एजेंसी, ह्यूस्टन। आर्टेमिस 2 मिशन : अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में एक नया इतिहास रचते हुए आर्टेमिस-2 मिशन के चारों यात्री सुरक्षित रूप से धरती पर वापस आ गए हैं। शुक्रवार को इनका कैप्सूल प्रशांत महासागर में उतरा, जिसके साथ ही पिछले 50 सालों से भी ज्यादा समय के बाद इंसानों की पहली चंद्रमा यात्रा सफलतापूर्वक पूरी हो गई। इस सफर के दौरान अंतरिक्ष यात्रियों ने चांद के उन हिस्सों का दीदार किया जो अब तक दुनिया की नजरों से ओझल थे। इस साहसी दल ने अंतरिक्ष में सबसे लंबी दूरी तय करने का एक नया वर्ल्ड रिकॉर्ड भी अपने नाम कर लिया है।
#WATCH | Four-member crew of the Artemis II mission safely assisted out of the Orion capsule after it safely splashed down in the Pacific Ocean.
The crew comprised NASA astronauts Reid Wiseman, Victor Glover, and Christina Koch, along with Canadian Space Agency astronaut Jeremy… https://t.co/zplfwQtRnV pic.twitter.com/XaNSO2NuFn
— ANI (@ANI) April 11, 2026
दूरी का नया विश्व रिकॉर्ड
आर्टेमिस-2 मिशन का मकसद चंद्रमा की सतह पर उतरना या उसकी परिक्रमा करना नहीं था, बल्कि अंतरिक्ष की गहराइयों को मापना था। इस सफर में चालक दल पृथ्वी से लगभग 4,06,771 किलोमीटर की दूरी तक गया। इसके साथ ही उन्होंने अपोलो 13 के पुराने रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया और इंसानी इतिहास की सबसे लंबी अंतरिक्ष यात्रा का गौरव हासिल किया। वापसी के समय ओरियन कैप्सूल की रफ्तार ध्वनि की गति से करीब 33 गुना ज्यादा थी।
खतरनाक वापसी और मिशन की सफलता
‘इंटीग्रिटी’ नाम का यह कैप्सूल जब धरती के वायुमंडल में दाखिल हुआ, तो घर्षण की वजह से इसका तापमान हजारों डिग्री तक पहुंच गया था। एक समय ऐसा भी आया जब अत्यधिक गर्मी और प्लाज्मा के कारण मिशन कंट्रोल रूम का अंतरिक्ष यात्रियों से संपर्क पूरी तरह टूट गया था। उस पल वहां मौजूद वैज्ञानिकों और परिजनों की सांसें थम सी गई थीं, लेकिन सुरक्षित लैंडिंग के साथ ही पूरा कंट्रोल रूम खुशी से झूम उठा। यह कैप्सूल सैन डिएगो के तट के पास समुद्र में सफलतापूर्वक उतरा।
दस दिनों का ऐतिहासिक सफर
नासा के इस महत्वपूर्ण मिशन में कमांडर रीड वाइजमैन, पायलट विक्टर ग्लोवर, मिशन विशेषज्ञ क्रिस्टीना कोच और जेरेमी हैनसेन शामिल थे। यह सफर 1 अप्रैल को फ्लोरिडा के केप कैनावेरल से शुरू हुआ था। पूरे 10 दिनों तक चले इस अभियान ने साबित कर दिया है कि इंसान एक बार फिर चंद्रमा की सीमाओं को लांघने के लिए पूरी तरह तैयार है। भारतीय समयानुसार यह लैंडिंग 11 अप्रैल की सुबह संपन्न हुई।
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