अग्रसर मोहन सरकार

नारी सशक्तिकरण और जन कल्याण के मार्ग पर अग्रसर मोहन सरकार

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नारी सशक्तिकरण और जन कल्याण के मार्ग पर अग्रसर मोहन सरकार

मध्य प्रदेश की विकास यात्रा में आज का दिन एक स्वर्णिम अध्याय के रूप में दर्ज हो गया है, जहाँ मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने ग्वालियर की ऐतिहासिक धरा से प्रदेश की नारी शक्ति के आर्थिक और सामाजिक सशक्तिकरण की नई इबारत लिखी है। मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना के माध्यम से प्रदेश की सवा करोड़ से अधिक महिलाओं के खातों में 1836 करोड़ रुपये की 34वीं किस्त का अंतरण केवल एक वित्तीय सहायता मात्र नहीं है, बल्कि यह करोड़ों परिवारों के आत्मविश्वास और स्वावलंबन को दी गई एक नई संजीवनी है। शबरी माता के पावन मंदिर परिसर से शुरू हुआ यह सिलसिला दर्शाता है कि सरकार की प्राथमिकता में समाज का वह अंतिम छोर खड़ा व्यक्ति और वह मातृशक्ति है, जो घर की धुरी होने के साथ-साथ अब प्रदेश की अर्थव्यवस्था का भी मजबूत आधार बन रही है। यह महज संयोग नहीं है कि जून 2023 से शुरू हुई इस यात्रा ने फरवरी 2026 तक आते-आते 33 सफल पड़ाव पार कर लिए हैं और अब 34वीं किस्त के रूप में राज्य सरकार ने 54,140 करोड़ रुपये से अधिक की विशाल राशि सीधे बहनों के खातों में पहुँचाकर सुशासन और पारदर्शिता का एक अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया है।
​मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में इस योजना ने न केवल अपनी निरंतरता बनाए रखी है, बल्कि इसमें समय के साथ संवेदनशीलता और सामर्थ्य की वृद्धि भी देखी गई है। नवंबर से मासिक सहायता राशि में 250 रुपये की वृद्धि कर इसे 1500 रुपये करना इस बात का प्रमाण है कि सरकार अपनी बहनों की बढ़ती जरूरतों और उनके सम्मान के प्रति पूरी तरह सजग है। जब एक महिला के हाथ में सीधे राशि पहुँचती है, तो वह केवल उसकी व्यक्तिगत आय नहीं होती, बल्कि वह पूरे परिवार के पोषण, शिक्षा और स्वास्थ्य पर होने वाला एक निवेश बन जाती है। प्रदेश सरकार का यह दृष्टिकोण अत्यंत सराहनीय है कि वह महिलाओं को केवल लाभार्थी के रूप में नहीं देख रही, बल्कि उन्हें कौशल विकास, रोजगार और स्वरोजगार के अवसरों से जोड़कर आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर कर रही है। आज की यह राशि हस्तांतरण प्रक्रिया ‘सिंगल क्लिक’ के माध्यम से संपन्न हुई, जो डिजिटल इंडिया के संकल्प को धरातल पर उतारने और बिचौलियों की प्रथा को समाप्त कर सीधे हितग्राही तक लाभ पहुँचाने की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
​ग्वालियर का यह कार्यक्रम केवल वित्तीय सहायता तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह विकास के सर्वांगीण विजन का एक उत्सव बनकर उभरा। मुख्यमंत्री द्वारा लगभग 122 करोड़ रुपये की लागत वाले 54 विकास कार्यों का लोकार्पण और भूमि-पूजन इस बात का संकेत है कि प्रदेश में सामाजिक सुरक्षा और बुनियादी ढांचे का विकास साथ-साथ चल रहा है। करीब 62 करोड़ रुपये के 19 कार्यों का लोकार्पण जनता को समर्पित किया जाना और 60 करोड़ रुपये के 35 नए कार्यों की नींव रखना, भविष्य के आधुनिक मध्य प्रदेश की रूपरेखा तैयार करता है। विशेष रूप से शिक्षा के क्षेत्र में 40 करोड़ रुपये की लागत से बने सांदीपनि शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय का भव्य भवन विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य का केंद्र बनेगा। बुनियादी ढांचे को मजबूती देने वाले सांक नदी पर बने उच्च स्तरीय पुल, नई सड़कों और स्वास्थ्य केंद्रों का लोकार्पण ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच की दूरी को कम करने का काम करेगा।
