इंडियन इकोनॉमी

इंडियन इकोनॉमी का दमदार परफॉर्मेंस : तीसरी तिमाही में जीडीपी ने पकड़ी 7.8 परसेंट की स्पीड, ग्रोथ रेट में बड़ा उछाल

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एजेंसी, नई दिल्ली। बेस ईयर 2022-23 पर बेस्ड नई नेशनल इनकम सीरीज के तहत करंट फाइनेंशियल ईयर की अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में भारत की इकोनॉमी 7.8 परसेंट की रेट से बढ़ी। यह पिछले साल की इसी ड्यूरेशन के 7.4 परसेंट के मुकाबले अधिक है। मिनिस्ट्री ऑफ स्टैटिस्टिक्स एंड प्रोग्राम इम्प्लीमेंटेशन की तरफ से फ्राइडे को जारी डेटा के मुताबिक, फाइनेंशियल ईयर 2025-26 की तीसरी तिमाही में देश का ग्रॉस डोमेस्टिक प्रोडक्ट (जीडीपी) 7.8 परसेंट की रेट से ऊपर गया है।

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इसके साथ ही मिनिस्ट्री ने कहा कि फाइनेंशियल ईयर 2025-26 की पूरी ड्यूरेशन में देश की इकोनॉमी के 7.6 परसेंट बढ़ने का एस्टीमेट है, जबकि पहले इसका अनुमान 7.4 परसेंट लगाया गया था। एनुअल और क्वार्टरली नेशनल इनकम के ये एस्टीमेट्स नई नेशनल इनकम सीरीज के तहत रिलीज किए गए हैं। अब 2011-12 को बेस ईयर मानने वाली पुरानी सीरीज की जगह 2022-23 को नया बेस ईयर बनाया गया है। बेस ईयर वह पीरियड होता है, जिसके प्राइस और प्रोडक्शन लेवल को स्टैंडर्ड मानकर आगे की ग्रोथ रेट का कंपैरिजन किया जाता है। इसके साथ ही जुलाई-सितंबर 2025-26 की ग्रोथ रेट को रिवाइज कर 8.4 परसेंट कर दिया गया है, जो पहले 8.2 परसेंट आंकी गई थी। हालांकि, अप्रैल-जून तिमाही की ग्रोथ रेट को 7.8 परसेंट से घटाकर 6.7 परसेंट कर दिया गया है। बेस ईयर में चेंज से इकोनॉमिक एक्टिविटीज के असेसमेंट का स्कोप व्यापक होता है और नई स्ट्रक्चर के अकॉर्डिंग डेटा को अपडेट किया जाता है। इससे इकोनॉमी के अलग-अलग सेक्टर्स की रियल सिचुएशन को बेहतर तरीके से शो किया जा सकता है।

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