ग्रामीण क्षेत्रों में चिकित्सक उपलब्ध कराने के सरकार द्वारा भागीरथी प्रयास

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ग्रामीण विकास की राह में सबसे बड़ी बाधा, वहां चिकित्सा और शिक्षा जैसी मूलभूत सुविधाओं का संतोषजनक स्तर पर नहीं होना है। यही सबसे बड़े वह दो कारण हैं जिनके चलते व्यक्ति सामर्थ्यवान होने के बावजूद ग्रामीण क्षेत्र से पलायन करता है और फिर शहरों अथवा महानगरों में जाकर नए सिरे से जिंदगी शुरू करने के लिए बाध्य रहता है। ऐसी सामाजिक मान्यता है कि यदि गांव में ही अच्छे स्कूल और अच्छे अस्पताल उपलब्ध हो जाएं तो फिर कोई गांव छोड़ने की बात क्यों करे? लेकिन ऐसा हो रहा है । क्योंकि ग्रामीण क्षेत्रों में स्कूल है तो बिल्डिंग नहीं है और यदि बिल्डिंग है तो शिक्षकों की अनुपलब्धता बनी हुई है। यही हालत चिकित्सा क्षेत्र की है। इस मामले में भी हालात अच्छे नहीं है। अधिकांश गांवों में सामुदायिक चिकित्सा केंद्र तक उपलब्ध नहीं है। कहीं कहीं है भी तो वहां पर चिकित्सकों का अभाव बना हुआ है । फल स्वरुप लोगों को छोटी बड़ी बीमारियों के लिए भी शहरों की ओर भागना पड़ता है और बड़े पैमाने पर आर्थिक शोषण का शिकार बनना पड़ता है। मध्य प्रदेश सरकार ने इस कमी को काफी गंभीरता से लिया है । सरकार चाहती है कि ग्रामीण क्षेत्रों में इस प्रकार का माहौल विकसित होना चाहिए, जिससे चिकित्सक वहां जाने से कतराएं नहीं और वहीं पर रहकर ग्रामीणों की तीमारदारी करें। अभी तक किए गए सर्वेक्षण बताते हैं कि बांड भरवाए जाने के बावजूद भी चिकित्सक सरकारी नौकरी पाने के लिए शुरुआत में ग्रामीण क्षेत्रों में नौकरी ज्वाइन तो कर लेते हैं। लेकिन जल्दी ही तिकड़म लगाकर अपना ट्रांसफर शहरों में स्थित बड़े अस्पतालों में करा लेते हैं। इनके द्वारा या तो आसपास के नगरों में प्राइवेट स्तर पर प्रैक्टिस की जाती है या फिर यह छुट्टी पर बने रहते हैं। कई मामलों में तो डॉक्टर को ग्रामीण क्षेत्र के स्वास्थ्य केंद्रों से इस्तीफा तक देते हुए देखा गया है। यह बात और है इसके लिए जटिल शासकीय प्रणाली है, जिसका सामना उपरोक्त चिकित्सकों द्वारा भली भांति ही किया जाता है। अंततः यह लोग गांव से निकलकर शहरों की ओर आ जाते हैं । इन हालातो को देखते हुए मध्य प्रदेश की डॉक्टर मोहन यादव सरकार ने यू कोट वी पे मॉडल की नीति अपनाई है। इस नीति के तहत चिकित्सकों को ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्र के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है और उम्मीद की जा रही है कि इस नीति के तहत जो चिकित्सक अब नौकरी ज्वाइन करेंगे, उनके द्वारा ग्रामीण लोगों की भली भांति देखभाल की जाएगी। हालांकि यह बात भी सही है कि इस नीति के तहत भी पर्याप्त मात्रा में चिकित्सक नहीं मिल पा रहे हैं। इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि प्राइवेट स्तर पर चिकित्सकों द्वारा भारी फीस लेकर एक-एक दिन में सैकड़ो मरीजों का इलाज किया जा रहा है। यदि प्रति मरीज 200 या ₹300 की फीस भी मान ली जाए तो एक दिन में एक प्रतिष्ठित चिकित्सक द्वारा 20 से 30 हजार रुपए तक की आय घर बैठे कर ली जाती है। इसके अलावा इन्हें तयशुदा दवाइयां लिखने पर, पूर्व से निर्दिष्ट पैथोलॉजी पर मरीजों को भेजने के बदले में भारी भरकम कमीशन भी प्राप्त होता है। एक अनुमान के अनुसार इन्हें लगभग इतनी ही राशि ड्रगिस्ट और केमिस्ट डीलरों, फार्मास्यूटिकल कंपनियों की ओर से इंसेंटिव के रूप में प्राप्त होती रहती है। एक कारण यह भी है जिसके चलते सरकारी चिकित्सालयों को चिकित्सा उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं। जो थोड़े बहुत उपलब्ध भी हैं तो उनकी रुचि सरकारी अस्पतालों में मरीजों की सेवा करने से ज्यादा घरों पर प्रेक्टिस करने में ज्यादा रहती है। अतः सरकार ने संविदा नियुक्ति के लिए हर सप्ताह पोर्टल खोलने का नियम भी बना दिया है। खासकर इन अस्पतालों में निश्चेतना विशेषज्ञों की सर्वाधिक मांग बनी हुई है। इनके अलावा रेडियोलॉजिस्ट भी ढूंढे से नहीं मिल रहे हैं। लेकिन मध्य प्रदेश सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि सरकार सभी नागरिकों को अच्छी स्वास्थ्य सुविधा देने के लिए प्रतिबद्ध है। दूरस्थ इलाकों के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को फर्स्ट रेफरल यूनिटों के तौर पर तैयार किया जा रहा है। विशेषज्ञों की भर्ती खुली रखी गई है। इनकी नियुक्तियां होते ही सभी स्वास्थ्य केदो पर विभिन्न रोगों के विशेषज्ञों की पदस्थापना भी होने जा रही है। इसके अलावा सरकार ने चिकित्सकों को वेतन भक्तों के साथ-साथ इंसेंटिव देना भी तय किया है। उम्मीद की जा रही है कि इन आर्थिक आकर्षणों के चलते जल्दी ही शासकीय चिकित्सालयों और खासकर ग्रामीण स्तर पर स्थापित स्वास्थ्य केंद्रों को नए चिकित्सकों की खेप मिलने जा रही है। इससे मरीजों का भला तो होगा ही, मध्य प्रदेश की डॉक्टर मोहन यादव सरकार की यश कीर्ति में भी इजाफा भी होने वाला है। आशा है चिकित्सक वर्ग भी मध्य प्रदेश शासन की मंशा अनुरूप मानव सेवा को सर्वोपरि रखते हुए इन नियुक्तियों में रुझान प्रदर्शित करेंगे।

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