मध्य प्रदेश सरकार को किसान के साथ खेत की बेहतरी की भी चिंता

मध्य प्रदेश सरकार को किसान के साथ खेत की बेहतरी की भी चिंता

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मध्य प्रदेश सरकार को किसान के साथ खेत की बेहतरी की भी चिंता

मध्यप्रदेश की धरती सदैव से ही देश का अन्न भंडार रही है, लेकिन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में वर्तमान सरकार ने जिस प्रकार किसान कल्याण को अपनी कार्यसंस्कृति के केंद्र में रखा है, वह प्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए एक स्वर्णिम युग की आहट है। हाल ही में विधानसभा सत्र के दौरान मुख्यमंत्री द्वारा मंत्रि-परिषद् के निर्णयों की जो घोषणा की गई, वह केवल सरकारी आंकड़ों का संकलन नहीं है, बल्कि यह मध्यप्रदेश के अन्नदाता के प्रति राज्य सरकार की गहरी संवेदनशीलता और दूरदृष्टि का जीवंत प्रमाण है। सरकार का यह संकल्प कि वह किसान कल्याण वर्ष को धरातल पर चरितार्थ करेगी, आज 10,500 करोड़ रुपये की विशाल धनराशि के आवंटन और पाँच महत्वपूर्ण योजनाओं को वर्ष 2031 तक विस्तार देने के निर्णय के साथ और भी सशक्त होकर उभरा है। यह निर्णय स्पष्ट करता है कि राज्य सरकार तात्कालिक राहत के बजाय दीर्घकालिक संरचनात्मक सुधारों पर विश्वास करती है, जिससे किसान न केवल आत्मनिर्भर बनें बल्कि वैश्विक कृषि प्रतिस्पर्धा में भी अग्रणी भूमिका निभा सकें।
​मुख्यमंत्री ने सदन में बड़ी स्पष्टता के साथ इस सत्य को रेखांकित किया कि किसान हमारी अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं और जब रीढ़ मजबूत होती है, तभी विकास का ढांचा अडिग रहता है। मध्यप्रदेश सरकार ने दलहन और तिलहन फसलों, विशेषकर उड़द और सरसों के उत्पादन को प्रोत्साहित करने के लिए जो कदम उठाए हैं, वे देश के कृषि इतिहास में एक मिसाल के रूप में देखे जाएंगे। उड़द की फसल पर समर्थन मूल्य के अतिरिक्त 600 रुपये प्रति क्विंटल का बोनस देना सरकार की उस मंशा को दर्शाता है जिसमें वह चाहती है कि किसान जोखिम मुक्त होकर परंपरागत फसलों के साथ-साथ उन फसलों की ओर भी रुख करें जिनकी बाजार में मांग अधिक है। इसी तरह, सरसों के उत्पादन में हुई 28 प्रतिशत की अभूतपूर्व वृद्धि को देखते हुए इसे भावांतर योजना के दायरे में लाना एक क्रांतिकारी कदम है। यह सुनिश्चित करता है कि जब बाजार में कीमतें गिरें, तब भी किसान का पसीना मिट्टी में न मिले, बल्कि उसे उसकी मेहनत का उचित और न्यायसंगत मूल्य प्राप्त हो।
​सरकार द्वारा जिन पाँच प्रमुख योजनाओं को अगले पाँच वर्षों के लिए निरंतर रखने की मंजूरी दी गई है, वे कृषि के हर आयाम को स्पर्श करती हैं। प्रधानमंत्री राष्ट्रीय किसान कृषि विकास योजना के माध्यम से संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करना हो या प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत ‘पर ड्रॉप मोर क्रॉप’ के मंत्र को साकार करना, सरकार का विजन तकनीक और परंपरा के संगम पर टिका है। ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई प्रणालियों के लिए 2031 तक निरंतर अनुदान की व्यवस्था यह बताती है कि सरकार जल संरक्षण और कम लागत में अधिक उत्पादन के महत्व को समझती है। यह न केवल पानी की बचत करेगा, बल्कि मिट्टी की सेहत को भी अत्यधिक सिंचाई के दुष्प्रभाव से बचाएगा। इसके साथ ही राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा एवं पोषण मिशन के माध्यम से गेहूं, धान और मोटे अनाजों के क्षेत्र विस्तार पर दिया जा रहा जोर मध्यप्रदेश को कुपोषण मुक्त और समृद्ध बनाने की दिशा में एक बड़ा निवेश है।
​विशेष रूप से उल्लेखनीय है ‘नेशनल मिशन ऑन नेचुरल फार्मिंग’ के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता। आज के दौर में जब रासायनिक खाद और कीटनाशकों के अत्यधिक प्रयोग से मानव स्वास्थ्य और मिट्टी की उर्वरता दोनों संकट में हैं, तब प्राकृतिक खेती को 2031 तक सरकारी संरक्षण देना एक भविष्योन्मुखी निर्णय है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का यह मानना कि प्राकृतिक खेती न केवल स्वास्थ्यवर्धक है बल्कि पर्यावरण सुरक्षा के लिए भी अनिवार्य है, उनकी उस सोच को प्रदर्शित करता है जो आने वाली पीढ़ियों के प्रति जवाबदेह है। रसायन मुक्त खाद्य सामग्री की उपलब्धता सुनिश्चित कर मध्यप्रदेश न केवल अपने नागरिकों को बेहतर जीवन दे सकता है, बल्कि जैविक उत्पादों के बाजार में एक वैश्विक ब्रांड के रूप में उभर सकता है। इसी श्रृंखला में राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन – ऑयल सीड योजना के माध्यम से तिलहन उत्पादकों को मिलने वाला लाभ भारत की खाद्य तेल आत्मनिर्भरता में मध्यप्रदेश के योगदान को और भी अधिक प्रभावी बनाएगा।
​इन तमाम योजनाओं का सामूहिक प्रभाव केवल कृषि तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह प्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था में एक नई जान फूँकने का कार्य करेगा। जब किसान की जेब में पैसा आएगा, तो ग्रामीण बाजारों में मांग बढ़ेगी, जिससे व्यापार, परिवहन और सेवा क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश सरकार ने यह सिद्ध कर दिया है कि उसकी राजनीति का मूलमंत्र सेवा और सुशासन है। यह 10,500 करोड़ रुपये का निवेश केवल सरकारी खर्च नहीं है, बल्कि यह मध्यप्रदेश के सुनहरे भविष्य की नींव है। सरकार की यह कटिबद्धता कि वह किसानों को बिचौलियों के चंगुल से निकालकर सीधे लाभ पहुँचाएगी, एक ऐसे समावेशी समाज के निर्माण का मार्ग प्रशस्त करती है जहाँ अन्नदाता वास्तव में भाग्यविधाता है। आने वाले वर्षों में, 31 मार्च 2031 तक निरंतर चलने वाली ये योजनाएं मध्यप्रदेश को देश के कृषि मानचित्र पर एक ऐसे आदर्श राज्य के रूप में स्थापित करेंगी जहाँ विकास का लाभ खेत की आखिरी मेढ़ पर खड़े किसान तक पारदर्शिता के साथ पहुँच रहा है। यह वास्तव में किसान कल्याण के प्रति एक समर्पित सरकार का वह अभिनंदन है, जिसका स्वागत हर वर्ग को करना चाहिए।

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