​सरकार की दूरदर्शिता का परिचय उन परियोजनाओं में भी मिलता है जो समाज के वंचित और श्रमिक वर्ग के सम्मान से जुड़ी हैं। आईएसबीटी के समीप बनने वाला 100 सीटर श्रमिक विश्रामगृह उन मजदूरों को गरिमापूर्ण आश्रय प्रदान करेगा जो शहर के निर्माण में अपना पसीना बहाते हैं। वहीं, अंबेडकर धाम के द्वितीय चरण में बाबा साहब के जीवन पर आधारित संग्रहालय का निर्माण हमारी वैचारिक और सांस्कृतिक विरासत को सहेजने की दिशा में एक बड़ा कदम है। आयुर्वेद और स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार हेतु किए गए नवीन प्रावधान यह सुनिश्चित करते हैं कि मध्य प्रदेश अपनी पारंपरिक चिकित्सा पद्धति और आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं के बीच एक बेहतरीन संतुलन बना रहा है। भितरवार में शॉपिंग कॉम्प्लेक्स जैसे निर्माण स्थानीय व्यापार और आर्थिक गतिविधियों को नई गति देंगे, जिससे स्थानीय स्तर पर ही रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।
​आज का यह पूरा घटनाक्रम इस बात की पुष्टि करता है कि डॉ. मोहन यादव की सरकार ‘अंत्योदय’ के मंत्र को आत्मसात कर आगे बढ़ रही है। लाड़ली बहना योजना ने प्रदेश में एक मौन सामाजिक क्रांति का सूत्रपात किया है, जहाँ महिलाएं अब निर्णय लेने की प्रक्रिया में खुद को सक्षम महसूस कर रही हैं। यह योजना महिलाओं के भीतर छिपी उद्यमिता को बाहर लाने का एक जरिया बनी है। जब एक बहन को पता होता है कि हर महीने की एक निश्चित तारीख को उसके खाते में सम्मान की राशि आएगी, तो वह अपने छोटे-मोटे खर्चों के लिए किसी पर निर्भर नहीं रहती। यह आत्मनिर्भरता ही समाज में उनकी स्थिति को मजबूत बना रही है। सरकार का संकल्प है कि इन बहनों को केवल सहायता तक सीमित न रखकर उन्हें बड़े बाजारों और उद्यमिता के साथ जोड़ा जाए, जिससे वे अपने परिवार की आर्थिक प्रगति की मुख्य वाहक बन सकें।
​विकास कार्यों की यह सौगात और करोड़ों रुपयों का यह सीधा अंतरण मध्य प्रदेश की विकास दर को और अधिक ऊर्जा प्रदान करेगा। ग्वालियर-चंबल अंचल के विकास को मिली यह नई रफ्तार पूरे प्रदेश के लिए एक सकारात्मक संदेश है। आज जब मध्य प्रदेश निवेश और तकनीक के क्षेत्र में नए आयाम छू रहा है, तब इस प्रकार के समावेशी कार्यक्रम सुनिश्चित करते हैं कि विकास का लाभ समाज के हर वर्ग तक समान रूप से पहुँचे। मुख्यमंत्री का यह विजन कि मध्य प्रदेश को देश का अग्रणी राज्य बनाना है, लाड़ली बहनों के आशीर्वाद और इन बुनियादी परियोजनाओं के सफल क्रियान्वयन से निश्चित ही पूर्ण होगा। यह दिन मध्य प्रदेश के इतिहास में महिला सशक्तिकरण और जनकल्याणकारी राजनीति के एक उत्कृष्ट उदाहरण के रूप में सदैव याद रखा जाएगा, जहाँ सरकार और जनता के बीच का भरोसा और अधिक प्रगाढ़ हुआ है।

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