
नए वक्फ संशोधन कानून को लेकर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव ने उचित ही कहा है कि विपक्ष ने बेवजह आसमान सिर पर उठा रखा है। राष्ट्रीय स्तर पर ऐसा भ्रामक और भयावह वातावरण खड़ा करने की साजिशें रची जा रही हैं, जिनके माध्यम से यह झूठ स्थापित किया जा सके कि नया वक्फ संशोधन कानून लागू हुआ तो मुसलमानों की आफत आ जाएगी। मुस्लिम धर्म संकट में पड़ जाएगा, मुसलमान भाइयों से उनकी मस्जिदें, दरगाह, ईदगाह, कब्रिस्तान, जमीनें और मदरसे आदि छीन लिए जाएंगे । वहीं कुछ अवसर वादी स्वयंभू मुस्लिम नेताओं ने भी यह भ्रामक वातावरण निर्मित करने में कोई कोर कसर बाकी नहीं छोड़ी है कि नए वक्फ संशोधन कानून के माध्यम से मुस्लिम पर्सनल लॉ को नष्ट भ्रष्ट किया जा रहा है। डॉ मोहन यादव का यह कहना सही है कि कुल मिलाकर एक बार फिर समय अपने आप को दोहरा रहा है। ठीक वैसे, जैसे तीन तलाक कानून लागू होने से पहले इन्हीं विपक्षी नेताओं और मौका परस्त मुसलमान लीडरान द्वारा यह डर फैलाया जा रहा था कि तीन तलाक कानून मुस्लिम पर्सनल लॉ का सीधा-सीधा उल्लंघन है और सरकार का उसमें गैर वाजिब हस्तक्षेप है। मुस्लिम माता बहनों को इस हद तक डराया गया कि वे अपनी भलाई के लिए आ रहे तीन तलाक कानून के खिलाफ ही अनजाने में झंडा बुलंद कर बैठीं । लेकिन जब यह कानून लागू हुआ तो लोगों ने देखा, मुस्लिम समाज की जो महिलाएं, चाहे जब, अप्रत्याशित ढंग से अनचाहे ही प्राप्त हो गए तीन तलाक के चलते परेशान रहा करती थीं। लेकिन पुराने दाकियानूसी रिवाजों के चलते घरों की चार दिवारी में घुट घुट कर जी रही थीं । वे उक्त कानून के लागू होते ही आत्मविश्वास से उठ खड़ी हुईं । उन परिवारों को भी बे इंतेहा खुशी हासिल हुई, जिनकी बहन बेटियां तीन तलाक की बेजा शिकार होकर घरों में घुट घुट कर जी रही थीं । अब माहौल बदल गया है। किसी की हिम्मत नहीं जो जब जी चाहे मुस्लिम महिला को अकारण ही तलाक तलाक तलाक बोलकर उन्हें दोजख की जिंदगी जीने को मजबूर कर सके। जो लोग अतिरिक्त आत्मविश्वास के चलते ऐसा करने की कोशिश करते भी हैं तो वर्तमान तीन तलाक कानून उन्हें उनकी असली जगह पर पहुंचाने में देर नहीं करता। अब तीन तलाक कानून के चलते पुलिस थानों से लेकर अदालतों तक मुस्लिम बहन बेटियों का पक्ष सुना जाता है तथा उन्हें इंसाफ भी मिल रहा है। भोपाल के सेंट्रल लाइब्रेरी मैदान पर संपन्न एक कार्यक्रम पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि यही बात नागरिकता संशोधन कानून यानि सीएए को लेकर खड़ी की गई थी। खुद को सेकुलर बताने वाले नेताओं की फौज चीख चीख कर यह झूठा चीत्कार रही थी कि यह कानून लागू हुआ तो मुसलमानों की भारतीय नागरिकता चली जाएगी। उन्हें देश से निकाल दिया जाएगा। उनके सारे अधिकार छीन लिए जाएंगे। लेकिन आज भारत पूछता है कि अपने सियासी फायदे के लिए गलत बयान करने वाले विपक्षी नेता और उनकी दलाली में संलग्न मौका परस्त मुस्लिम नेता एक भी ऐसा उदाहरण प्रस्तुत करके दिखाएं, जिससे यह पता चलता हो कि नागरिकता संशोधन कानून लागू होने की वजह से किसी एक मुसलमान की भारतीय नागरिकता गई हो, उनके अधिकार छीने गए हों या फिर उन्हें भारत से निकाला गया हो। मुख्यमंत्री श्री यादव ने आयोजकों को लताड़ लगाते हुए कहा कि यह वही विपक्ष और वही मौका परस्त स्वयंभू मुस्लिम नेता हैं, जिन्होंने जम्मू कश्मीर से धारा 370 हटाने से पहले यह डर फैलाया था कि यदि केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने इस धारा को हटाया तो जम्मू कश्मीर के मुसलमान बर्बाद हो जाएंगे। उनकी तरक्की रुक जाएगी और देश में बड़े फसाद खड़े होंगे। गृह युद्ध के हालात पैदा होंगे और खून की नदियां बहेंगी। लेकिन कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक पूरा भारत देख रहा है कि धारा 370 हटाने के बाद जम्मू कश्मीर में आतंकवाद आखरी सांसें गिन रहा है। वहां का आम आदमी अब सुकून की सांस ले रहा है। लोगों के धंधे व्यापार फिर से चल पड़े हैं। विकास के नए आयाम स्थापित हो रहे हैं। केंद्र सरकार की जिन शासकीय योजनाओं का फायदा अभी तक जम्मू कश्मीर के लोगों को नहीं मिल पा रहा था, अब वह भी उन्हें मिलने लगा है। यही नहीं, दशकों बाद वहां पर विधानसभा के चुनाव कराए जाकर जम्मू कश्मीर में जम्हूरियत का राज स्थापित किया जा चुका है। सबसे बड़ी बात यह कि जम्मू कश्मीर में रहने वालीं, वहां पैदा हुईं और पली बढ़ी मुस्लिम समाज की बहन बेटियां भारत के किसी भी राज्य में ब्याही जाएं, उनके पैतृक संपत्ति के अधिकार पर खतरा उत्पन्न होना अब अतीत की बात बन चुका है। उन्होंने यह उदाहरण भी दिया कि जब देश के लोकप्रिय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने यूसीसी, यानि समान नागरिक कानून की बात की, तो उसे लेकर भी मुस्लिम समाज के बीच हव्वा खड़ा किया गया। ऐसी हाय तौबा मचाई गई मानो इस कानून के लागू होते ही भारतीय मुसलमानियत खतरे में पड़ जाएगी। लेकिन अब एक के बाद एक अनेक प्रांतों की सरकारें इस कानून को लागू करने की कवायदों में जोर शोर से जुड़ती जा रही हैं । यहां तक कि उत्तराखंड में तो इसे भली भांति लागू भी किया जा चुका है। कोई साबित करके बताए कि यूनियन सिविल कोड लागू होने के बाद, वहां इस कानून के चलते किसी एक मुसलमान का भी अहित हुआ हो। बल्कि अन्य भारतीय नागरिकों की तरह ही मुसलमानों को समान अधिकार मिलने से उनकी तरक्की से नए रास्ते खुल रहे हैं। एक प्रकार से मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव ने वक्फ कानून के नाम पर हाय तौबा मचाने वालों की पोल खोल कर रख दी है।


