Khan Sir controversy

कोचिंग संचालक रौशन आनंद का बड़ा दावा : फैजल खान पर भाई की हत्या की साजिश का संगीन आरोप

देश/प्रदेश बिहार

एजेंसी, पटना। Khan Sir controversy : बिहार के चर्चित शिक्षा जगत में उस समय भारी हलचल मच गई जब कोचिंग विवाद के सिलसिले में कारागार में बंद मुख्य आरोपी रौशन आनंद को न्यायालय से राहत मिली। न्यायालय द्वारा जमानत की मंजूरी मिलने के बाद वे अपने सगे भाई के अंतिम संस्कार की रस्मों में भाग लेने के लिए सीधे सहरसा पहुंचे। कारागार की चहारदीवारी से बाहर कदम रखते ही उन्होंने अपने मुख्य प्रतिद्वंद्वी फैजल खान को इस पूरे मामले के केंद्र में ला खड़ा किया। उन्होंने खुले तौर पर यह घोषणा की कि उनके भाई की असमय मृत्यु कोई साधारण घटना नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक बहुत बड़ी और सोची-समझी साजिश काम कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस कृत्य को फैजल खान और शीत गृह के स्वामी आरएस प्रसाद ने मिलकर अंजाम दिया है। इस सच्चाई को सामने लाने के लिए उन्होंने मांग की कि दोषियों का सत्य परीक्षण यानी नार्को टेस्ट करवाया जाना अत्यंत आवश्यक है। भावुक होते हुए उन्होंने अपने समर्थकों से न्याय की इस लड़ाई में उनका साथ देने की मार्मिक अपील भी की।

विवादित घटनाक्रम और कारागार यात्रा की पृष्ठभूमि

यह संपूर्ण विवाद उस समय शुरू हुआ जब जून महीने की शुरुआत में खान वैश्विक अध्ययन संस्थान के प्रांगण में अचानक हिंसक झड़प और गोलीबारी की वारदात हुई। इस घटना के बाद संस्थान के मुख्य संचालक फैजल खान ने ज्ञान बिंदु संस्थान के मार्गदर्शक रौशन आनंद के खिलाफ साजिश रचने और हमला करवाने की लिखित शिकायत पुलिस में दर्ज कराई। इस प्रशासनिक शिकायत के आधार पर पुलिस महकमे ने त्वरित कार्रवाई करते हुए रौशन आनंद को हिरासत में लेकर कारागार भेज दिया था। इसी बीच जब वे कारागार की सजा काट रहे थे, तभी पड़ोसी देश नेपाल से उनके भाई प्रिंस यादव का शव अत्यंत ही संदेहास्पद स्थितियों में बरामद हुआ, जिसने इस पूरे विवाद को एक नया और बेहद गंभीर मोड़ दे दिया।

फैजल खान का शोक संदेश और निष्पक्ष जांच का आग्रह

दूसरी तरफ, आरोपों के घेरे में आए फैजल खान ने इस दुखद घटना पर अपनी गहरी संवेदना प्रकट की है। उन्होंने एक विशेष संदेश के माध्यम से प्रिंस यादव के असमय देहावसान पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए इसे एक बेहद संवेदनशील और हृदयविदारक घटना करार दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे इस अत्यंत कठिन समय में पीड़ित परिवार के साथ खड़े हैं और सत्य को उजागर करने के लिए किसी भी स्तर की स्वतंत्र एवं उच्च स्तरीय प्रशासनिक जांच के पक्ष में हैं। उन्होंने जांच अधिकारियों से यह भी अनुरोध किया कि घटना के समय जो लोग मृतक के साथ संपर्क में थे, उनकी गतिविधियों की बारीकी से जांच की जाए ताकि घटना का वास्तविक सच समाज के सामने आ सके।

संशय के घेरे में मौत का रहस्य और पुलिसिया कार्रवाई

प्रिंस यादव की इस रहस्यमयी मौत ने पूरे प्रशासनिक अमले को चौकन्ना कर दिया है। वर्तमान में नेपाल सीमा के समीप हुई इस दुखद घटना की वास्तविक वजहें पूरी तरह से साफ नहीं हो सकी हैं। मृतक के परिजन, विभिन्न सामाजिक संगठन और स्थानीय समर्थक लगातार इस मामले को लेकर निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की मांग पर अड़े हुए हैं। रौशन आनंद द्वारा कारागार से बाहर आते ही लगाए गए इन नए आरोपों के बाद स्थानीय पुलिस और खोजी दलों पर दबाव काफी बढ़ गया है, और अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि कानून इस संवेदनशील मामले को सुलझाने के लिए क्या कदम उठाता है।

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