रियल एस्टेट के काले कारोबार पर मोहन सरकार की टेढ़ी नजर

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राजधानी भोपाल के जाने-माने रियल एस्टेट कारोबारी राजेश शर्मा पर ईओडब्ल्यू द्वारा कसा गया शिकंजा आम आदमी को राहत पहुंचाने वाला सरकारी कदम साबित हो सकता है। राजेश शर्मा पर आरोप है कि उसने किसानों की बेश कीमती जमीनों की रजिस्ट्रियां कम कीमत पर अपने पक्ष में कराईं और उनके करोड़ों रुपए हड़प लिए। इस आशय की शिकायतें जब आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ के पास लगातार पहुंची तो वहां आरोपी के खिलाफ अपराधिक प्रकरण पंजीकृत किया गया और उसके खिलाफ लगातार जांच प्रभावशील बनी रही। जब यह सुनिश्चित हो गया कि रियल एस्टेट कारोबारी पर लगाए गए आरोप सत्यात्मक हैं तो उसे लगातार नोटिस जारी किए गए। जब दूसरी ओर से जवाब नहीं मिला तो ईओडब्ल्यू ने राजेश शर्मा, उसके सहयोगियों, रिश्तेदारों तथा कारोबारी हिस्सेदारों के आसपास शिकंजा कसना शुरू कर दिया। अब उसके खिलाफ लुक आउट सर्कुलर जारी किया जा चुका है। जब यह खबर आम हो चुकी है तो उम्मीद की जा रही है जो किसान पहले निराश होकर शिकायत दर्ज करने से बच रहे थे, अब वह भी सरकार तक पहुंचने वाले हैं। उम्मीद की जा रही है कि निकट भविष्य में रियल एस्टेट कारोबारी राजेश शर्मा के खिलाफ इसी प्रकृति के अपराधिक प्रकरण और पंजीबद्ध हो सकते हैं। उल्लेखनीय है कि राजधानी भोपाल और उसके आसपास महानगर का लगातार विकास हो रहा है। इसके चलते जमीनें लगातार महंगी हो रही हैं। फल स्वरुप अधिक मुनाफा कमाने की चाह में मुनाफाखोर रियल एस्टेट कारोबारी महानगर से लगे हुए ग्रामीण इलाकों का रुख करने लगे हैं। क्योंकि वहां पर भोले भाले किसान अपने खेत सस्ते में बेचने को तैयार हो जाते हैं। थोड़ा बहुत पैसा विकास के नाम पर खर्च करके वहां प्लाट काटे जाते हैं अथवा आवासीय भवन बनाकर उन्हें विक्रित किया जाता है। इसमें रियल एस्टेट कारोबारियों के करोड़ों के बारे न्यारे होते हैं। इसके बावजूद भी जब उनकी धन पिपाशा शांत नहीं होती तो यह लोग रजिस्ट्री कराते वक्त भोले भाले किसानों के साथ आर्थिक धोखाधड़ी भी करते हैं। इस तरह के अनेक मामले आए दिन सामने आते रहते हैं। लेकिन इन मुनाफाखोरों की पहुंच ऊपर तक रहती है। दावे तो यहां तक किए जाते हैं कि बेईमानी से कमाए गए काले धन का एक हिस्सा भ्रष्ट अधिकारियों तक भी पहुंचता है। यही कारण है कि जब किसान इनके खिलाफ शिकायतें लेकर पुलिस एवं अन्य जांच एजेंसियों तक पहुंचते हैं तो वहां उनकी सुनवाई नहीं होती। बल्कि उन्हें डरा धमकाकर चुप करा दिया जाता है। बताया जाता है कि राजेश शर्मा भी इसी प्रकार का रसूखदार रियल एस्टेट कारोबारी रहा है। उसके खिलाफ भी अनेक शिकायतें जांच एजेंसियों के पास दम तोड़ रही थीं। लेकिन जब इसकी भनक मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के कानों तक पहुंची, तब उन्होंने इस मामले में सख्त रवैया अपनाया। जांच एजेंसियों को कार्रवाई की खुली छूट देते हुए स्पष्ट किया है कि सरकार और जनता को धोखा देने वाला व्यक्ति कितना भी बड़ा आदमी क्यों ना हो, उसके खिलाफ कड़ा रुख बरकरार रहना चाहिए। खबरें मिल रही है कि कुछ दिनों पहले तक जांच एजेंसियां इस प्रकार के मामलों में खुलकर काम नहीं कर पा रही थीं। लेकिन अब इस मामले के प्रति मुख्यमंत्री का कठोर रवैया सामने आ जाने आर्थिक अपराध अनुसंधान विभाग के अधिकारियों का उत्साह सातवें आसमान पर है। खबरें मिल रही है कि अब जांच एजेंसी उन कारोबारियों के गिरहबान पर भी हाथ डालने का मन बना रही है जो अभी तक ऊंचा रसूख होने के चलते कड़ी कार्रवाई से बचे हुए थे। फल स्वरुप जमीन और इस प्रकार की संपत्तियों की खरीद फरोख्त में हेर-फेर करने वाले चालबाज कारोबारियों की सूचियां बनाई जा रही हैं। दावे किए जा रहे हैं कि जल्दी ही इस जांच प्रक्रिया का दायरा और बढ़ेगा तथा इसमें राजधानी के बड़े-बड़े बागड़ बिल्ले चपेट में आने वाले हैं। यह सकारात्मक वातावरण इसीलिए भी है, क्योंकि मध्य प्रदेश सरकार ने बेईमानी करने वाले रियल एस्टेट कारोबारियों के खिलाफ कड़ा रुख़ अख्तियार कर लिया है। यह संदेश आम होते ही उन लोगों ने राहत की सांस ली है जो अभी तक मकान दुकान जमीन और खेतों की खरीदी बिक्री में इन कारोबारियों का शिकार बनकर आर्थिक नुकसान उठा चुके हैं। बात साफ है, अब चारसौबीसी करने वाले लोगों की मध्य प्रदेश में खैर नहीं है। क्योंकि मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव की ऐसे लोगों पर वक्र दृष्टि स्थायित्व ग्रहण कर चुकी है।

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