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लोकसभा की मंजूरी : 71 पुराने कानूनों की विदाई, विकसित भारत की दिशा में बड़ा कदम

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एजेंसी, नई दिल्ली। अप्रचलित और पुराने हो चुके 71 कानूनों को समाप्त करने या संशोधित करने के प्रावधान वाले ‘निरसन और संशोधन विधेयक, 2025’ को लोकसभा ने मंगलवार को मंजूरी दे दी। कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने इस विधेयक को लेकर कुछ विपक्षी सदस्यों की आपत्तियों को खारिज करते हुए कहा, ‘‘यह विधेयक जल्दबाजी में नहीं, सोच-विचार करके लाया गया है और विकसित भारत की दिशा में बढ़ता कदम है।’’ उन्होंने कहा कि 2014 में नरेन्द्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद लगातार कानून बनाए जा रहे हैं, अनावश्यक कानूनों को निरस्त किया जा रहा है तथा कुछ कानूनों में आवश्यकतानुसार संशोधन किया जा रहा है। मेघवाल ने कहा कि उक्त विधेयक गुलामी के अंशों से मुक्ति पाने, विकसित भारत, विरासत पर गर्व करने, एकजुट रहने और कर्तव्य भाव को बढ़ाने के प्रधानमंत्री मोदी के ‘पंच प्रण’ के तहत लाया गया है।

उन्होंने कहा, ‘‘हमारे शासनकाल में अगर हमें लगेगा कि हमें लोगों को व्यापार सुगमता के लिए प्रोत्साहित करना है, लोगों को समान अधिकार देने हैं, नागरिकों को सुविधा देनी है तो निश्चित रूप से मोदी सरकार इस दिशा में आगे बढ़ेगी।’’ मेघवाल के जवाब के बाद सदन ने ध्वनिमत से विधेयक को मंजूरी प्रदान की। उन्होंने कहा कि इस विधेयक के माध्यम से छह अधिनियमों को निरस्त किया जाएगा और 65 में संशोधन किया जाएगा। कानून मंत्री ने कहा कि विपक्ष के कुछ सदस्यों ने कहा कि कानूनों को क्यों समाप्त किया जा रहा है और क्या सरकार जल्दबाजी में कानून लेकर आती है। उन्होंने कहा, ‘‘मैं कांग्रेस सांसदों से पूछना चाहता हूं कि संप्रग-एक और दो सरकारों में 2004 से 2014 के बीच या तो वे काम करना भूल गए या किसी और काम में लग गए, इसलिए इन्होंने एक भी कानून को निरस्त नहीं किया। इससे पहले तो कानून निरस्त होते रहे। यह भी एक विधायी कामकाज है।’’

‘योजनाओं के नाम बदलने की सनक समझ नहीं आती’, बोलीं प्रियंका- ‘जी राम जी’ विधेयक वापस लिया जाए
कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाद्रा ने ‘महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम’ (मनरेगा) के स्थान पर दूसरा विधेयक लाए जाने को लेकर मंगलवार को मोदी सरकार पर एक बार फिर निशाना साधा और कहा कि योजनाओं के नाम बदलने की सनक समझ नहीं आती। प्रियंका गांधी वाद्रा ने कहा कि मनरेगा के स्थान पर लाया गया ‘विकसित भारत जी राम जी’ विधयेक गलत लगता है और इसे वापस लिया जाना चाहिए। केरल के वायनाड से लोकसभा सदस्य ने संसद परिसर में संवाददाताओं से कहा, ‘‘योजनाओं के नाम बदलने की सनक मुझे समझ नहीं आती। योजनाओं की नाम बदलने की प्रक्रिया में बहुत पैसा खर्च होता है।’’

बोलीं प्रियंका- 'जी राम जी' विधेयक वापस लिया जाए

उन्होंने कहा कि मनरेगा में गरीब लोगों को 100 दिन के रोज़गार का अधिकार दिया गया था, लेकिन नया विधेयक मनरेगा के इस अधिकार को कमज़ोर करेगा। कांग्रेस नेता ने दावा किया, ‘‘सरकार ने इस बिल में दो-तीन ऐसी चीज़ें जोड़ी हैं, जिससे बाहरी तौर पर समझ आता है कि काम के दिन बढ़ा दिए गए हैं।’’ उन्होंने कहा कि मनरेगा का बजट हर साल घटाया जाता रहा है और अब इस नए विधेयक में ग्राम पंचायतों के अधिकार को भी ख़त्म कर दिया गया है। प्रियंका गांधी ने कहा, ‘‘इसलिए ये विधेयक गलत लगता है। इसे वापस लिया जाना चाहिए।’’ सरकार मनरेगा को निरस्त करने और एक नया कानून बनाने के लिए लोकसभा में विधेयक ला सकती है। नए विधेयक का नाम ‘विकसित भारत-रोजगार और आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण)’ (विकसित भारत- जी राम जी) विधेयक, 2025’ होगा। विधेयक की प्रतियां लोकसभा सदस्यों को बांटी गई हैं।

