अंबेडकर जयंती मना कर भाजपा द्वारा विपक्षियों की खिंचाई जारी

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आजकल मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव विपक्षियों और खासकर कांग्रेस पर सीधे हमले कर रहे हैं। पहले उन्होंने नए वक्फ संशोधन कानून के विरोध को लेकर विपक्षियों को खरी खोटी सुनाई थीं । और अब जब डॉक्टर भीमराव अंबेडकर जयंती के अवसर पर प्रदेश भर में अनेक कार्यक्रम संपन्न हुए, तब वह कांग्रेस को आइना दिखाना नहीं भूले। गौर से देखें तो देश के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव विपक्षियों पर पलटवार करने को लेकर काफी मुखर बने रहते हैं। यही वजह है कि चाहे कांग्रेस हो या फिर उसके अन्य सहयोगी राजनीतिक दल, इन सभी के राजनेता ज्यादातर समय निरुत्तर होकर बंगले झांकते रहते हैं। जैसे बीते चुनाव के दौरान कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों के नेताओं ने केंद्र की एनडीए सरकार पर आरोप लगाए थे कि वह संविधान की हत्या करने वाली है। इस मामले को लेकर विपक्ष ने यह आरोप भी लगाया था कि भाजपा तो सदैव से ही डॉक्टर भीमराव अंबेडकर की विरोधी रही है। तो फिर वह संविधान का सम्मान कैसे कर सकती है । जैसे ही मौका मिला डॉक्टर मोहन यादव ने एक बार फिर अपने तीखे बयानों के माध्यम से विपक्षियों को बंगले झांकने के लिए मजबूर कर दिया। उन्होंने डॉ भीमराव अंबेडकर की जयंती के अवसर पर आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों में भाग लेते हुए स्पष्ट किया कि समानता और शिक्षा के मामले में बाबा साहब अंबेडकर का योगदान भूलने योग्य नहीं है। उन्होंने देश के लिए जो किया वह ना भूतकाल में देखने को मिला और शायद ही भविष्य में भी देखने को मिल पाए। अपने तीखे बयानों के लिए पहचाने जाने वाले मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने कहा कि कांग्रेस ने सदा ही बाबा साहेब का अपमान किया। आजादी से पहले और आजादी के बाद उनके योगदान को नकारा। तत्कालीन प्रधानमंत्री और कांग्रेस के सर्वे सर्वा नेता पंडित जवाहरलाल नेहरू ने बाबा साहब भीमराव अंबेडकर को लोकसभा में नहीं पहुंचने दिया। यहां तक कि डॉ भीमराव अंबेडकर ने कांग्रेस और खासकर पंडित जवाहरलाल नेहरू की वजह से ही नया राजनीतिक संगठन खड़ा किया। हद तो यह है कि पंडित जवाहरलाल नेहरू ने बाबा साहब को लोकसभा से दूर रखा। उन्हें पद्म विभूषण देने का काम भी भाजपा की सरकार ने हीं किया है। डॉक्टर मोहन यादव ने यह भी कहा कि कांग्रेस ने उन्हें भारत रत्न देने में भी काफी देर लगाई । जबकि कांग्रेस के नेता स्वयं को भारत रत्न देने की बेशर्मी करते भी देखने को मिलते रहे। तब होने कभी भी बाबा साहब भीमराव अंबेडकर की याद तक नहीं आई। उन्होंने दावा किया कि डॉक्टर भीमराव अंबेडकर के मध्य प्रदेश में जहां-जहां कदम पड़े, उन स्थानों को हम तीर्थ के रूप में विकसित कर रहे हैं। विपक्षियों का मुंह बंद करने के लिए मुख्यमंत्री ने सबसे बड़ा काम यह किया कि बाबा साहेब की जन्मभूमि अंबेडकर नगर पहुंचकर वह मुख्य समारोह में शामिल हुए। जहां पहुंचकर उन्होंने एक ओर बाबासाहेब के आदर्श की अनदेखी करने के लिए कांग्रेस सहित उन राजनेताओं की खिंचाई की जो हमेशा पिछड़ा वर्ग, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अल्पसंख्यकों के नाम पर राजनीति करते रहते हैं। जबकि सच्चाई यह है कि इन्हें दलित शोषितों और पिछड़ों की तरक्की से कोई लेना-देना ही नहीं है। यदि ऐसा होता तो अब तक भारत देश की प्रथम अर्थव्यवस्था बन चुका होता। अब 75 साल से भी ज्यादा समय बीत जाने के बाद देश के यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी को यह काम करना पड़ रहा है। इसी प्रकार मध्य प्रदेश के लगभग सभी जिलों में शासन की प्रेरणा से डॉक्टर भीमराव अंबेडकर की स्मृति में अन्य कार्यक्रम आयोजित किए गए। सभी स्थानों पर श्रद्धा के साथ डॉक्टर भीमराव अंबेडकर को याद किया गया और यह प्रतिबद्धता जताई गई कि भाजपा एवं भाजपा की सरकारें संविधान की हिफाजत के लिए, उसके सम्मान के लिए किसी भी प्रकार का बलिदान देने को तत्पर रहेंगे। इस प्रकार देखा जाए तो भारतीय जनता पार्टी अब सरदार वल्लभभाई पटेल के बाद डॉक्टर भीमराव अंबेडकर को आदर्श पुरुष मानने में कांग्रेस को पटखनी देती दिखाई दे रही है। कुल मिलाकर डॉक्टर मोहन यादव, उनकी मध्य प्रदेश सरकार और भारतीय जनता पार्टी यह साबित करने में सफल हुए हैं कि जिस प्रकार कांग्रेस और उसके नेताओं ने सरदार वल्लभभाई पटेल की अनदेखी की और उन्हें देश का प्रधानमंत्री बनने से रोका। उसी प्रकार कांग्रेस एवं उसके नेता डॉक्टर भीमराव अंबेडकर को भी आगे बढ़ने से रोकते रहे। लेकिन अब केंद्र और मध्य प्रदेश की भाजपा सरकारें जनता के सामने वास्तविक इतिहास को रखकर उन्हें सच्चाई से अवगत करा रही हैं।

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