एजेंसी, भोपाल। ‘स्कूल चलें हम’ अभियान का आगाज : मध्य प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था के प्रति बढ़ते जन-विश्वास के बीच अब विद्यार्थी निजी विद्यालयों को छोड़कर सरकारी स्कूलों का रुख कर रहे हैं। इस बदलाव को राज्य की शिक्षा प्रणाली में एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बुधवार को भोपाल के टीटी नगर स्थित सांदीपनि विद्यालय में राज्य स्तरीय प्रवेश उत्सव का उद्घाटन करते हुए कहा कि प्रदेश में स्कूल छोड़ने वाले बच्चों (ड्रॉपआउट) की संख्या अब शून्य के स्तर पर आ गई है। उन्होंने जानकारी दी कि इस वर्ष नए दाखिलों में 19 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है।
शासकीय विद्यालयों के नामांकन में 32.4 प्रतिशत की वृद्धि!
बीते दो वर्षों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और सुविधाओं के परिणामस्वरूप अभिभावकों का सरकारी विद्यालयों पर पहले से ज्यादा भरोसा बढ़ा है।
आज भोपाल से राज्य स्तरीय ‘प्रवेशोत्सव कार्यक्रम-2026’ का शुभारंभ किया। बच्चों को… pic.twitter.com/4kUvonh9MP
— Dr Mohan Yadav (@DrMohanYadav51) April 1, 2026
विद्यार्थियों की सुविधा के लिए कल प्रदेश भर में लगभग 4 लाख साइकिलों का वितरण किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने बच्चों को संबोधित करते हुए उन्हें उज्ज्वल भविष्य के लिए प्रोत्साहित किया और कहा कि सरकार ने छात्राओं के लिए स्कूटी योजना जैसी कई महत्वपूर्ण पहल की हैं। शिक्षा के ढांचे को मजबूत करने के लिए प्रशासन ने 76,000 शिक्षकों की नियुक्ति की है और इस साल का लक्ष्य करीब 1 करोड़ 45 लाख बच्चों का नामांकन सुनिश्चित करना है।
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सरकारी स्कूलों पर बढ़ा जनता का भरोसा
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के अनुसार, सरकारी स्कूलों में नामांकन वृद्धि दर 36 प्रतिशत से भी अधिक रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से ऐसे रुझान मिल रहे हैं जहाँ अभिभावक अपने बच्चों को निजी स्कूलों से निकालकर सांदीपनि जैसे उन्नत सरकारी स्कूलों में प्रवेश दिला रहे हैं। इन विद्यालयों में आधुनिक लाइब्रेरी, खेल के मैदान और हाईटेक लैब जैसी सभी आवश्यक सुविधाएँ उपलब्ध कराई जा रही हैं।
शिक्षा के लिए 250 करोड़ रुपए का बजट प्रावधान
अनुसूचित जाति वर्ग के विद्यार्थियों के लिए स्कूल शिक्षा विभाग 1900 से अधिक छात्रावास चला रहा है, जिनकी क्षमता 95 हजार है। सरकार ने कक्षा 1, 6 और 9 में प्रवेश की प्रक्रिया को भी सरल बनाया है। मुख्यमंत्री ने बताया कि बीते दो वर्षों में लगभग 1 लाख 83 हजार लैपटॉप वितरित किए जा चुके हैं और इस साल के बजट में बच्चों की पढ़ाई के लिए 250 करोड़ रुपए सुरक्षित रखे गए हैं।
प्रवेश उत्सव और 4 दिनों की कार्ययोजना
शैक्षणिक सत्र 2026-27 के पहले दिन मुख्यमंत्री ने बच्चों पर पुष्प वर्षा की और उन्हें साइकिलें प्रदान कीं। इस अवसर पर स्कूल शिक्षा मंत्री उदय राव प्रताप सहित मंत्रिमंडल के कई सदस्य मौजूद रहे। प्रदेश के 92 हजार सरकारी स्कूलों में नामांकनों को बढ़ावा देने के लिए चार दिनों का विशेष कार्यक्रम तैयार किया गया है:
पहला दिन: बालसभा के जरिए बच्चों का स्वागत और मुफ्त किताबों का वितरण।
दूसरा दिन: ‘भविष्य से भेंट’ कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ छात्रों का मार्गदर्शन करेंगे।
तीसरा दिन: खेल और सांस्कृतिक गतिविधियों में पालकों की भागीदारी और उत्कृष्ट उपस्थिति वाले अभिभावकों का सम्मान।
चौथा दिन: पढ़ाई में पिछड़ गए बच्चों की पहचान और उनके लिए विशेष कार्ययोजना तैयार करना।
जमीनी स्तर पर अभियान की तैयारी
अभियान के तहत बस्तियों और गाँवों में उन बच्चों की पहचान की जा रही है जो अब तक शिक्षा की मुख्यधारा से नहीं जुड़ पाए हैं। शिक्षकों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अभिभावकों से संपर्क कर उन्हें शिक्षा के लाभ समझाएं। बैरागढ़ चिचली जैसे क्षेत्रों में आधुनिक प्रेजेंटेशन और प्रोजेक्टर के जरिए लोगों को जागरूक किया जा रहा है। हालाँकि, हुजूर विधानसभा जैसे कुछ क्षेत्रों के स्कूलों से बुनियादी सुविधाओं की कमी की खबरें भी सामने आई हैं, जहाँ प्रशासन को व्यवस्थाएँ सुधारने की आवश्यकता है।



शासकीय विद्यालयों के नामांकन में 32.4 प्रतिशत की वृद्धि!