एजेंसी, नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव का असर अब भारत की रसोई तक पहुंचने लगा है। ईरान और अमेरिका के बीच जारी संघर्ष के कारण समुद्री व्यापारिक मार्गों, विशेष रूप से ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ में आई बाधा से भारत की एलपीजी आपूर्ति व्यवस्था डगमगा गई है। इसके चलते देश के कई राज्यों में कमर्शियल गैस की भारी किल्लत पैदा हो गई है और घरेलू सिलेंडर की बुकिंग के नियमों को काफी सख्त कर दिया गया है।
घरेलू उपभोक्ताओं को मिलेगी प्राथमिकता
कच्चे माल (प्रोपेन और ब्यूटेन) की कमी को देखते हुए सरकार ने ‘अनिवार्य वस्तु अधिनियम’ के तहत आपातकालीन प्रावधान लागू किए हैं। तेल कंपनियों को निर्देश दिया गया है कि वे उपलब्ध स्टॉक को सबसे पहले घरेलू (14.2 किलो) सिलेंडर के लिए सुरक्षित रखें। इसका सबसे बड़ा असर कमर्शियल सेक्टर पर पड़ रहा है। महाराष्ट्र के पुणे, मुंबई और नागपुर जैसे शहरों में कमर्शियल गैस की आपूर्ति में भारी कटौती की गई है। पुणे में स्थिति इतनी गंभीर है कि एलपीजी से चलने वाले श्मशान घाटों को भी अस्थाई रूप से बंद करना पड़ा है। इसके साथ ही लगभग 9,000 रेस्टोरेंट और भोजनालयों के कामकाज पर संकट गहरा गया है।
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बुकिंग नियमों में कड़ाई
घरेलू सिलेंडर की कालाबाजारी और जमाखोरी रोकने के लिए अब बुकिंग के नियमों को कड़ा कर दिया गया है। हिमाचल प्रदेश और पंजाब जैसे राज्यों में अब उपभोक्ता पिछला सिलेंडर मिलने के 21 से 25 दिनों के बाद ही नया रिफिल बुक कर पाएंगे। इससे पहले की गई कोई भी बुकिंग सिस्टम द्वारा अपने आप निरस्त कर दी जाएगी। इसके अलावा, डिलीवरी के समय ओटीपी या बायोमेट्रिक सत्यापन को अनिवार्य कर दिया गया है।
कीमतों में हुआ इजाफा
7 मार्च से एलपीजी की कीमतों में उछाल देखा गया है। कमर्शियल सिलेंडर के दाम लगभग 115 रुपये और घरेलू सिलेंडर की कीमत करीब 60 रुपये तक बढ़ गई है। हालांकि, राहत की बात यह है कि सरकार ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई वृद्धि नहीं की जाएगी।
आपूर्ति में 30 प्रतिशत की गिरावट
भारत अपनी जरूरत का एक बड़ा हिस्सा कतर और सऊदी अरब जैसे देशों से आयात करता है। वर्तमान तनाव के कारण साप्ताहिक आयात में लगभग 30 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की गई है, जिससे उपलब्ध स्टॉक का प्रबंधन रेशनिंग के जरिए करना पड़ रहा है।


