिए सहायक एवं लाभदायक होते हैं, उनकी भी खेत में नरवाई जलाने से मौत हो जाती है और भूमि की उर्वरक क्षमता नष्ट होती चली जाती है। इसे देखते हुए नरवाई जलाने को प्रतिबंधित किया जाना एकमात्र रास्ता बचता है। अंततः मुख्यमंत्री ने उस रास्ते पर कदम बढ़ाने में किंचित मात्र झिझक नहीं दिखाई है। इससे यह तय हो गया है कि मध्य प्रदेश के खेतों में नरवाई जलाने वाले किसानों को अब ना तो मुख्यमंत्री किसान सम्मान निधि प्राप्त होगी और ना ही मध्य प्रदेश सरकार द्वारा उनकी फसल को न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदा जायेगा। जानकारी के लिए बता दें कि आए दिन प्रदेश भर के जिलों में नरवाई जलाने पर केस दर्ज हो रहे हैं। हालांकि यह भी सच है कि खेतों में नरवाई जलाने की घटनाएं भारी पैमाने पर हो रही हैं । जबकि पुलिस तक मामले नाम मात्र के ही पहुंच पाते हैं। उम्मीद की जानी चाहिए कि प्रदेश सरकार द्वारा दिए गए इस फैसले के बाद नरवाई जलाने के मामलों में कमी देखने को मिलेगी। किसानों को भी इस कड़े फैसले को सकारात्मक भाव से ग्रहण करना चाहिए। अपेक्षा तो यह की जाती है कि उन्हें यह नौबत आने देना ही नहीं चाहिए थी कि गलत काम करने पर सरकार मुख्यमंत्री सम्मान निधि रोके और न्यूनतम समर्थन मूल्य पर फसल खरीदी पर रोक लगाए। उन्हें यह समझना होगा कि नरवाई जलाने जैसे अनेक कारण हैं, जिनके चलते खेती किसानी दिनों दिन महंगी होती जा रही है। क्योंकि ऐसा करके किसान एक ओर खुद ही जमीन की उर्वरा शक्ति की हत्या कर रहा है। वहीं पैदावार अधिक लेने की गरज से रसायनिक खाद एवं अन्य महंगी दवाइयों का सहारा लेने के लिए मजबूर होता जा रहा है ‌ इससे खेती की लागत बढ़ रही है, जमीन खराब हो रही है और खाद्य पदार्थ दिनों दिन महंगे होते जा रहे हैं। सबसे बड़ी बात यह कि ऐसी परिस्थितियों के चलते ही किसानों की आय परेशानी में पड़ जाती है और वह प्रतिकूलताओं का शिकार होता चला जाता है। किसानों को इस वास्तविकता को समझने की आवश्यकता है। मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव ने किसानों की इस परेशानी को समझा है और उनके पक्ष में जो कड़े कदम उठाये हैं वह अंततः किसानों के हित में ही हैं । किसानों को इस मामले में मध्य प्रदेश शासन का सहयोग करना चाहिए तथा यदि उनकी जानकारी में नवाई जलाए जाने की सूचना मिलती है तो उससे पुलिस को अवगत कराया जाना चाहिए।

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