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कांग्रेस का आरोप तेज… महात्मा गांधी के पौत्र राजमोहन के वीडियो के सहारे अमित शाह के बयान पर सवाल

देश/प्रदेश नई दिल्ली राष्ट्रीय

एजेंसी, नई दिल्ली। कांग्रेस ने इतिहासकार और लेखक राजमोहन गांधी की टिप्पणी को आधार बनाते हुए कहा है कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा पंडित जवाहरलाल नेहरू को लेकर दिया गया दावा पूर्णतः भ्रामक है। कांग्रेस का आरोप है कि नेहरू को पहली बार प्रधानमंत्री बनाने में किसी तरह की ‘वोट हेराफेरी’ नहीं हुई थी। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने ‘एक्स’ मंच पर राजमोहन गांधी का वीडियो साझा किया, जिसमें उन्होंने स्पष्ट किया कि वर्ष 1946 में प्रदेश कांग्रेस कमेटियों ने सरदार पटेल के नाम का समर्थन अवश्य किया था, लेकिन उस समय प्रधानमंत्री पद का कोई औपचारिक मुद्दा मौजूद ही नहीं था। उनके अनुसार, उस दौर में कांग्रेस अध्यक्ष का चयन ही मुख्य विषय था। वीडियो में राजमोहन गांधी ने बताया कि ‘‘भारत छोड़ो आंदोलन’’ के दौरान जेल गए हजारों स्वतंत्रता सेनानियों को 1945 में रिहा किया गया था। उस समय मौलाना आज़ाद कांग्रेस अध्यक्ष थे और अंग्रेज़ी शासन द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों के कारण नए अध्यक्ष चुनाव की प्रक्रिया भी बाधित थी। उन्होंने कहा कि 1946 में जब नए अध्यक्ष के चयन की बात हुई, तब कई पीसीसी ने पटेल का नाम आगे रखा, कुछ ने कृपलानी का समर्थन किया, लेकिन नेहरू का नाम किसी ने प्रस्तावित नहीं किया।

राजमोहन गांधी ने कहा कि पार्टी की परंपरा रही थी कि अलग-अलग पीसीसी द्वारा भेजे गए नाम महात्मा गांधी के समक्ष रखे जाते थे और वे सर्वसम्मति के आधार पर एक नाम सुझाते थे, जिसे आम तौर पर सभी स्वीकार कर लेते थे।

उन्होंने यह भी कहा कि यह तरीका कितना उचित था, यह अलग बहस का विषय है, लेकिन उस समय यही प्रक्रिया प्रचलित थी। इतिहासकार के अनुसार, पटेल ने नेहरू से अधिक उम्र पाई थी, उनका स्वास्थ्य भी कमजोर रहता था और स्वतंत्रता आंदोलन में उनका योगदान अहम था। इसलिए पीसीसी की सोच सम्मान के भाव से प्रेरित थी, न कि प्रधानमंत्री पद के किसी अनुमान से। बाद में महात्मा गांधी ने पटेल और कृपलानी से अपने नाम वापस लेने का अनुरोध किया और दोनों ने तुरंत मान लिया। इसके बाद कार्यसमिति ने नेहरू को अध्यक्ष बनाए जाने का प्रस्ताव पारित किया। राजमोहन गांधी ने कहा कि जब अंग्रेज़ों और कांग्रेस के बीच समझौता हुआ, तब नेहरू कांग्रेस अध्यक्ष थे और इसी आधार पर उन्हें सरकार गठन के लिए बुलाया गया। अमित शाह ने लोकसभा में कहा था कि स्वतंत्रता के समय प्रदेश कांग्रेस कमेटियों द्वारा करवाए गए मतदान में पटेल को 28 और नेहरू को केवल दो मत मिले थे, बावजूद इसके नेहरू प्रधानमंत्री बने। कांग्रेस ने इस दावे को इतिहास से खिलवाड़ बताया है। जयराम रमेश ने एक अन्य पोस्ट में कहा कि राज्यसभा में प्रस्तुत किए गए विभिन्न ऐतिहासिक तर्क भ्रामक हैं। उन्होंने याद दिलाया कि 24 जनवरी 1950 को संविधान सभा के अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने स्पष्ट घोषणा की थी कि ‘जन गण मन’ और ‘वंदे मातरम्’ दोनों को समान सम्मान और समान दर्जा दिया जाएगा। कांग्रेस का आरोप है कि बार-बार इतिहास को गलत तरह पेश करना और दो महान साहित्यकारों—बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय तथा रवींद्रनाथ टैगोर—को एक-दूसरे के सामने खड़ा करना भाजपा की रणनीति का हिस्सा है, जो अब उलटी पड़ रही है।

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