Bank Fraud Case

आईडीएफसी फर्स्ट और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक धोखाधड़ी मामले में सीबीआई की बड़ी कार्रवाई, कई शहरों में छापे

नई दिल्ली राष्ट्रीय व्यापार

एजेंसी, नई दिल्ली। Bank Fraud Case : देश की अग्रणी जांच एजेंसी केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो यानी सीबीआई ने सरकारी खजाने को चूना लगाने वाले एक बहुत बड़े वित्तीय घोटाले का पर्दाफाश किया है। हरियाणा सरकार और केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ प्रशासन के विभिन्न सरकारी विभागों के पैसों में कथित रूप से छह सौ साठ करोड़ रुपये से अधिक की हेराफेरी और धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। इस महाघोटाले के सिलसिले में जांच एजेंसी ने दिल्ली, चंडीगढ़ और पंचकूला सहित देश के कई हिस्सों में बड़े पैमाने पर छापेमारी की कार्रवाई की है। इस कार्रवाई के बाद से ही सरकारी गलियारों और बैंकिंग क्षेत्र में हड़कंप मच गया है।

कई ठिकानों पर केंद्रीय जांच एजेंसी का छापा

सीबीआई के प्रवक्ता की तरफ से जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक में जमा सरकारी धनराशियों के दुरुपयोग की जांच लंबे समय से चल रही थी। इसी जांच को आगे बढ़ाते हुए केंद्रीय जांच एजेंसी ने देश की राजधानी दिल्ली और उसके आस-पास के क्षेत्रों यानी एनसीआर सहित छह अलग-अलग महत्वपूर्ण स्थानों पर सघन तलाशी अभियान चलाया। इस कार्रवाई के दौरान हरियाणा कैडर के कुछ बेहद वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों और नोएडा में स्थित एक निजी सलाहकार कंपनी विपम कंसल्टेंसी प्राइवेट लिमिटेड और उसके मुख्य संचालक के ठिकानों को मुख्य रूप से निशाना बनाया गया।

हरियाणा और चंडीगढ़ के दस प्रमुख विभाग प्रभावित

इस महाघोटाले की जद में आने वाले सरकारी विभागों की संख्या काफी बड़ी है। केंद्रीय जांच एजेंसी के अधिकारियों के मुताबिक इस पूरी धोखाधड़ी और पैसों की हेराफेरी से हरियाणा राज्य सरकार के आठ प्रमुख विभाग और चंडीगढ़ प्रशासन के दो बड़े विभाग सीधे तौर पर प्रभावित हुए हैं। इनमें चंडीगढ़ नगर निगम और चंडीगढ़ नवीकरणीय ऊर्जा एवं विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी संवर्धन सोसायटी जैसी महत्वपूर्ण संस्थाएं शामिल हैं, जिनके करोड़ों रुपये के बजट का गलत इस्तेमाल किया गया है।

सरकारी कर्मचारियों और बैंक अफसरों का नापाक गठजोड़

सीबीआई की शुरुआती जांच में यह चौंकाने वाली बात सामने आई है कि बैंकों के अधिकारियों और विभिन्न विभागों के सरकारी बाबुओं ने आपस में मिलकर इस पूरी साजिश को अंजाम दिया था। भ्रष्ट सरकारी कर्मचारियों ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए बैंक अधिकारियों की मिलीभगत से कई फर्जी और गुप्त खाते खुलवाए थे। इन खातों में सरकारी बजट की बड़ी राशि ट्रांसफर की गई और बाद में उस धन का उपयोग नियमों के खिलाफ जाकर दूसरे गैर-कानूनी कामों में किया गया। इस पूरी हेराफेरी को छुपाने के लिए बैंक के नियमों को भी ताक पर रख दिया गया था।

रिश्वत के बदले दबाई गईं अनियमितताओं की फाइलें

जांच एजेंसी ने भ्रष्ट लोक सेवकों पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि इस अवैध वित्तीय लेन-देन को सुचारू रूप से चलाने और बैंक खातों में चल रही गड़बड़ियों के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई न करने के बदले में इन सरकारी बाबुओं ने बैंक अधिकारियों से भारी मात्रा में अनुचित लाभ यानी रिश्वत और महंगे उपहार लिए थे। इसके साथ ही यह भी पता चला है कि घोटाले की एक बहुत बड़ी रकम विपम कंसल्टेंसी नामक कंपनी के बैंक खाते में जमा कराई गई थी, जिसे बाद में कंपनी के मुख्य निदेशक ने अपने व्यक्तिगत बैंक खाते में ट्रांसफर कर लिया था।

छापेमारी के दौरान मिले कई अहम सबूत और दस्तावेज

विभिन्न शहरों में की गई इस छापेमारी के दौरान केंद्रीय जांच एजेंसी के हाथ कई महत्वपूर्ण सबूत लगे हैं। तलाशी के दौरान अधिकारियों ने कई आपत्तिजनक कागजात, कंप्यूटर, हार्ड डिस्क और मोबाइल जैसे डिजिटल उपकरण और बड़ी जमीनों से जुड़े संपत्ति के दस्तावेज बरामद कर जब्त कर लिए हैं। अधिकारियों का मानना है कि इन जब्त किए गए डिजिटल उपकरणों की फोरेंसिक जांच से इस घोटाले से जुड़े कई अन्य सफेदपोश अपराधियों के नाम भी सामने आ सकते हैं। यह पूरा मामला पहले हरियाणा सतर्कता ब्यूरो और चंडीगढ़ पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा द्वारा दर्ज किए गए मुकदमों पर आधारित है, जिसे बाद में इसकी गंभीरता को देखते हुए सीबीआई को सौंप दिया गया था।

पंचकूला की विशेष अदालत में पहली चार्जशीट दाखिल

केंद्रीय जांच एजेंसी इस पूरे मामले में कानूनी कार्रवाई को तेजी से आगे बढ़ा रही है। इसी कड़ी में सीबीआई ने हरियाणा के पंचकूला में स्थित एक विशेष अदालत के समक्ष अपना पहला आधिकारिक आरोप पत्र यानी चार्जशीट भी दाखिल कर दी है। इस आरोप पत्र में मुख्य रूप से हरियाणा पावर जनरेशन कॉर्पोरेशन लिमिटेड और हरियाणा स्कूल शिक्षा परियोजना परिषद से जुड़े दोषी लोक सेवकों की भूमिका का पूरा ब्यौरा दिया गया है। इसके अलावा चार्जशीट में इस बात का भी पूरा विवरण है कि कैसे आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक में रखे सरकारी पैसों को नियम विरुद्ध तरीके से निकाला और घुमाया गया। जांच एजेंसी ने साफ किया है कि मामले की पड़ताल अभी पूरी तरह बंद नहीं हुई है और आने वाले दिनों में कुछ अन्य बड़े नामों के खिलाफ पूरक आरोप पत्र दाखिल किए जाएंगे।

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