उद्योग के साथ-साथ रोजगार का हब बनने की ओर अग्रसर मध्य प्रदेश

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राजनीति में जो कहा जाए वही किया जाए और फिर वह सब हो भी जाए, ऐसा बहुत कम देखने को मिलता है। लेकिन मध्य प्रदेश की डॉक्टर मोहन यादव सरकार ने ग्लोबल इन्वेस्टर्स सबमिट के जस्ट पहले जिस प्रकार की कदम उठाने शुरू किए हैं, सरकारी मशीनरी को जैसे निर्देश दिए जा रहे हैं और जमीनी स्तर पर जो तैयारी देखने को मिल रही है, उनसे यह स्पष्ट हो चला है कि आने वाले समय में मध्य प्रदेश दुनिया भर से भारी भरकम निवेश प्राप्त करने जा रहा है। फल स्वरुप मध्य प्रदेश में औद्योगिक क्रांति तो आना ही है, साथ में संभावनाएं व्यक्त की जा रही हैं कि आने वाले दिनों में नौकरियां में युवाओं को लाखों की तादाद में रिक्त पदों के अवसर प्राप्त होने जा रहे हैं। जैसा कि सभी को मालूम है मध्य प्रदेश में ग्लोबल इन्वेस्टर्स मीट का शुभारंभ देश केंद्र प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी करने जा रहे हैं। यही वजह है कि इसकी सफलता को लेकर काफी उम्मीदें बन गई हैं । क्योंकि ऐसे में निवेशकों को केवल मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री ही नहीं बल्कि देश के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की ओर से भी एक व्यापक कमिटमेंट मिलने की संभावना पैदा हो गई है। इससे जानकारों को भरोसा हो चला है कि यह ग्लोबल इन्वेस्टर समिट बड़े पैमाने पर सफल होने जा रही है। इसलिए इसकी सफलता को लेकर मध्य प्रदेश सरकार भी आश्वस्त है। यही वजह है कि उसने अभी से यह योजनाएं बनानी शुरू कर दी हैं कि निवेशकों की रजामंदी मिलने के बाद उन्हें जमीनी स्तर पर क्या-क्या तैयारियां करनी हैं । यही वजह है कि बात कैबिनेट बैठक की हो या फिर सरकारी मशीनरी को निर्देश देने की, मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव ने यह स्पष्ट कर दिया है कि हमें नई औद्योगिक क्रांति के लिए कमर कसकर तैयार रहना चाहिए। हाल ही में निर्णय लिए गए हैं कि उद्योग संवर्धन से संबंधित नीतियों में बड़े पैमाने पर बदलाव किए जाएं। यह भी सुनिश्चित किया जाए कि निवेशकों की ओर से उद्योग लगाने के लिए किए जाने वाले आवेदनों के एवज में अनुमतियां उन्हें 10 दिनों के भीतर प्राप्त हो जानी चाहिए। यही नहीं, इसके लिए न्यूनतम औपचारिकताएं और न्यूनतम दस्तावेज की प्रणाली भी अपनाए जाने पर काम शुरू किया जा चुकाहै। इसके बाद कच्चे माल की आवक और तैयार माल के परिवहन हेतु उद्योग समर्थित नीतियां बनें। इसके लिए लॉजिस्टिक पार्क बनाने की तैयारियां की जाएं। मांग अनुरूप विद्युत आपूर्ति का आकलन अभी से किया जाए और उसकी तैयारी शुरू की जाए। इसके लिए सोलर और हाइड्रो प्लांट, दोनों ही स्तरों पर कार्य शुरू किये जा रहे हैं। देसी और विदेशी उद्योगपति हमारे यहां कच्चा माल तैयार करें अथवा निर्यात हेतु उत्पादन पर जोर दें। इसके लिए उन्हें प्रोत्साहित करने के लिए एक ऐसी नीति भी बनाई जा रही है, जिसके तहत निवेशकों अर्थात उद्योगपतियों को 2 करोड रुपए तक की प्रोत्साहन राशि सरकार की ओर से उपलब्ध कराई जा सकती है। यदि मध्य प्रदेश को केंद्र में रखकर यहां फिल्में बनाई जाएंगी तो 10 करोड रुपए तक का अनुदान मध्य प्रदेश शासन की ओर से दिए जाने का प्रावधान किया जा रहा है। इस योजना में सभी स्तर की फिल्मों को शामिल किया जा रहा है। उदाहरण के लिए – फीचर फिल्म पर 2 करोड़, वेब सीरीज पर सीरीज पर डेढ़ करोड़, टीवी सीरियल पर एक करोड़, डॉक्यूमेंट्री के लिए 10 लाख, अंतरराष्ट्रीय स्तर की फिल्म बनाने के बदले 10 करोड रुपए तक का प्रोत्साहन मध्य प्रदेश शासन की ओर से मिल सकता है। शॉर्ट फिल्म बनाने के लिए 15 लाख रुपए मिलेंगे। शर्त केवल इतनी सी होगी कि उपरोक्त फिल्मों, सीरियलों की शूटिंग 75% मध्य प्रदेश में होनी चाहिए। इन नीतियों से एक और फिल्म निर्माता का रुझान मध्य प्रदेश की ओर पहले से अधिक बढ़ेगा। जब यहां और अधिक फिल्मों की, सीरियलों की शूटिंग होगी तो फिर स्थानीय कलाकारों और शूटिंग में लगने वाले संसाधनों से मध्य प्रदेश के लोगों को भारी भरकम आय प्राप्त होने के रास्ते खुलेंगे। इससे मध्य प्रदेश की ब्रांडिंग भी होगी और भारी भरकम राजस्व भी प्राप्त होगा। जाहिर है इससे मध्य प्रदेश के पर्यटन को नई ताकत मिलेगी। सो उस लिहाज से भी डॉक्टर मोहन यादव की सरकार ने कमर कस ली है। नीति बनाई जा रही है कि पर्यटकों के लिए नई सुविधाजनक, रोमांचक, जगहों के विकास में तेजी लाई जाए। यदि पर्यटन के क्षेत्र में लोग निवेश करना चाहें तो उन्हें सुविधाओं की दृष्टि से सकारात्मक माहौल उपलब्ध रहना चाहिए। मांग अनुरूप निवेशकों को 90 सालों की लीज पर जमीन दी जाएगी। साथ में भारी भरकम अनुदान जो 90 करोड रुपए तक भी हो सकते हैं, उनका प्रावधान किया जा रहा है। लिखने का आशय यह कि जब लक्ष्य बड़े हैं तो फिर सफलताएं भी व्यापक पैमाने पर मिलना अभी से नजर आने लगी हैं । सरकार जिस गंभीरता से ग्लोबल इन्वेस्टर समिट हो ले रही है, उससे यह स्पष्ट हो गया है कि यह केवल औपचारिकता मात्र नहीं, बल्कि मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव का एक गंभीर प्रयास है। जिसके तहत मध्य प्रदेश में एक नई उद्योग क्रांति अपेक्षित है और उम्मीद की जा रही है कि इस कवायद से मध्य प्रदेश के लगभग 20 लाख युवाओं को नौकरियां मिलने की राह निर्मित हो रही है। इस दृष्टि से देखा जाए तो मध्य प्रदेश शासन की इस पहल की जितनी सराहना की जाए उतनी कम है।

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