नीट यूजी परीक्षा

मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री यादव द्वारा नीट यूजी परीक्षा का नया प्रबंधन मॉडल

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मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री यादव द्वारा नीट यूजी परीक्षा का नया प्रबंधन मॉडल

परीक्षाएं केवल विद्यार्थियों की शैक्षणिक योग्यता का मूल्यांकन नहीं होतीं, बल्कि वे किसी भी राज्य की प्रशासनिक कार्यकुशलता, शुचिता और संवेदनशीलता की कसौटी भी होती हैं। आगामी २१ जून को आयोजित होने वाली नीट (अंडर ग्रेजुएट) परीक्षा-२०२६ के संदर्भ में मध्य प्रदेश सरकार द्वारा की जा रही तैयारियां इसी प्रशासनिक सजगता और छात्र-हितैषी दृष्टिकोण का जीवंत प्रमाण हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में राज्य सरकार ने इस राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा को पूरी पारदर्शिता, त्रुटिहीन सुरक्षा और उच्च स्तरीय मानवीय दृष्टिकोण के साथ संपन्न कराने का जो संकल्प लिया है, वह न केवल सराहनीय है बल्कि भविष्य की अन्य परीक्षाओं के लिए एक अनुकरणीय मानक भी स्थापित करता है। प्रदेश के ३० जिलों के २८३ परीक्षा केंद्रों पर आयोजित होने वाली इस व्यापक परीक्षा के हर पहलू को जिस बारीकी से संवारा गया है, वह शासन की दूरदर्शिता को दर्शाता है। एक तरफ जहां परीक्षा की शुचिता को बनाए रखने के लिए तकनीक और कड़े सुरक्षा मानकों का सहारा लिया गया है, वहीं दूसरी तरफ भीषण गर्मी के मौसम और वीआईपी मूवमेंट जैसी व्यावहारिक चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों की सुविधा का जो खाका खींचा गया है, वह प्रशासन के संवेदनशील चेहरे को उजागर करता है।

 

