एजेंसी, भोपाल। राजधानी के फतेहगढ़ स्थित नगर निगम कार्यालय में शुक्रवार सुबह लोकायुक्त पुलिस ने औचक दबिश दी, जिससे प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया। यह कार्रवाई निर्माण कार्यों के नाम पर फर्जी बिल लगाकर करोड़ों रुपये के भुगतान की गंभीर शिकायतों के बाद की गई है। लोकायुक्त की विशेष टीम ने सुबह दफ्तर खुलते ही वित्त (फायनेंस) और कंप्यूटर शाखा को अपने नियंत्रण में ले लिया।
जांच टीम ने पिछले 10 वर्षों के महत्वपूर्ण रिकॉर्ड और फाइलें जब्त की हैं। सूत्रों के मुताबिक, लोकायुक्त को ऐसी शिकायतें मिली थीं कि नगर निगम में कई ऐसे कार्यों का भुगतान कर दिया गया जो केवल कागजों पर हुए थे, जबकि जमीनी स्तर पर कोई काम नहीं किया गया। जब्त किए गए दस्तावेजों के जरिए अब यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि किन ठेकेदारों और अधिकारियों की मिलीभगत से यह खेल चल रहा था।
ये भी पढ़े : व्हाट्सएप की बड़ी पहल : 13 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए माता-पिता की निगरानी में बनेंगे खास खाते
प्रारंभिक जांच में इसे एक सुनियोजित और संगठित घोटाला माना जा रहा है, जो लंबे समय से नगर निगम में जड़ें जमाए हुए था। लोकायुक्त की टीम फाइलों की बारीकी से पड़ताल कर रही है और आने वाले दिनों में कई बड़े अधिकारियों और कर्मचारियों से पूछताछ की जा सकती है। इस कार्रवाई के बाद से निगम के संबंधित विभागों में सन्नाटा पसरा हुआ है और कई फाइलों के गायब होने की आशंका के चलते कंप्यूटर डेटा को भी सुरक्षित किया गया है।


