मध्य प्रदेश की डॉक्टर मोहन यादव सरकार किसानों और उद्योगपतियों के विकास को लेकर बेहद गंभीर है। शायद यह इसलिए भी उचित है, क्योंकि जब किसान और उद्योगपति आर्थिक रूप से मजबूत होंगे तभी दोनों वर्ग समाज हित में अपना योगदान समर्पित कर पाएंगे। सरकार की इसी मंशा के चलते कृषि उद्योग समागम-2025 में खाद्य प्रसंस्करण उद्यमियों का सम्मेलन हुआ। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि सरकार विकास के लिए प्रतिबद्ध है। इस दौरान कार्यक्रम में मौजूद कई उद्योगपति प्रदेश में निवेश करने के इच्छुक दिखाई दिए। इससे स्पष्ट हो जाता है कि उन्हें मध्य प्रदेश में अनुकूल माहौल दिखाई दे रहा है। इसीलिए हर किसी ने ग्लोबल इंवेस्टर्स समिट का भी जिक्र किया, जिसमें 65 देशों के निवेशकों ने भाग लिया था। आर्थिक दृष्टि से देखा जाए तो विकास के लिए भारत में धन की कमी नहीं है, लेकिन व्यवस्थाओं को सुधारने की जरूरत है। इसी विचार के चलते मुख्यमंत्री ने उद्यमियों को प्रोत्साहित करते हुए सबकी बेहतरी के लिए एक गाना भी गाया। उन्होंने किसानों की आय बढ़ाने के लिए सरकार की योजनाओं और निवेश को बढ़ावा देने की बात कही। साथ ही, गन्ना किसानों को स्प्रिंकलर और मशीनरी का लाभ देने की घोषणा की। इससे एक बात तो स्पष्ट हो जाती है कि प्रदेश की मोहन यादव सरकार विकास के लिए पूरी तरह से तैयार है। यही वजह है कि उनकी सरकार की प्रतिबद्धता को देखकर देश के कई उद्योगपति मध्य प्रदेश में निवेश करने की इच्छा लेकर आ रहे हैं। भोपाल में हुए ग्लोबल इंवेस्टर्स समिट में भारत के अलावा 65 देशों के निवेशकों ने हिस्सा लिया था। भारत में दौलत और अच्छे काम करने के अवसरों की कोई कमी नहीं है। कमी सिर्फ व्यवस्थाओं को ठीक से चलाने में है। यह बात मुख्यमंत्री के भाषण में भी देखने को मिली । उन्होंने कहा कि कालांतर में हमारे देश को हमेशा सोने की चिड़िया कहा जाता था। लेकिन, पहले कोई भी आकर इस सोने की चिड़िया को लूट लेता था। अब जमाना बदल गया है। अब ‘लॉयन’ का जमाना है और हमारे बीच ‘लॉयन’ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हैं। सीएम मोहन यादव ने उद्यमियों को प्रोत्साहित करते हुए सबकी भलाई के लिए एक गाना भी गाया “अपने लिए जीए तो क्या जीए…, तू जी ऐ दिल जमाने के लिए। विकास की दृष्टि से देखा जाए तो मध्य प्रदेश का यह स्वर्ण काल है। तभी तो किसानों के लिए सिर्फ नरसिंहपुर में ही नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश में चार मेले लग रहे हैं। सरकार इन मेलों के माध्यम से निवेश को बढ़ावा देगी, जिससे किसानों की आय में वृद्धि होगी। वैसे भी देखा जाए तो बीते कई सालों से मध्य प्रदेश की एग्रीकल्चर ग्रोथ रेट बहुत अच्छी है। साल 2002-03 तक मध्य प्रदेश में केवल 7 लाख हेक्टेयर जमीन पर सिंचाई होती थी। उस समय एग्रीकल्चरल ग्रोथ रेट 0.007 थी। लेकिन, आज खुशी की बात है कि मध्य प्रदेश 12% से भी ज्यादा की गति से आगे बढ़ रहा है। यह बदलते हुए मध्य प्रदेश की तस्वीर है। फिलहाल नरसिंहपुर में 153.38 करोड़ रुपए की लागत वाली 14 इकाइयों का उद्घाटन किया गया है। अनुमान व्यक्त किया जा रहा है कि इससे 1004 लोगों को रोजगार मिलेगा। इसके अलावा, लगभग 475 करोड़ रुपए की लागत वाली 16 इकाइयों का भूमि-पूजन भी हुआ है। 15 निवेशकों को 2386 करोड़ रुपए के निवेश के प्रस्ताव पत्र दिए गए हैं, जिससे 2651 रोजगार पैदा होंगे। इस प्रकार, कुल 53 कृषि आधारित औद्योगिक इकाइयों के माध्यम से 4376.30 करोड़ रुपए का निवेश प्राप्त हुआ है और इससे 6164 लोगों को रोजगार मिलेगा। कार्यक्रम की खास बात यह रही कि मुख्यमंत्री ने किसानों का दिल जीतने के लिए एक महत्वपूर्ण घोषणा की। उन्होंने कहा कि गन्ना उत्पादक किसानों को सरकारी योजना के अनुसार स्प्रिंकलर दिए जाएंगे। सरकार किसानों को सिंचाई में कम पानी का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित करेगी। साथ ही, उन्होंने गन्ना खेती में उपयोग होने वाली मशीनरी का लक्ष्य बढ़ाकर किसानों को नई तकनीक का लाभ देने की बात कही। पत्रकारिता की दृष्टि से देखें तो प्रदेश के प्रबुद्ध वर्जन महसूस किया है कि सरकार ने किसानों की आय बढ़ाने का लक्ष्य रखा है। यह तभी संभव है जब उद्योगों के माध्यम से किसानों को उनकी उपज का सही दाम मिलेगा। जब किसानों और युवाओं को रोजगार दिलाने की बात आती है, तो सरकार विशेष कार्यक्रम आयोजित करके उनकी कठिनाइयों को दूर करती है। उद्योग और कृषि के बीच यह खूबसूरत संतुलन मध्य प्रदेश के सर्वांगीण विकास में नया इतिहास बचेगा इसमें कोई शक नहीं।