काम का जबरदस्त बोझ और कम मानदेय… सोनिया गांधी का सरकार से सवाल- आशा और आंगनवाड़ी वर्कर्स के लिए क्या करेंगे?
राज्यसभा में मंगलवार को कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी ने आशा एवं आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के ऊपर काम का जबरदस्त दबाव और उन्हें कम मानदेय दिये जाने का मुद्दा उठाते हुए सरकार से अनुरोध किया कि देश भर में इनकी रिक्तियों को भरा जाए और इनके मानदेय में केंद्र द्वारा दिये जाने वाले अंशदान को दोगुना किया जाए। गांधी ने शून्यकाल में यह मुद्दा उठाते हुए कहा कि कई महत्वपूर्ण सरकारी कार्यक्रमों के क्रियान्वयन में लगीं आशा कार्यकर्ता, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, सहायक तथा राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत काम करने वाले कार्यकर्ता काम के बोझ के अत्यंत दबाव में हैं। उन्होंने कहा कि यह पहल महिलाओं के सशक्तीकरण की दिशा में की गई थीं, किंतु सार्वजनिक सेवा में बहुत योगदान देने के बावजूद इन महिला कार्यकर्ताओं पर अत्यंत दबाव है और उन्हें कम पारिश्रमिक दिया जाता है। गांधी ने कहा कि देश भर में आशा कार्यकर्ता टीकाकरण कार्यक्रम चलाती हैं तथा मातृ कल्याण एवं परिवार कल्याण कार्यों में मदद करती हैं, इसके बावजूद उन्हें बहुत कम मानदेय और सामाजिक सुरक्षा मिलती है।

सोनिया गांधी का सरकार से सवाल- आशा और आंगनवाड़ी वर्कर्स के लिए क्या करेंगे?

उन्होंने कहा कि इसी प्रकार आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को बहुत कम मानदेय मिलता है। कांग्रेस नेता ने कहा कि देश भर में विभिन्न स्तरों पर आईसीडीएस (एकीकृत बाल विकास योजनाओं) में विभिन्न रिक्तियां हैं। उन्होंने कहा कि इन रिक्तियों के कारण लाखों माताओं एवं बच्चों को आवश्यक सेवाएं नहीं मिल पा रही हैं। उन्होंने कहा कि इन पदों पर जब नियुक्ति होती है तो वे भी आबादी के अनुसार पर्याप्त नहीं होती हैं क्योंकि जनगणना 2011 के बाद आंकड़ों को अद्यतन नहीं किया गया। गांधी ने केंद्र सरकार से अनुरोध किया कि वह राज्यों के साथ मिलकर इन प्राथमिकताओं पर काम करे, सभी रिक्तियों को भरा जाए, सभी कार्यकर्ताओं को समय पर भुगतान किया जाए और अग्रिम मोर्चे पर काम करने वाले इन कार्यकताओं को दिये जाने वाले मानदेय में केंद्र के अंशदान को दोगुना किए जाए। कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष ने यह आग्रह भी किया कि ढाई हजार से अधिक आबादी वाले गांवों में अतिरिक्त आशा कार्यकर्ताओं की नियुक्ति की जाए तथा बच्चों की प्रारंभिक शिक्षा में मदद के लिए आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की संख्या दोगुनी की जाए।

