एजेंसी, नई दिल्ली। सरकार ने कोयला क्षेत्र में सुधारों को और आगे बढ़ाते हुए कोयला निर्यात और औद्योगिक उपयोग के लिए नई नीलामी नीति (कोल सेतु) को मंजूरी दी है। केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्वनी वैष्णव ने शुक्रवार को बताया कि प्रधानमंत्री मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति ने कोल सेतु नीति को स्वीकृति दी है। इस नीति के तहत “कोल सेतु विंडो” बनाई गई है, जिससे कोयले का उपयोग औद्योगिक उपयोग और निर्यात दोनों के लिए किया जा सकेगा। नीति के अंतर्गत दीर्घकालिक नीलामी और कोयला लिंकेज आवंटन की प्रक्रिया को पारदर्शी और कुशल बनाया गया है। 2016 की गैर-विनियमित क्षेत्र (एनआरएस) लिंकेज नीति में अब कोल सेतु विंडो को जोड़ा गया है, जिसमें घरेलू खरीदार भी भाग ले सकते हैं। नीति के तहत प्राप्त कोयला लिंकेज का उपयोग स्वयं उपभोग, निर्यात या देश में पुनर्विक्रय के अलावा अन्य किसी उद्देश्य के लिए किया जा सकता है। लिंकेज धारक अपनी मात्रा का 50 प्रतिशत तक निर्यात कर सकेंगे और समूह कंपनियों के बीच लचीले ढंग से उपयोग की सुविधा भी होगी। इससे धुले हुए कोयले की उपलब्धता बढ़ेगी और आयात में कमी आएगी।
डिजिटल जनगणना 2027 को मंजूरी, 11,718 करोड़ रुपये का बजट आवंटित
केंद्रीय मंत्री अश्वनी वैष्णव ने कहा कि सरकार ने भारत की पहली डिजिटल जनगणना 2027 के लिए 11,718 करोड़ रुपये का बजट मंजूर किया है। जनगणना दो चरणों में आयोजित होगी: अप्रैल–सितंबर 2026 में मकान और आवास की सूची तैयार की जाएगी और फरवरी 2027 में जनसंख्या गणना होगी। लद्दाख, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के दूरदराज क्षेत्रों की जनगणना सितंबर 2026 में की जाएगी। प्रारंभिक चरण में जातिगत आंकड़े भी इलेक्ट्रॉनिक रूप से एकत्र किए जाएंगे। लगभग 30 लाख कर्मचारी इस कार्य में जुटेंगे। मोबाइल ऐप और केंद्रीय पोर्टल के माध्यम से डेटा संग्रह और निगरानी की जाएगी।
मनरेगा योजना का नाम बदलेगी केंद्र सरकार
सरकार ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) का नाम बदलकर ‘पूज्य बापू ग्रामीण रोजगार गारंटी’ करने का निर्णय लिया है। योजना के तहत ग्रामीण गरीबों को साल में 125 दिन तक रोजगार मिलेगा। केंद्र इसके लिए 1.51 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान करेगी।
योजना का इतिहास और उद्देश्य:
– 2005 में मनमोहन सरकार ने इसे शुरू किया था।
– शुरुआत में इसे राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (एनआरईजीए) कहा जाता था।
– उद्देश्य: ग्रामीण अकुशल श्रमिकों को गारंटीड रोजगार प्रदान करना।
– वर्तमान में प्रति दिन 370 रुपये मजदूरी मिलती है।
कोविड-19 में योगदान:
महामारी के दौरान प्रवासी मजदूरों को रोजगार उपलब्ध कराना और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना इस योजना का अहम हिस्सा रहा।
बजट आवंटन और प्रभाव:
मोदी सरकार ने 2025–26 के लिए मनरेगा का बजट 86,000 करोड़ रुपये रखा है, जो पिछले वर्ष से लगभग 10% अधिक है। योजना सड़क, तालाब निर्माण और वृक्षारोपण जैसी परियोजनाओं के जरिए ग्रामीण क्षेत्रों की स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती देती है।
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