एजेंसी, नई दिल्ली। प्राइम मिनिस्टर मोदी ने इंडियन इंडस्ट्री से इंवेस्टमेंट एवं इनोवेशन बढ़ाने का फ्राइडे को आग्रह किया। उन्होंने कहा कि गवर्नमेंट ने एग्रेसिव कैपिटल एक्सपेंडिचर और बजट में लगातार अनुकूल पॉलिसी एनवायरनमेंट बनाकर बेस तैयार कर दिया है और अब प्राइवेट सेक्टर के लिए ग्लोबल लेवल पर कॉम्पिटिटिव ग्रोथ के अगले फेज को आगे बढ़ाने का समय आ गया है।
‘विकसित भारत के लिए टेक्नोलॉजी, रिफॉर्म एवं फाइनेंस’ सब्जेक्ट पर बजट के बाद आयोजित ‘वेबिनार’ को एड्रेस करते हुए मोदी ने कहा कि पब्लिक कैपिटल एक्सपेंडिचर 11 साल पहले दो लाख करोड़ रुपये था जो बढ़कर सेंट्रल बजट 2026-27 में 12 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया है। इसने एक्सपेंशन के लिए एक मजबूत फाउंडेशन रखी है। उन्होंने कहा कि अधिक एलोकेशन प्राइवेट सेक्टर को नए जोश के साथ इंवेस्ट करने और 2026-27 के बजट डिक्लेरेशंस का लाभ उठाने का सिग्नल देता है। मोदी ने कहा, ”इंडियन कंपनियों को नए इंवेस्टमेंट एवं इनोवेशन के साथ आगे आना चाहिए। फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशंस को प्रैक्टिकल सॉल्यूशंस तैयार करने और मार्केट कॉन्फिडेंस बढ़ाने में सपोर्ट देना चाहिए।”
उन्होंने रिफॉर्म्स को सॉलिड रिजल्ट्स में बदलने के लिए गवर्नमेंट, इंडस्ट्री और नॉलेज सेक्टर के पार्टनर्स के बीच क्लोज कोआपरेशन का आह्वान किया। मोदी ने कहा, ”हमें इन्फ्रास्ट्रक्चर में अधिक पार्टिसिपेशन एवं फाइनेंशियल मॉडल में इनोवेशन की रिक्वायरमेंट है… हमें प्रोजेक्ट अप्रूवल मेथड्स को मजबूत करना चाहिए और इवैल्यूएशन की क्वालिटी में सुधार करना चाहिए।” गवर्नमेंट ने पिछले एक दशक में इंडिया की ग्रोथ स्ट्रेटजी को रिकॉर्ड लेवल के कैपिटल एक्सपेंडिचर के इर्द-गिर्द फोकस किया है। प्राइवेट इंवेस्टमेंट को अट्रैक्ट करने और मीडियम टर्म प्रोडक्टिविटी बढ़ाने के लिए हाईवेज, रेलवे, पोर्ट्स, एयरपोर्ट्स, डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर तथा एनर्जी नेटवर्क पर एक्सपेंडिचर में तेज ग्रोथ की गई है।
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हालांकि, प्राइवेट सेक्टर ने अभी तक वह सो-कॉल्ड ‘एनिमल स्पिरिट’ पूरी तरह से डिस्प्ले नहीं किया है। नरेन्द्र मोदी ने कहा कि पिछले दशक में इंडिया की मजबूत कैपेसिटी दृढ़ विश्वास-आधारित रिफॉर्म्स और इज ऑफ डूइंग बिजनेस में निरंतर सुधार के एफर्ट्स से इंस्पायर्ड रही है। इंडिया ने टेक्नोलॉजी-बेस्ड गुड गवर्नेंस को अपनाया है, इंस्टीट्यूशंस को मजबूत किया है और आज भी देश रिफॉर्म्स के मार्ग पर आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा, ”रिफॉर्म्स की तेज स्पीड को बनाए रखने के लिए हमें केवल पॉलिसी इंटेंट पर ही नहीं, बल्कि एक्सीलेंट इंप्लीमेंटेशन पर भी ध्यान देना होगा। रिफॉर्म्स का इवैल्यूएशन उनके जमीनी इम्पैक्ट के बेसिस पर होना चाहिए। ट्रांसपेरेंसी, स्पीड और अकाउंटेबिलिटी बढ़ाने के लिए हमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ब्लॉकचेन और डेटा एनालिटिक्स का व्यापक यूज करना चाहिए।”
उन्होंने 2047 तक ‘विकसित भारत’ के टारगेट के तहत गवर्नमेंट, इंडस्ट्री, फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशंस और शिक्षाविदों के बीच कोआपरेशन को फॉर्मलाइज करने के लिए ‘रिफॉर्म पार्टनरशिप चार्टर’ बनाने का प्रपोजल रखा। मोदी ने कहा कि जब गवर्नमेंट, इंडस्ट्री और नॉलेज सेक्टर से जुड़े लोग एक साथ आते हैं, तो ”रिफॉर्म रिजल्ट्स में बदलते हैं और पेपर पर की गई डिक्लेरेशंस जमीनी स्तर पर अचीवमेंट्स में तब्दील होती हैं।” गवर्नमेंट द्वारा डिक्लेयर्ड इंवेस्टर-फ्रेंडली पॉलिसीज का मेंशन करते हुए उन्होंने कहा कि डायरेक्ट फॉरेन इंवेस्टमेंट फ्रेमवर्क को सरल बनाया गया है और अधिक प्रिडिक्टेबिलिटी लाई गई है। इसके अलावा, बॉन्ड मार्केट को गहरा करने के लिए कदम उठाए गए हैं। उन्होंने कहा कि सस्टेनेबल फॉरेन इंवेस्टमेंट अट्रैक्ट करने के लिए कम रिस्क वाले नए फाइनेंशियल इंस्ट्रूमेंट्स डेवलप किए जाने चाहिए। बजट का इवैल्यूएशन अक्सर विभिन्न स्टैंडर्ड्स पर किए जाने का जिक्र करते हुए मोदी ने कहा, ”नेशनल बजट कोई शॉर्ट-टर्म बिजनेस डॉक्यूमेंट नहीं है। यह एक पॉलिसी ब्लूप्रिंट है। इसलिए बजट की इफेक्टिवनेस का असेसमेंट भी सॉलिड एवं मीनिंगफुल स्टैंडर्ड्स पर किया जाना चाहिए।” उन्होंने कहा, ”हर साल बजट के बाद आयोजित होने वाला बजट ‘वेबिनार’ इम्पोर्टेन्ट होता है। मेरी इच्छा है कि यह वेबिनार केवल फॉर्मल डिस्कशन तक लिमिटेड न रहे, बल्कि मीनिंगफुल मंथन पर फोकस्ड हो।”