राज्यसभा में सोनिया गांधी ने की केंद्र सरकार से डिमांड – ‘डबल करें आशा-आंगनबाड़ी का मानदेय’
राज्यसभा में मंगलवार को कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी ने आशा एवं आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के ऊपर काम का जबरदस्त दबाव और उन्हें कम मानदेय दिये जाने का दावा करते हुए सरकार से अनुरोध किया कि देश भर में आईसीडीएस की तीन लाख रिक्तियों को भरा जाए और इनके मानदेय में केंद्र द्वारा दिये जाने वाले अंशदान को दोगुना किया जाए। सोनिया गांधी ने शून्यकाल में यह मुद्दा उठाते हुए कहा कि कई महत्वपूर्ण सरकारी कार्यक्रमों के क्रियान्वयन में लगीं आशा कार्यकर्ता, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायक तथा राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत काम करने वाले समुदाय संसाधन कार्यकर्ता काम के बोझ के अत्यंत दबाव में हैं, जबकि वे सार्वजनिक सेवा आपूर्ति में बड़ा योगदान दे रही हैं।

लोकसभा ने ‘विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक’ को संयुक्त समिति के पास भेजने को मंजूरी दी
लोकसभा ने विश्वविद्यालयों और अन्य उच्च शिक्षण संस्थानों को स्वतंत्र स्व-शासन वाले संस्थान बनाने के उद्देश्य से लाए गए ‘विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक, 2025’ को मंगलवार को संसद की संयुक्त समिति के पास भेजने को मंजूरी दी। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने विधेयक को संयुक्त समिति के पास भेजे जाने का प्रस्ताव रखा, जिसे सदन ने ध्वनिमत से स्वीकृति प्रदान की। प्रधान ने सोमवार को यह विधेयक लोकसभा में पेश किया था, जिसका कुछ विपक्षी सदस्यों ने विरोध किया था। कांग्रेस के मनीष तिवारी ने विधेयक पेश किये जाने का विरोध करते हुए कहा था कि यह शिक्षण संस्थानों की स्वायत्तता का उल्लंघन करता है और उनकी स्वतंत्रता का क्षरण करता है। उन्होंने कहा कि इससे, राज्य कानून के तहत स्थापित शिक्षण संस्थानों की स्वायत्तता प्रभावित होगी। वहीं, आरएसपी के एन. के. प्रेमचंद्रन ने विधेयक के हिंदी नाम को लेकर विरोध दर्ज कराते हुए कहा था कि दक्षिण भारत के सांसदों को इसका उच्चारण करने में दिक्कत हो रही है। उन्होंने कहा कि इसका नाम अंग्रेजी में होना चाहिए।

लोकसभा ने ‘विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक’ को संयुक्त समिति के पास भेजने को मंजूरी दी

संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू ने सोमवार को सदन में कहा कि यह विधेयक पेश किया जाना संसद की विधायी क्षमता के अधीन है और इसके गुण-दोषों पर विधेयक पर चर्चा के दौरान विचार किया जाएगा। उन्होंने विपक्षी सदस्यों द्वारा विधेयक को लेकर जताई गई चिंताओं का हवाला देते हुए यह भी कहा, ‘‘कार्य मंत्रणा समिति की बैठक के दौरान कई माननीय सदस्यों ने अनुरोध किया कि यह एक व्यापक विधेयक है और हमें इस पर और चर्चा करने की जरूरत है। इसलिए, सरकार इसे संसद की संयुक्त समिति को भेजने का प्रस्ताव करती है।’’ केंद्रीय मंत्रिमंडल ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) और एआईसीटीई जैसे निकायों की जगह उच्च शिक्षा नियामक निकाय स्थापित करने वाले इस विधेयक को शुक्रवार को मंजूरी दी थी। सरकार की ओर से यह विधेयक भारत के संविधान की सातवीं अनुसूची में संघ सूची की प्रविष्टि 66 के प्रावधानों के तहत पेश किया गया। इसमें ‘उच्च शिक्षा या अनुसंधान संस्थानों और वैज्ञानिक एवं तकनीकी संस्थानों में समन्वय और मानकों के निर्धारण’ का प्रावधान है।

