मध्य प्रदेश में आधुनिकता और अतीत के बीच के संतुलन का नाम विकास

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अक्सर देखने में आता है कि विकास के नाम पर दुनिया भर में या तो पुरातन संस्कृति की बलि चढ़ा दी जाती है या फिर रूढ़िवादी परंपराओं में उलझ कर तरक्की के रास्तों को ही बंद कर दिया जाता है‌। नतीजा यह है कि दुनिया के बहुत सारे हिस्सों में जहां भौतिक विकास हो रहा है, वहां लोग अपनी सांस्कृतिक जड़ों से कटते चले जा रहे हैं। ऐसे भी कई देश हैं जहां पर लोग केवल रूढ़िवादी परंपराओं में उलझे हुए हैं। ऐसे क्षेत्रों को विकास से तो मानो किसी प्रकार का लेना-देना ही नहीं है। नतीजा यह है कि जहां पर भौतिक विकास है वहां लोक संस्कृति का अभाव है और जहां पर पुरानी परंपराओं के बंधन हैं वहां विचारों की अभिव्यक्ति का खुला आकाश नदारद है। लेकिन एकमात्र भारत देश ऐसा है जहां सरकार द्वारा संस्कृति और विकास के बीच संतुलन बनाकर रखा गया है। फल स्वरुप एक और हम विश्व की पांचवी अर्थव्यवस्था बन गए हैं और तीन प्रमुख अर्थ व्यवस्थाओं में शामिल होने की ओर अग्रसर हैं। वहीं भारतीय गौरवशाली अतीत को भी पुर्न जागृत किया जा रहा है। नागरिकों को पुरानी संस्कृति संस्कार और परंपराओं से अवगत कराया जा रहा है । लोक कलाओं को पुनर्जीवित किया जा रहा है । ताकि हम अपनी वास्तविकता को ना भूलें और विकास के पथ पर भी किसी से पीछे ना रह जाएं। इस मामले में मध्य प्रदेश की डॉक्टर मोहन यादव सरकार नए कीर्तिमान गढ़ रही है। यहां पर एक ओर उद्योग, शिक्षा, सूचना प्रौद्योगिकी आदि के क्षेत्रों में नए-नए प्रयोग किया जा रहे हैं तो वहीं गौरवशाली पुरातन इतिहास के गौरवशाली स्मृतियों को चिन्हित किया जा रहा है तथा उनकी पुनर्स्थापना की जा रही है। नतीजा यह है कि जहां एक ओर मध्य प्रदेश में औद्योगिक प्रगति हो रही है। शिक्षा के क्षेत्र में नए-नए संस्थान अस्तित्व में आ रहे हैं। विज्ञान आधारित नए-नए प्रयोगों को सरकार द्वारा प्रोत्साहित किया जा रहा है। यानि नूतन पुरातन, संस्कृति विकास के बीच संतुलन बनाकर रखा गया है। इससे एक ओर युवाओं को रोजगार मिल रहे हैं। सरकारी खजाने को राजस्व प्राप्त हो रहा है। धार्मिक आध्यात्मिक और सामाजिक क्षेत्रों में पर्यटन बढ़ रहा है। जिसके चलते उम्मीद बनती है कि मध्य प्रदेश तेजी से स्वर्णिम युग की ओर बढ़ रहा है। उदाहरण के लिए मुख्यमंत्री के उस बयान पर गौर किया जा सकता है जो उन्होंने दीनदयाल शोध संस्थान के सेमिनार में मंच से दिया । डॉक्टर मोहन यादव ने बताया कि जब कंप्यूटर का उपयोग शुरू हुआ था तब इस बात की चिंता थी कि इसके आने से लाखों लोगों की नौकरियां चली जाएंगी और आम आदमी बेरोजगार हो जाएगा। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। जब सावधानी के साथ इस यंत्र का उपयोग किया गया तो कंप्यूटर ने ढेर सारे काम आसान कर दिए। बल्कि नौकरियों के अवसर भी आश्चर्यजनक रूप से बढ़ते दिखाई दिए। ठीक इसी प्रकार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंसी के आने से भी विकास एवं रोजगार के नए रास्ते खुलने वाले हैं। इससे भी रोजगार के अवसर पैदा होंगे, काम आसान बनेंगे। लेकिन इसके लिए पहली शर्त यह है कि हमें एआई का प्रयोग पूरी सावधानी से करना होगा। क्योंकि इसके अच्छे और बुरे दोनों प्रभाव हो सकते हैं। इसी के साथ मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सम्राट विक्रमादित्य के जीवन दर्शन को राष्ट्रीय स्तर पर प्रकट करने का अभियान भी जारी बनाए रखा है। इन्हीं प्रयासों के चलते ही शासन संचालन व्यवस्था और उनकी कीर्ति पर केंद्रित महा नाट्य की प्रस्तुति दिल्ली के लाल किले पर लगातार तीन दिनों तक होने जा रही है। इस आशय की जानकारी स्वयं मुख्यमंत्री मीडिया से चर्चा के दौरान दे चुके हैं। दूसरी ओर मध्य प्रदेश के जाने के माने धार्मिक स्थल मैहर का भी तेजी से विकास किया जा रहा है। सब जानते हैं कि नव रात्रियों के दौरान मैहर वाली मां शारदा के मंदिर पर लोगों का हुजूम उमड़ पड़ता है। इसके अलावा भी 12 महीने देश और विदेश से यात्रीगण धर्म लाभ प्राप्त करने मैहर स्थित शारदा मां के मंदिर पर अपनी उपस्थिति दर्ज करते रहते हैं। एक महत्वपूर्ण कार्य योजना के अंतर्गत डॉक्टर मोहन यादव सरकार ने यहां 775 करोड रुपए का विकास का प्लान तैयार किया है। जिसके चलते एक ओर मंदिर, मंदिर का पहुंच मार्ग, आसपास के बाजार तथा मां शारदा लोक व्यवस्थित होकर भव्यता पूर्ण तरीके से जगमगाएंगे। वहीं मैहर और उसके आसपास के क्षेत्र में विकास के नए आयाम देखने को मिलेंगे। उम्मीद की जा रही है कि इससे लोगों के भीतर धार्मिक संस्कारों से जोड़ने का अवसर मिलेगा। वहीं स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। कुल मिलाकर मध्य प्रदेश के अधिकांश जिलों में संस्कृति और संस्कारों से जोड़कर किया जा रहा विकास प्रदेश ही नहीं, देश की तरक्की में उल्लेखनीय भूमिका निभाने जा रहा है।

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