बेहतर बीजेपी को बेहतरीन बनाना ही हेमंत खंडेलवाल की सबसे बड़ी चुनौती

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भारतीय जनता पार्टी ने एक बार फिर मध्य प्रदेश की जनता को ही नहीं बल्कि अपने अधिकांश पदाधिकारियों और कार्य कार्यकर्ताओं को चौंका दिया है। अधिकांश लोगों का अनुमान था कि भाजपा का नया प्रदेश अध्यक्ष कोई जाना माना नेता या फिर पूर्व मंत्री ही होगा। लेकिन जिस प्रकार इस पार्टी ने मुख्यमंत्री का चुनाव करते समय विधायक दल की बैठक में डॉक्टर मोहन यादव का नाम घोषित करके सबको बुरी तरह चौंका दिया था, उसी प्रकार का दृश्य एक बार फिर पार्टी प्रदेश अध्यक्ष के मामले में भी देखने को मिला। जब से संकट में चुनाव होने की चर्चा शुरू हुई तब विगत 6 महीना से अनुमान यही लगाए जा रहे थे कि भाजपा का आगामी प्रदेश अध्यक्ष नरोत्तम मिश्रा, संपतिया उसके, केंद्रीय राज्य मंत्री दुर्गा दास उईके, अर्चना चिटनिस, रंजना बघेल, फगन सिंह कुलस्ते, गजेंद्र सिंह पटेल, लाल सिंह आर्य, राजेंद्र शुक्ल, अरविंद सिंह भदोरिया आदि में से ही कोई बनेगा। इनमें से पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा तो इतनी तगड़ी लविंग भोपाल से दिल्ली तक कर चुके थे कि अनेक बार यह लगने लगा था, मानो उनके नाम पर सहमति बन चुकी है। अब बस चुनाव प्रक्रिया की औपचारिकता बाकी है। आश्चर्यजनक तरीके से इनमें से एक नाम संपत्तियां उईके का सांगठनिक चुनाव से ठीक पहले रिश्वत संबंधी विवादों की भेंट चढ़ गया। जबकि दुर्गादास उईके अंतिम समय तक बढ़त में बने रहे। किंतु विगत एक सप्ताह से हेमंत खंडेलवाल का नाम तेजी से ऊपर आया और बहुत जल्दी यह आश्वासन प्राप्त कर गया कि हो ना हो अंतिम मोहर इन्हीं के नाम पर लगने वाली है। इसके दो कारण रहे पहली बात तो यह कि हेमंत खंडेलवाल भाजपा के संस्थापक सदस्य रहे अपने पिता श्री विजय खंडेलवाल की राजनीतिक विरासत संभाल रहे हैं। दूसरी बात यह की हेमंत खुद भी सांसद विधायक रह चुके हैं और विभिन्न सांगठनिक पदों पर रहकर दायित्वों का निर्वहन करते रहे हैं। इन सभी योग्यताओं से हटकर हेमंत खंडेलवाल की सर्वोच्च योग्यता यह रही कि वे मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव से बेहतर तालमेल रखते हैं और उन्हें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का बढ़-चढ़कर वरद हस्त मिला हुआ है। उनकी उपरोक्त योग्यताओं ने अंततः सफलता पाई और हेमंत खंडेलवाल मध्य प्रदेश भारतीय जनता पार्टी के निर्वाचित अध्यक्ष बन गए। सरसरी तौर पर देखा जाए तो आम लोग यह मान सकते हैं कि भारतीय जनता पार्टी का प्रदेश अध्यक्ष बनना श्री हेमंत खंडेलवाल के लिए सेलिब्रेशन का बेहतर मौका है। जबकि सही मायने में ऐसा बिल्कुल नहीं है। क्योंकि भारतीय जनता पार्टी संगठन और सरकार की दृष्टि से मध्य प्रदेश में इन दोनों इतनी मजबूत है जितनी शायद ही कभी रही हो। जाहिर है किसी भी राजनीतिक दल की सफलता और उसकी मजबूती का पैमाना चुनाव परिणाम ही होते हैं। इस मामले में भाजपा संसदीय स्तर पर कांग्रेस का सूपड़ा साफ कर चुकी है। जबकि विधानसभा में उसे दो तिहाई से भी ज्यादा बहुमत मिला हुआ है। यानि लोकसभा और विधानसभा में भाजपा मजबूत है तो इसका मतलब यह हुआ कि जमीनी स्तर पर यह संगठन पूरी ताकत के साथ काम कर रहा है। यदि कहीं पर मेहनत करने की गुंजाइश शेष है तो शेष बचीं विधानसभा की वे 64 सीटें हैं, जहां पर भाजपा ने चुनाव में हार का सामना किया था। लिखने का आशय यह कि किसी संगठन को शुरुआती स्तर पर बेहतर बनाना बहुत आसान काम ना सही, लेकिन बहुत ज्यादा कठिन काम भी नहीं होता है। लेकिन जो संगठन पहले से ही बेहतर हो तो फिर उसे बेहतरीन बनाने के अलावा कोई दूसरा विकल्प शेष नहीं रह जाता। बस यही वह मुश्किल काम है जो हर हालत में भाजपा के नवनिर्वाचित प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल को करना ही है। मतलब साफ है, शेष बची 64 विधानसभा सीटों पर उन्हें अपनी पूरी ताकत झोंकनी है। सांगठनिक कौशल का बेहतर प्रदर्शन करना है। इसी के साथ-साथ यह सावधानी भी बनाए रखनी है कि जब अगले विधानसभा चुनाव और उसके तुरंत बाद लोकसभा चुनाव आएं तब विधानसभा चुनाव में सीटों के लिहाज से भाजपा को बढ़त तो मिले ही, लोकसभा चुनाव में उसका प्रदर्शन शत प्रतिशत बना रहे। अभी तक निवृत्तमान भाजपा प्रदेश अध्यक्ष विष्णु दत्त शर्मा पार्टी के लिए शुभंकर साबित होते रहे हैं। अब नवनिर्वाचित भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के नेतृत्व में उनकी पार्टी और अधिक सुदृढ़ता के साथ आगे बढ़ेगी, यह कामना की जानी चाहिए। क्योंकि एक तो उन्हें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का वरद हस्त मिला हुआ है। वहीं दूसरी ओर मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव के साथ उनका पहले से ही बेहतर तालमेल जग जाहिर है। यह अनुकूल परिस्थितियां और हेमंत खंडेलवाल का स्वयं का सांगठनिक, चुनावी अनुभव भाजपा को प्रगति के नए पद पर ले जाएगा, ऐसी शुभकामनाएं।

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