मध्य प्रदेश में पारंपरिक चिकित्सा को बड़ा बढ़ावा, धार्मिक स्थलों पर खुलेंगे वेलनेस सेंटर
एजेंसी, भोपाल। मध्य प्रदेश की मोहन सरकार राज्य के नागरिकों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देने के लिए लगातार नए कदम उठा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने आयुष विभाग के कामकाज की बारीकी से समीक्षा की और जरूरी दिशा-निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के प्रमुख धार्मिक और पर्यटन स्थलों पर आयुर्वेद के जरिए इलाज की व्यवस्था और वेलनेस सेंटर बनाना एक बेहतरीन कदम है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि दूसरे राज्यों में इस क्षेत्र में हुए अच्छे प्रयोगों को समझें और मध्य प्रदेश के हर नागरिक तक इन नई तकनीकों का फायदा पहुंचाएं। सीएम ने बुजुर्गों की घर पर ही देखभाल करने वाले वयोमित्र अभियान और गंभीर बीमारियों से पीड़ित मरीजों को राहत देने वाले कारुण्य कार्यक्रम की भी जमकर तारीफ की।
पर्यटन स्थलों पर मिलेगी आयुर्वेद की सुविधा
बैठक के दौरान अधिकारियों ने बताया कि पर्यटन विभाग के साथ मिलकर राज्य में 12 आयुष हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर तैयार किए जा रहे हैं। इन सेंटरों को खजुराहो, ओंकारेश्वर, चंदेरी, चित्रकूट, पचमढ़ी और ओरछा जैसे मशहूर पर्यटन स्थलों के अलावा उज्जैन, दतिया, मंदसौर, आलीराजपुर, सिंगरौली और आगर-मालवा में स्थापित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने साफ किया कि एलोपैथी के साथ-साथ पारंपरिक भारतीय चिकित्सा प्रणालियों को बढ़ावा देना बहुत जरूरी है। उन्होंने उज्जैन जैसी जगहों का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां बिना किसी बड़ी सर्जरी के आयुर्वेद से मरीजों का सफल इलाज किया जा रहा है। सरकार उन लोगों को भी सम्मानित और प्रोत्साहित करेगी जो जीवनभर स्वस्थ रहने के लिए आयुर्वेद का सहारा लेते हैं।
हर जिला अस्पताल में बनेगी पंचकर्म यूनिट
स्वास्थ्य नीति और आने वाले सालों के विजन को ध्यान में रखते हुए सरकार जिला अस्पतालों में आयुष चिकित्सा के लिए अलग से हिस्से तैयार कर रही है। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि हर एक केंद्र पर पंचकर्म यूनिट की शुरुआत की जाए और इस काम में तेजी लाई जाए। इसके साथ ही आदिवासी इलाकों और सिकल सेल एनीमिया जैसी बीमारी से जूझ रहे जिलों में आयुर्वेद की दवाएं समय पर बांटने के निर्देश भी दिए गए हैं।
कॉलेजों और अस्पतालों का तेजी से हो रहा विस्तार
राज्य के 22 जिलों में एलोपैथी अस्पतालों के अंदर ही आयुष केंद्र बनाने की प्रक्रिया चल रही है। इसके अलावा 5 नए आयुर्वेदिक कॉलेज और 12 जिलों में 50 बिस्तरों वाले आयुष अस्पताल खोलने की तैयारी है। केंद्र सरकार की मदद से नर्मदापुरम, मुरैना, शहडोल, बालाघाट, सागर, झाबुआ और शुजालपुर में नए आयुर्वेदिक कॉलेजों को मंजूरी मिल चुकी है। भोपाल के सरकारी आयुर्वेद कॉलेज में करोड़ों की लागत से नया भवन बनाया जा रहा है। 6 जिला आयुष कार्यालय और 53 नए औषधालय भवन बनकर तैयार हो चुके हैं।
श्रमिकों को मिलेगी कैशलेस इलाज की सुविधा
सरकार ने लक्ष्य रखा है कि सभी 9 आयुष कॉलेजों को इलाज के पहले बड़े केंद्र के रूप में विकसित किया जाए, वहां हॉस्टलों का निर्माण हो और यूनानी से जुड़े कोर्स की पढ़ाई हिंदी में कराई जाए। सबसे बड़ी राहत श्रम विभाग के सहयोग से करीब 13 लाख पंजीकृत मजदूर परिवारों को मिलेगी, जिन्हें आयुष पद्धति से कैशलेस इलाज की सुविधा देने की तैयारी है। स्वास्थ्य बीमा में भी आयुर्वेद को जोड़ने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। बिना आयुष सुविधा वाले इलाकों के लिए 20 मोबाइल मेडिकल गाड़ियां चलाने और एक प्राकृतिक एवं योग कॉलेज खोलने के लिए 75 करोड़ रुपये का बजट तय किया गया है। इस महत्वपूर्ण बैठक में आयुष मंत्री इंदर सिंह परमार और मुख्य सचिव अनुराग जैन सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
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