बाल विवाह : कानूनी अपराध ही नहीं, सामाजिक कलंक भी- डॉ मोहन यादव

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अक्षय तृतीया के अवसर पर मध्य प्रदेश समेत देशभर में सामूहिक विवाह सम्मेलन संपन्न होने जा रहे हैं। व्यक्तिगत स्तर पर भी हजारों लोग वैवाहिक बंधन में बंधने जा रहे हैं। यह वो त्यौहार है जब विवाह के लिए किसी भी प्रकार के मुहूर्त की आवश्यकता नहीं पड़ती। यही वजह है कि अक्षय तृतीया के दिन भारी पैमाने पर विवाह उत्सव संपन्न होते हैं। ऐसे में जानकारी का अभाव होने के कारण कुछ लोग अपने पुत्र और पुत्री के विवाह कम उम्र में कर देते हैं‌। इससे अनेक लोगों की जिंदगियां प्रभावित होती हैं । इसीलिए सरकार ने बाल विवाह को अपराध माना है। इस अवसर पर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव ने आम जनता के नाम संदेश दिया है कि किसी भी बुराई को केवल कानून बनाकर रोका नहीं जा सकता । किंतु जन जागरण और जन जागृति होने पर बड़े से बड़े अपराध को सामाजिक पहल किए जाने पर सहज ही रोका जा सकता है। इसलिए महिला बाल विकास विभाग, पुलिस विभाग, जिला प्रशासन और स्थानीय जनप्रतिनिधि अपने आसपास टोह लेते रहें । यदि कहीं से सूचना मिलती है कि गांव अथवा शहर में कहीं भी बाल विवाह संपन्न होने जा रहा है तो उसे रोकें । वर और बधू के अभिभावकों को प्रेम पूर्वक समझाइये । उन्हें बताएं कि बाल विवाह करने से बालक और बालिका, दोनों के शारीरिक मानसिक विकास पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। खासकर बालिका को अनेक शारीरिक और मानसिक यातनाओं का सामना करना पड़ सकता है। मुख्यमंत्री ने आवाहन किया है कि कोई भी माता-पिता अपने पुत्र अथवा पुत्री का विवाह उनके बालिग होने से पहले ना करें। क्योंकि यह केवल कानूनी अपराध ही नहीं सामाजिक कलंक भी है। उल्लेखनीय है कि भारत देश में सदियों से विवाह उत्सव बालिग होने पर ही संपन्न होते आए हैं। इसके प्रमाण यह हैं कि भारत में स्वयंवर होने के अनेकों प्रसंग ग्रंथों में पढ़ने को मिलते हैं। लिखित स्वरूप में जानकारी दर्ज है कि स्वयंवरों के माध्यम से विवाह योग्य युवतियां अपना वर चुनने के लिए स्वतंत्र होती थीं । वह अपनी शर्तों के अनुसार जिस भी व्यक्ति को अपना वर चुनतीं, समाज उसे स्वीकार करता था । लेकिन बाद में देश पर अनेक आक्रमण हुए। ढेर सारे विदेशी आक्रांताओं ने यहां पर शासन किया और अपने रीति रिवाज भारतीय समाज पर लाद दिए। फल स्वरुप यहां अनेक बुराइयों के साथ-साथ बाल विवाह नामक को बुरी प्रथा भी शुरू हो गई। बाद में यह सामाजिक व्यवहार में इतनी रच बस गई कि भारी तादाद में बाल विवाह होने लगे। एक समय ऐसा भी आया जब हमारे देश में किशोरावस्था से पहले ही विवाह हो जाया करते थे। यहां तक कि छोटे-छोटे बच्चों को गोद में लेकर उनका पाणि ग्रहण कर दिया जाता था। जिन्हें बाद में कानून के सहारे रोकने के प्रयास हुए । लेकिन इन पर पूरी तरह विराम नहीं लग पाया है। यह बात भी सही है कि पूर्व की अपेक्षा अब बाल विवाह नाम मात्र के ही हो पाते हैं । वह भी चोरी छुपे संपन्न होते हैं। जानकारी मिलने पर सामाजिक, राजनीतिक नेतृत्व इनमें हस्तक्षेप करते हैं और शासन प्रशासन इन्हें टालने में सफल हो जाते हैं। इसके बावजूद भी कुछ ग्रामीण क्षेत्र ऐसे हैं जहां पर आज भी जन जागृति स्थापित नहीं हो पाई है। इसलिए कुछ लोग आज भी बाल विवाह को अपरिहार्य मानने को अभिशप्त हैं। इन्हें लगता है कि बाल विवाह ईश्वर द्वारा प्रदत्त व्यवस्था है । यही वजह है कि जब महिला बाल विकास विभाग, पुलिस विभाग, स्थानीय प्रशासन मिलकर इन्हें रोकने का प्रयास करते हैं तब कभी-कभी भारी तनाव उत्पन्न हो जाता है । ऐसे में ग्रामीणों द्वारा एकत्रित होकर कानून व्यवस्था को चुनौती दिए जाने के प्रकरण भी अनचाहे घटित हो जाते हैं ।हालांकि इनकी संख्या नाम मात्र की ही होती है। यदि विज्ञान और चिकित्सा क्षेत्र के विशेषज्ञों की बात करें तो उन्होंने प्रमाणित किया है कि बाल विवाह से वधु के समय से पहले गर्भवती होने के अवसर उत्पन्न हो जाते हैं ऐसी अवस्था में गर्भावस्था के दौरान या फिर प्रस्तुति के दौरान प्रसूता की जान खतरे में पड़ जाती है और कभी-कभी उसकी मृत्यु भी हो जाती है अनेकों बार ऐसा भी देखने सुनने को मिला कि इस अवस्था में गर्भावस्था शिशु की भी जान जाती रही इसका कारण यह है कि कम उम्र में लड़कियों का शरीर यौन संबंध स्थापित करने और गर्भधारण करने के योग्य नहीं हो पाता । इसलिए अधिकांश मामलों में उनकी जान खतरे में पड़ जाती है। लिहाजा समाज के नेतृत्वकर्ताओं का दायित्व बन जाता है कि वह अपने आसपास एक जन जागरण खड़ा करें और वास्तविकता से लोगों को अवगत कराएं, उन्हें बताएं कि बाल विवाह निरोध कानून उनकी और उनकी संतान कीभलाई के लिए ही बनाए गए हैं। उन्हें सामाजिक स्तर पर एकता के साथ महिला बाल विकास विभाग, पुलिस विभाग, स्थानीय प्रशासन के साथ-साथ सरकार का खुले मन से सहयोग करना चाहिए। इससे केवल कानून का पालन ही नहीं होगा, बल्कि पर वधू के भविष्य से आशंकाओं के बादल छंट जाएंगे। उनका वैवाहिक जीवन उज्जवल एवं सुख संपदा से परिपूर्ण बनेगा।

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