मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दिए सभी समुदायों को एकजुट करने के निर्देश
एजेंसी, भोपाल। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राज्य के संस्कृति विभाग के कार्यों की विस्तार से समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने आने वाले वित्तीय वर्ष के लिए तैयार किए गए विशेष ‘कला पंचांग’ का विमोचन किया। इस पंचांग में साल भर आयोजित होने वाले तमाम सांस्कृतिक और कलात्मक कार्यक्रमों का पूरा ब्यौरा शामिल किया गया है, जिन्हें अब योजनाबद्ध तरीके से जमीन पर उतारा जाएगा। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि आने वाले महीनों में कई बड़े उत्सव, मेले और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होने वाले हैं। ये पर्व हमारी गहरी आस्था और प्रकृति के प्रति सम्मान को दर्शाते हैं। इसलिए संस्कृति विभाग का यह कर्तव्य है कि वह इन आयोजनों में समाज के हर वर्ग और उनकी अनूठी परंपराओं को एक साथ जोड़े। उन्होंने विशेष रूप से आल्हा-ऊदल की वीरता को याद करने वाले कार्यक्रमों, श्रावण उत्सव और भुजरिया त्योहार को मनाने की बात कही। साथ ही नागपंचमी के अवसर पर पर्यावरण और सांपों की प्रजातियों को बचाने का सकारात्मक संदेश देने का निर्देश दिया ताकि सरकारी योजनाओं का प्रचार भी जनता तक आसानी से हो सके।
सांस्कृतिक धरोहर को मिलेगी वैश्विक पहचान
मुख्यमंत्री ने साफ तौर पर कहा कि मध्यप्रदेश की कला, परंपराएं और पुरानी ऐतिहासिक इमारतें राज्य की असली दौलत हैं। इनका बचाव और विकास करना हम सबकी जिम्मेदारी है। उन्होंने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि राज्य की इस अनूठी पहचान को देश और दुनिया के नक्शे पर चमकाने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि काम को और बेहतर बनाने के लिए संस्कृति विभाग की अंदरूनी बनावट में सुधार किया जाए और इसे आज के समय के अनुसार ढाला जाए। मुख्यमंत्री के अनुसार संस्कृति, पर्यटन और ग्रामोद्योग जैसे विभागों को आपस में मिलकर काम करना चाहिए। इससे राज्य में धार्मिक पर्यटन तो बढ़ेगा ही, साथ ही स्थानीय कारीगरों के हाथ से बने कपड़ों और सुंदर कलाकृतियों को भी एक बड़ा बाजार मिल सकेगा।
निर्माण कार्यों में तेजी लाने पर जोर
बैठक में मुख्यमंत्री ने राजा विक्रमादित्य के नाम पर एक अलग शोध संस्थान बनाने की बात कही, जो उनके जीवन पर गहराई से अध्ययन करेगा। इसके अलावा उन्होंने मुख्यमंत्री तीर्थदर्शन योजना का दायरा बढ़ाते हुए इसमें राज्य के बाहर के धार्मिक स्थलों के साथ-साथ मध्यप्रदेश के दोनों ज्योतिर्लिंगों और प्रसिद्ध शक्तिपीठों को भी जोड़ने के निर्देश दिए। उन्होंने श्री राम वन गमन पथ और श्री कृष्ण पाथेय जैसी बड़ी योजनाओं के काम की समीक्षा करते हुए अधिकारियों से कहा कि इन निर्माण कार्यों को जल्द से जल्द पूरा किया जाए। इन योजनाओं के पूरा होने से राज्य में धार्मिक पर्यटन के क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव आएगा।
नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने की मुहिम
डॉ. मोहन यादव ने कहा कि ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में होने वाले कार्यक्रमों में आम जनता की भागीदारी बढ़ाई जाए, जिससे हमारी युवा पीढ़ी अपनी शानदार विरासत को समझ सके। उन्होंने भोपाल के पास स्थित जगदीशपुर के पुराने किले के इतिहास को फिर से जिंदा करने के लिए वहां जल्द ही कैबिनेट की एक विशेष बैठक आयोजित करने की घोषणा की। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिए कि मध्यप्रदेश की धरती से जुड़े उन कलाकारों और गायकों की सूची बनाई जाए जिन्होंने देश-दुनिया में नाम कमाया है, और उन्हें राज्य में अपनी कला का प्रदर्शन करने के लिए आमंत्रित किया जाए।
करोड़ों के विकास कार्य हैं प्रगति पर
कलाकारों को प्रोत्साहन देने के लिए मुख्यमंत्री ने कहा कि पद्म पुरस्कारों के लिए राज्य की तरफ से नाम भेजते समय संस्कृति विभाग भी अपनी सिफारिशें शामिल करे। साथ ही इन पुरस्कारों को जीतने वाले जरूरतमंद कलाकारों की आर्थिक मदद के लिए एक पक्की सरकारी व्यवस्था बनाई जाए। विभाग के आला अधिकारी शिव शेखर शुक्ला ने बैठक में जानकारी दी कि राज्य में इस समय लगभग 17 धार्मिक-सांस्कृतिक केंद्रों और 20 म्यूजियमों का निर्माण किया जा रहा है। साल 2023 से अब तक करीब 4160 करोड़ रुपये के विकास कार्य चल रहे हैं, जिनमें से कई पूरे होने के करीब हैं। उन्होंने बताया कि चित्रकूट के विकास के लिए पड़ोसी राज्य उत्तरप्रदेश की सरकार के साथ मिलकर लगातार काम किया जा रहा है और ओरछा में भगवान श्री राम राजा के दरबार को बिल्कुल नए तरीके से सजाया जा रहा है।
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