बोले शिवराज- हमारे दिलों में बसते हैं महात्मा गांधी

विपक्ष के विरोध के बीच ‘जी राम जी विधेयक’ लोकसभा में पेश, बोले शिवराज- हमारे दिलों में बसते हैं महात्मा गांधी
सरकार ने विपक्ष के तीखे विरोध के बीच मंगलवार को लोकसभा में ‘विकसित भारत-जी राम जी विधेयक, 2025’ पेश किया, जो महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के स्थान पर लाया गया है। ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने विपक्षी सदस्यों के हंगामे के बीच यह विधेयक पेश करने का प्रस्ताव रखा, जिसे सदन ने ध्वनिमत से मंजूरी दी। विपक्षी सदस्यों ने विधेयक का विरोध करते हुए कहा कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का नाम हटाया जाना उनका अपमान है। उन्होंने यह भी कहा कि विधेयक को वापस लिया जाए या फिर संसदीय समिति के पास भेजा जाए। मंत्री चौहान ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा, ‘‘महात्मा गांधी हमारे दिलों में बसते हैं।’’ उनका कहना था कि मोदी सरकार महात्मा गांधी और पंडित दीनदयाल उपाध्याय के विचारों पर आधारित कई योजनाएं चला रही है। उन्होंने सवाल किया, ‘‘कांग्रेस की सरकार ने भी जवाहर रोजगार योजना का नाम बदला था तो क्या यह पंडित जवाहरलाल नेहरू का अपमान था?’’ मंत्री चौहान ने कहा कि सरकार ने मनरेगा पर 8.53 लाख करोड़ रुपये खर्च किए हैं। उन्होंने बताया, ‘‘हम इस विधेयक में 125 दिन के रोजगार की गारंटी दे रहे हैं। यह कोई कोरी गारंटी नहीं है, बल्कि 1.51 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि का प्रावधान किया गया है।’’

असम गण परिषद ने जुबिन गर्ग को 'भारत रत्न’ दिये जाने की राज्यसभा में उठाई मांग

असम गण परिषद ने जुबिन गर्ग को ‘भारत रत्न’ दिये जाने की राज्यसभा में उठाई मांग
राज्यसभा में मंगलवार को असम गण परिषद (अगप) के एक सदस्य ने दिवंगत लोकप्रिय गायक जुबिन गर्ग को मरणोपरांत ‘भारत रत्न’ से सम्मानित किये जाने की मांग की। अगप के वीरेन्द्र प्रसाद वैश्य ने शून्यकाल में यह मांग करते हुए कहा कि जुबिन एक फिल्म निर्माता, निर्देशक, अभिनेता, गायक होने के साथ-साथ समाज सुधारक एवं पर्यावरण प्रेमी भी थे। उन्होंने कहा कि वह अपनी पार्टी एवं पार्टी अध्यक्ष अतुल वोरा की ओर से जुबिन को ‘भारत रत्न’ सम्मान देने की मांग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि 19 सितंबर 2025 को राष्ट्र ने इस होनहार प्रतिभा को खो दिया था। उन्होंने कहा कि जुबिन केवल गायक नहीं, बल्कि प्रत्येक असमिया व्यक्ति के लिए आशा की किरण थे। वैश्य ने कहा कि भले ही वह आज हमारे बीच नहीं हैं, किंतु उनकी रचनाएं एवं गीत सदा हमारे साथ रहेंगे। उन्होंने कहा कि जुबिन ने हमेशा बाढ़ पीड़ितों, गरीब छात्रों एवं मजदूरों की मदद की थी। उन्होंने कहा कि इन सभी विशेषताओं के कारण जुबिन ने पूरे देश के लोगों का दिल जीत लिया था।

राज्यसभा में विपक्ष ने लगाये वोट चोरी के आरोप, सत्ता पक्ष ने कहा- कांग्रेस के समय हुई थी शुरुआत
विपक्षी दलों ने राज्यसभा में मंगलवार को सत्ता पक्ष पर चुनावों में वोट चोरी का आरोप लगाया जिस पर सत्ता पक्ष ने कहा कि इसकी शुरुआत कांग्रेस ने पहले आम चुनाव के समय ही की थी। सदन में चुनाव सुधारों पर पिछली बैठक में अधूरी रही चर्चा को आगे बढ़ाते हुए बहुजन समाज पार्टी के रामजी ने कहा कि किसी उम्मीदवार का आपराधिक इतिहास अखबारों में प्रकाशित करने की जिम्मेदारी उम्मीदवार और राजनीतिक दल को दी गयी है। कई बार उम्मीदवार पार्टी से भी यह जानकारी छिपाते हैं। इसलिए, राजनीतिक दलों को इस जिम्मेदारी से मुक्त किया जाना चाहिये। झारखंड से भारतीय जनता पार्टी के प्रदीप कुमार वर्मा ने कहा कि लंबे समय से मतदाता सूची के पुनरीक्षण का काम नहीं हुआ था और यह जरूरी हो गया था। इससे बोगस मतदान रुकेगा।

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