
कार्य शैली कैसी भी हो, कितने भी बदलाव करने पड़ जाएं या फिर नई नीतियां बनानी पड़ें, अथवा कार्य करने के ढंग को ही बदल दिया जाए, बस किसी भी प्रकार जनता का भला होना चाहिए। यही टेक है मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार की। लेख के प्रारंभ में हम जो कुछ उल्लेख कर रहे हैं, वह ऐसे ही नहीं है। प्रतिदिन जो देखने सुनने में आता है उससे यही प्रतिपादित होता है कि प्रदेश की भाजपा सरकार जनहित के मामले में चारों ओर एक समान कदम बढ़ा रही है और विकास के नए आयाम स्थापित कर रही है। अभी हाल ही में जब कैबिनेट की बैठक हुई तब एक बार फिर इस सरकार ने यह साबित किया कि उसे प्रांत में घटित हर घटना क्रम की खबर है और उस बाबत निगरानी बरकरार है। अच्छे परिणाम सामने आएं, इसके लिए सरकार लगातार प्रयासरत है। उदाहरण के लिए – जब कैबिनेट में सबसे पहले कर्मचारियों की बात आई तो मुख्यमंत्री ने अपने मंत्रिमंडल के बीच यह स्पष्ट कर दिया की मध्य प्रदेश में जो 7 लाख कर्मचारी विभिन्न विभागों के माध्यम से आम आदमी की सेवा कर रहे हैं, उनके भक्तों में 10% तक बढ़ोतरी होने जा रही है । इससे हर साल सरकारी खजाने पर 1500 करोड़ रूपए का बोझ बढ़ने वाला है। लेकिन इसकी फिक्र ना करते हुए सरकार ने व्यवस्था बनाई है कि आय के साधन बढ़ाएंगे, लेकिन कर्मचारियों का अहित नहीं होना चाहिए। दावा यहां तक किया गया कि 15 – 20 साल बाद तेरह तरह के भत्तों का सातवें वेतन मान के तहत अब निर्धारण किया जा रहा है। ऐसा भी नहीं है कि इस सरकार को केवल कर्मचारियों की ही चिंता है। इनके अलावा नए शिक्षण सत्र के चलते स्कूलों उनकी स्थितियां पर भी चिंता की गई और हालात कैसे सुधारें, अच्छे परिणाम कैसे सामने आएं, इस बाबत भी चर्चा हुई और नई व्यवस्थाओं को अंजाम दिया गया। उदाहरण के लिए, बच्चों को सरकारी स्कूलों में अधिक से अधिक प्रवेश मिलें, यह सरकार द्वारा सुनिश्चित किया जाएगा। इसी के साथ संबंधित जिलों के प्रभारी मंत्री स्कूल चलें हम अभियान की निगरानी करेंगे तथा यह सुनिश्चित करेंगे कि प्रवेश के मामलों में उनके जिले के बच्चे परिस्थितिवस छूट न जाएं । इसी के साथ पढ़ाई लिखाई में व्यवधान पैदा ना हो, इसलिए यह सुनिश्चित किया जाएगा कि अप्रैल महीने में ही बच्चों को किताबें उपलब्ध हो जाएं और यह भी प्रावधान किया गया कि जो लोग ऐसा नहीं कर पाते उनके खिलाफ कार्रवाई होगी तथा उन्हें इसका दंड भुगतना होगा। कर्मचारीयों और स्कूलों से बाहर निकलें तो सरकार ने किसानों की भलाई पर भी फोकस किया है। जैसे – अब फसल पक गई है कट कर खलिहानों में जाने लगी है और मंडियों में इसकी धमक स्पष्ट सुनी जा सकती है। अब गेहूं भारी पैमाने पर नीलामी का हिस्सा बनने लगा है सो सरकार इस बात को लेकर जागरूक है कि किसानों को सही दाम मिलना चाहिए और उनकी खरीदी में किसी भी प्रकार का अड़ंगा नहीं आना चाहिए। खरीदी केदो पर बारदाना की पर्याप्त व्यवस्था की गई है। फसल के तुरंत भुगतान को लेकर भी ब्यूह रचना तैयार है। ऐसा भी नहीं है कि यह केवल औपचारिकता भर है । जब मध्य प्रदेश के खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत विभागीय अधिकारियों से रूबरू हुए और उन्होंने उनकी बैठक ली तो बहुत स्पष्ट रूप से कहा कि अधिकारियों को गोदाम का निरीक्षण और भौतिक सत्यापन पूरी कड़ाई के साथ करना है। यदि इसमें किसी की लापरवाही सामने आती है तो वह कार्रवाई के लिए तैयार रहे और वरिष्ठ अधिकारी ऐसे लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ दंडात्मक कदम उठाया जाना सुनिश्चित करें। जैसा कि सभी को ज्ञात है जल गंगा संवर्धन अभियान सरकार ने अभी हाल ही में प्रारंभ किया है। यह केवल औपचारिकताओं का शिकार न बने, इसलिए यह भी सुनिश्चित किया गया कि इसके अंतर्गत शुरू किए जाने वाले कार्य ठीक से चल रहे हैं या नहीं, इस बारे में प्रभावी निगरानी करनी होगी। कुओं, तालाबों और नदियों पर अतिक्रमण चिह्नित करने होंगे तथा उन्हें निश्चित समय अवधि में वहां से हटाना होगा। यदि कोई लोग इसमें दोषी पाए जाते हैं तो उनके खिलाफ विभागीय कार्यवाही होना सुनिश्चित है। गर्मी के मौसम में कहीं पर भी जल संकट उत्पन्न ना हो, इस बावत पहले से ही कदम उठाने की चेतावनी स्पष्ट किया जाना बेहद सराहनीय कदम है। उच्च शिक्षा, कौशल और उससे उत्पन्न रोजगार की जहां तक बात है तो इंदौर में आईटी कांक्लेव 27 अप्रैल को किए जाने संबंधी तैयारी शुरू की जा चुकी हैं। उम्मीद की जा रही है इसके बहुत अच्छे परिणाम सामने आने वाले हैं। सरकार हो या फिर स्वायत्तशासी संस्थाएं, यह सभी आत्मनिर्भर बनें, करों की उगाही ईमानदारी से हो, जनता के सामने परेशानियां न आएं । इस तरह से यदि खजाना फलता फूलता है तो उसकी तारीफ भी की जानी। चाहिए कैबिनेट में ऐसा ही किया गया। इंदौर की नगर निगम ने निर्धारित लक्ष्य से ज्यादा टैक्स कमाया तथा उसे विकास के कार्यों में लगाया जा रहा है। इससे लगातार उस क्षेत्र की स्थिति विकसित हो रही है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि मध्य प्रदेश की अन्य नगर निगम, नगर पालिकाओं, नगर परिषदों, नगर पंचायतों और यहां तक कि जिला पंचायतों, जनपदों और ग्राम पंचायत को इंदौर के नगर निगम से सीख लेनी चाहिए और उसका अनुसरण करते हुए स्वयं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना चाहिए तथा अपने क्षेत्र के विकास में जुट जाना चाहिए। इस प्रकार से देखें तो सरकार ने पिछली कैबिनेट बैठक में भोपाल से लेकर चौपाल तक के आम आदमी की चिंता की है। इसके फलितार्थ अच्छे होंगे, इसी कामना के साथ शासन के वर्तमान कदमों की सहाना अपेक्षित है।


