मध्य प्रदेश में उद्योग शिक्षा संस्कार और विकास के बीच अद्भुत संतुलन

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अक्सर सुनने में आता है कि अमुक राज्य एक क्षेत्र विशेष में तो विकास के नए-नए मापदंड स्थापित करता चला गया। किंतु अन्य क्षेत्रों पर उसका ध्यान ही नहीं गया। फल स्वरुप वहां घोर असंतुलन पैदा हो जाने के चलते विपरीत परिस्थितियां निर्मित हो गईं। सार यह निकलता है कि जो थोड़ा बहुत अच्छा हुआ था वह भी चौतरफा विकास के बीच संतुलन के अभाव में सब गुड गोबर हो गया। बहुत कम राज्य ऐसे होते हैं जो विकास के मायने में सभी क्षेत्रों के बीच एक सारगर्भित संतुलन बनाए रखते हैं। नतीजतन सभी वर्गों में खुशहाली और संतुष्टि बनी रहती है। जिसका राजनीतिक लाभ अंततः सत्ता चलाने वाली राजनीतिक पार्टी को मिलता ही है। मध्य प्रदेश राज्य की भी यही खूबी है और खूबसूरती भी। मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव ने अपनी कार्य प्रणाली के माध्यम से विकास के मामले में सभी क्षेत्र के बीच बेहतर संतुलन बनाने का काम कर दिखाया है। यही वजह है कि कहीं उद्योग स्थापित हो रहे हैं, तो कहीं पर कैबिनेट मीटिंगों के माध्यम से विकास के नए-नए मापदंड स्थापित किया जा रहे हैं। कहीं पर विद्यालयीन शिक्षा के मामले में नवाचारों का श्री गणेश हो रहा है। यही नहीं, जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों को जनता के बीच जाने की आवश्यकता स्थापित की जा रही है और आने वाली बारिश में मानसून का पानी बेकार न चला जाए, इसके लिए अभी से जमीनी कार्य करने हेतु विभागों को निर्देशित किया जा रहा है। शुरुआत जबलपुर से करते हैं‌। यहां पर मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव में अपनी महत्वाकांक्षी परियोजना सांदीपनि विद्यालय भवन के निर्माणों का श्री गणेश किया। सबसे पहले उन्होंने जबलपुर में नए सांदीपनि विद्यालय के भवन हेतु आधार शिला रखी। जबलपुर में यह भवन 27 करोड़ 84 लाख रुपए से बनकर तैयार होगा। इस विद्यालय का निर्माण 11.62 एकड़ जमीन पर होने जा रहा है। यह नई तकनीक के तहत जी प्लस भवन के रूप में निर्मित होने जा रहा है। इसमें केजी से लेकर 12वीं तक की शिक्षा दीक्षा पूर्ण की जा सकेगी। विद्यालय के भवन में 57 कक्ष होंगे। इनमें सबसे ज्यादा क्लासरूम, उनके बाद स्टाफ और फिर लाइब्रेरी एवं लैबोरेट्री संबंधी क्षेत्र आरक्षित किए जाएंगे। इस विद्यालय में 1960 विद्यार्थियों को पढ़ाए जाने की व्यवस्था रहेगी। इनके अलावा बास्केटबॉल, खोखो आदि खेलों के लिए परिक्षेत्रों का निर्माण होगा। एक सर्व सुविधा युक्त खेल का मैदान भी यहां उपलब्ध कराने की योजना है। मुख्यमंत्री का दावा है कि यह स्कूल बड़े और अच्छे से अच्छे निजी स्कूलों के जैसे अत्याधुनिक क्लासरूम से युक्त होंगे। अलग-अलग विशेषताओं की लेबोरेटरी उपलब्ध रहेंगी। खेल योग सांस्कृतिक आयोजन आदि के लिए सभी संसाधन और सुविधाएं उपलब्ध रहेंगे। मुख्यमंत्री ने दूसरी सौगात रायसेन जिले को दी। यहां पर वंदे भारत और मेट्रो ट्रेनों के कोच बनाने वाली फैक्ट्री स्थापित होने जा रही है । इस फैक्ट्री की लागत 1800 करोड रुपए आने का अनुमान है। 60 हेक्टेयर जमीन पर लगने वाली यह फैक्ट्री रायसेन जिले के उमरिया गांव में स्थापित होने जा रही है। इसका निर्माण भारत अर्थ मूवर्स लिमिटेड द्वारा किया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव ने बेंगलुरु में संबंधित कंपनी के अधिकारियों को भूमि आवंटन संबंधी एक आवंटन पत्र भेंट किया। जानकारी यह भी मिल रही है कि उक्त फैक्ट्री में बंदे भारत और मेट्रो ट्रेन कोच के अलावा सैन्य वाहनों का भी निर्माण किया जाएगा। जाहिर है जब इतने बड़े संयंत्र की स्थापना होगी तो केवल उमरिया गांव और रायसेन जिला ही नहीं, आसपास के अनेक नागरिकों को यहां रोजगार उपलब्ध हो सकेगा। फल स्वरुप एक बहुत बड़े इलाके में खुशहाली का माहौल निर्मित होगा। तीसरी महत्वपूर्ण योजना यह है कि विकसित भारत के लिए मध्य प्रदेश का विकसित होना भी बहुत आवश्यक है। इस अवधारणा के लिए विजन डॉक्यूमेंट 2047 तैयार किया जा रहा है। यह पांच पांच वर्षों की योजनाओं की श्रृंखला के रूप में तैयार किया जाएगा। इस पर 20 मई को कैबिनेट बैठक मंथन करने तैयारी कर रही है। बताया जा रहा है कि कैबिनेट बैठक में डॉक्टर मोहन यादव के साथ दोनों उपमुख्यमंत्री भी मौजूद रहेंगे। उनके अलावा मुख्य सचिव अनुराग जैन, सभी विभागीय एसीएस, पीएस और सचिव शामिल हो सकते हैं। उल्लेखनीय है कि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2047 तक विकसित भारत के विजन को लेकर कार्य कर रहे हैं। जिलों में और जिला अंतर्गत आने वाली तहसीलों, ग्रामीण क्षेत्रों में किन विकास कार्यों की आवश्यकता है, कौन से कार्य हो रहे हैं और कितने पूर्णता को प्राप्त हो गए हैं। कहीं-कहीं पर शिकायतें और सुझाव भी शासन प्रशासन के इंतजार में हैं । इन सभी के निराकरण हेतु अधिकारियों को मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव द्वारा निर्देशित किया गया है कि उन्हें मई और जून के महीने में प्रतिमाह दो बार आवंटित जिलों का दौरा करना होगा तथा बताए गए कार्यों के बारे में एक रिपोर्ट तैयार करके सरकार के समक्ष प्रस्तुत करनी होगी। बता दें कि उक्त कार्य के लिए अतिरिक्त संचालक से लेकर कार्यपालन यंत्री स्तर तक के अधिकारियों की ड्युटियां लगाई गई हैं। सबसे खास बात यह कि मुख्यमंत्री ने पंचायती राज विभाग को जल गंगा संवर्धन योजना अंतर्गत बेहद सक्रियता के निर्देश दिए हैं। उन्होंने बताया कि सभी जिलों में अभी तक 81000 खेत तालाब, 1000 अमृत सरोवर और 100,000 कुए रिचार्ज करने का काम चल रहा है। साथ ही जल संग्रहण और भूजल संवर्धन के 70,000 काम पूरे करने का लक्ष्य निर्धारित है।

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