वाराणसी/गाजीपुर| उत्तरप्रदेश के माफिया मुख्तार अंसारी को शनिवार को गाजीपुर के कालीबाग कब्रिस्तान में दफन कर दिया गया। 30 हजार लोग मुख्तार के जनाजे में पहुंचे। इस दौरान डीएम आर्यका अखौरी ने मुख्तार के बड़े भाई सांसद अफजाल अंसारी से परिवार के लोगों को ही कब्रिस्तान में ले जाने को कहा। इसे लेकर अफजाल और डीएम के बीच तीखी बहस हो गई। अफजाल ने कहा कि मिट्टी देने के लिए दुनिया में कोई परमिशन नहीं लेता है। जवाब में डीएम ने कहा कि धारा 144 तोड़ने वालों पर FIR कराऊंगी। दोनों के बीच करीब 10 मिनट बहस चली। इसका वीडियो भी सामने आया है।
डीएम और अफजाल की हॉट-टॉक….
डीएम: परिवार के लोगों को ही कब्रिस्तान में लेकर जाएं।
अफजाल: जो लोग मिट्टी में शामिल होना चाहते हैं, उन्हें रोका नहीं जा सकता है।
डीएम: इसके लिए परमिशन नहीं ली है।
अफजाल: मिट्टी देने के लिए, अपने धार्मिक प्रयोजन के लिए किसी की परमिशन की जरूरत नहीं होती है।
डीएम: पूरा कस्बा मिट्टी देगा क्या? परिवार के लोग दें।
अफजाल: कस्बा नहीं, जहां के लोग मिट्टी देना चाहेंगे, वो देंगे। इसकी दुनिया में कोई परमिशन नहीं लेता।
डीएम: क्यों नहीं लेता? यहां धारा 144 लगी हुई है।
अफजाल: धारा 144 के बाद भी आप किसी को मिट्टी देने से नहीं रोक सकती हैं।
डीएम: धारा 144 तोड़ने वालों पर FIR कराऊंगी।
बेटे ने मुख्तार के जनाजे पर इत्र छिड़का, मूंछों पर ताव दिया
मुख्तार उत्तरप्रदेश की बांदा जेल में बंद था। 28 मार्च की रात उसे बेहोशी की हालत में रानी दुर्गावती मेडिकल कॉलेज लाया गया था। 9 डॉक्टर्स ने उसका इलाज किया, पर मुख्तार को बचाया नहीं जा सका। मुख्तार कई बार कह चुका था कि जेल में उसे मारने की साजिश की जा रही है। उसे जहर दिया जा रहा है। ढाई घंटे चले पोस्टमॉर्टम के बाद मुख्तार की मौत की वजह कार्डियक अरेस्ट बताई गई। मुख्तार का शव बांदा से शुक्रवार की रात 1 बजकर 15 मिनट पर गाजीपुर स्थित पुश्तैनी घर लाया गया। शनिवार सुबह मुख्तार के पैतृक घर जिसे बड़ा फाटक कहते हैं, वहां मुख्तार का शव अंतिम दर्शन के लिए रखा गया था। बेटे उमर ने जनाजे पर इत्र छिड़का। मुख्तार की मूंछों पर आखिरी बार ताव दिया। जनाजा निकलने के बाद प्रिंस टाकीज मैदान पर नमाज-ए-जनाजा की रस्म अदा की गई। इसके बाद मुख्तार अंसारी को शनिवार सुबह 10:45 बजे गाजीपुर के कालीबाग कब्रिस्तान में दफन कर दिया गया।
‘अतीक अहमद तो गया, अब मुख्तार अंसारी निपट जाए तो पूर्वांचल से माफियागिरी भी निपट जाएगी।’ अच्युतानंद ने ये बात 15 अप्रैल 2023 को माफिया अतीक अहमद के मर्डर के बाद कही थी। ठीक 11 महीने 13 दिन बाद मुख्तार अंसारी की भी मौत हो गई। 28 मार्च को जेल में मुख्तार को कॉर्डियक अरेस्ट आया और हॉस्पिटल जाते-जाते उसकी सांसें टूट गईं। मैं लगातार 25 साल तक मऊ सदर से विधानसभा सदस्य निर्वाचित हुआ। मुझे राजनीतिक द्वेष के चलते रंजिशन आपराधिक मुकदमों में फंसाया जाता रहा है। मैं 2005 से जेल में हूं। अभी बांदा जेल में बंद हूं। यहां मुझे 19 मार्च की रात को खाने में जहर देकर जान से मारने की कोशिश की गई।’ मुख्तार अंसारी ने ऐसा 21 मार्च 2024 को मऊ की एमपी/एमएलए कोर्ट को एक प्रार्थना पत्र में लिखा। यह पहली बार नहीं था कि मुख्तार को जेल में मारे जाने का डर था। वह और उसका परिवार पहले भी कोर्ट में ऐसे आरोप लगाता रहा है। मुख्तार की कार्डियक अरेस्ट से 28 मार्च रात को मौत हो गई।