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​किसी भी राष्ट्रीय परीक्षा की साख उसकी पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर टिकी होती है। मध्य प्रदेश शासन ने इसे अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता बनाते हुए परीक्षा से दो दिन पूर्व ही यानी १९ जून को सभी केंद्रों पर बायोमैट्रिक मशीनें, सीसीटीवी कैमरे और जैमर्स स्थापित करने के सख्त निर्देश दिए हैं। इतना ही नहीं, २० जून को इनका बाकायदा ट्रायल रन किया जाना यह सुनिश्चित करेगा कि परीक्षा के दिन तकनीक की वजह से कोई व्यवधान न आए। मुख्यमंत्री की यह सोच कि परीक्षा के लिए उपयोग में लाई जा रही इस मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) को भविष्य में प्रदेश में होने वाली सभी परीक्षाओं के लिए एक स्थाई मॉडल बनाया जाए, राज्य के शिक्षा और परीक्षा तंत्र में एक युगांतकारी सुधार की नींव रखता है। जब एक बार कोई पारदर्शी व्यवस्था स्थाई नीति बन जाती है, तो वह पूरी प्रणाली में विश्वास का संचार करती है। दो-स्तरीय सुरक्षा घेरा, जिसमें बाहरी परत राज्य पुलिस व होमगार्ड की होगी और आंतरिक परत राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) की होगी, किसी भी प्रकार की गड़बड़ी की गुंजाइश को पूरी तरह समाप्त कर देता है। महिला अभ्यर्थियों की गरिमा और सुविधा का ध्यान रखते हुए उनके लिए पृथक फ्रिस्किंग सुविधा और पर्याप्त संख्या में महिला पुलिसकर्मियों की तैनाती प्रशासन की गरिमामयी सोच का परिचय देती है। वायुसेना के माध्यम से प्रश्नपत्रों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाना और बालाघाट जैसे दुर्गम क्षेत्रों में हेलीकॉप्टर की मदद लेना यह साबित करता है कि शासन परीक्षा की गोपनीयता और समयबद्धता को लेकर कितना गंभीर है।
​इस बार की नीट परीक्षा का आयोजन प्रशासनिक सूझबूझ की एक बड़ी परीक्षा भी है, क्योंकि २१ जून का दिन दो अन्य महत्वपूर्ण आयोजनों का साक्षी बनने जा रहा है। पहला, इस दिन अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के व्यापक कार्यक्रम पूरे प्रदेश में होने हैं, और दूसरा, जबलपुर में राष्ट्रपति महोदया का गरिमामयी प्रवास प्रस्तावित है। ऐसी स्थिति में यातायात का सुगम प्रबंधन करना एक बड़ी चुनौती बन सकता था। परंतु मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जिस तत्परता से पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को निर्देशित किया है, उसने इस चुनौती को एक सुअवसर में बदल दिया है। जबलपुर के २४ केंद्रों सहित पूरे प्रदेश में यातायात का ऐसा नियोजन किया गया है कि किसी भी अभ्यर्थी को केंद्र तक पहुंचने में कोई बाधा न आए। इस संदर्भ में मुख्यमंत्री का यह आह्वान अत्यंत अनुकरणीय और भावुक करने वाला है कि यदि किसी परीक्षार्थी को साधन न मिलने की परेशानी होती है, तो पुलिस और प्रशासन के अधिकारी अपने शासकीय या निजी वाहनों से उन्हें परीक्षा केंद्र तक पहुंचाएं। यह निर्देश केवल एक प्रशासनिक आदेश नहीं है, बल्कि एक अभिभावक की तरह अपने राज्य के बच्चों के भविष्य को सुरक्षित करने की गहरी चिंता का प्रकटीकरण है। जब सत्ता के शीर्ष से ऐसी संवेदनशीलता प्रवाहित होती है, तो वह जमीन पर तैनात मैदानी अधिकारियों और कर्मचारियों में भी सेवा और समर्पण का भाव जगाती है।
​परीक्षा के सफल संचालन के लिए जिला स्तर पर समन्वय समितियों का गठन, नियंत्रण कक्षों की स्थापना और प्रत्येक तीन-चार केंद्रों पर नोडल अधिकारियों की नियुक्ति एक मजबूत और विकेंद्रीकृत प्रशासनिक ढांचे को दर्शाती है। सेक्टर और ड्यूटी मजिस्ट्रेटों की तैनाती कानून-व्यवस्था को सुदृढ़ रखेगी। लेकिन इस पूरे आयोजन की सबसे सुंदर बात यह है कि प्रशासन ने केवल परीक्षा की प्रक्रिया पर ही ध्यान केंद्रित नहीं किया, बल्कि परीक्षा देने वाले विद्यार्थियों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य की भी उतनी ही चिंता की है। जून महीने की तपती धूप और उमस को देखते हुए परीक्षा केंद्रों पर अनिवार्य रूप से जनरेटरों की व्यवस्था, प्रकाश और पंखों की सुचारू उपलब्धता सुनिश्चित करना बच्चों को एक शांत और तनावमुक्त वातावरण प्रदान करेगा। इसके अलावा, स्वच्छ पेयजल, ओआरएस और ग्लूकोज की उपलब्धता के साथ-साथ हर केंद्र पर डॉक्टरों, पैरामेडिक्स और प्राथमिक उपचार किट की मौजूदगी यह आश्वस्त करती है कि आपात स्थिति में त्वरित चिकित्सा सहायता मिलेगी। इस बार परीक्षार्थियों को मिलने वाला १५ मिनट का अतिरिक्त समय भी उनके मानसिक दबाव को कम करने में सहायक सिद्ध होगा।
​अक्सर देखा जाता है कि परीक्षाओं के दौरान विद्यार्थियों के साथ आने वाले माता-पिता और अभिभावकों को केंद्रों के बाहर कड़ी धूप में घंटों इंतजार करना पड़ता है, जिससे वे भारी असुविधा का सामना करते हैं। मध्य प्रदेश सरकार ने इस अनदेखे पहलू पर भी संवेदनशीलता दिखाते हुए अभिभावकों के लिए पर्याप्त आकार के टेंट, बैठने की व्यवस्था और मोबाइल शौचालयों का प्रबंध करने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही अभ्यर्थियों के सामान को सुरक्षित रखने के लिए प्रत्येक केंद्र पर क्लॉक रूम की व्यवस्था और शहरों से दूर स्थित केंद्रों के लिए सार्वजनिक परिवहन की सुविधा देना यह साबित करता है कि शासन ने इस पूरी परीक्षा को एक यज्ञ की तरह लिया है, जिसमें हर आने वाले का सम्मान और सुविधा सर्वोपरि है। भीड़ प्रबंधन और सुगम आवागमन की यह पूरी रूपरेखा मध्य प्रदेश को देश के सामने एक रोल मॉडल के रूप में प्रस्तुत करती है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की यह दूरदर्शी और सहृदय पहल न केवल विद्यार्थियों के आत्मविश्वास को बढ़ाएगी, बल्कि उनके अभिभावकों को भी एक निश्चिंतता प्रदान करेगी। जब पूरा सरकारी तंत्र इस मुस्तैदी और आत्मीयता से जुट जाता है, तो सफलता सुनिश्चित हो जाती है। यह आयोजन निश्चित रूप से प्रदेश की प्रशासनिक शुचिता, सुरक्षा और लोक-कल्याणकारी नीतियों के इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय के रूप में दर्ज होगा।

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