एजेंसी, नई दिल्ली। दिल्ली के चर्चित आबकारी नीति मामले को लेकर सोमवार को दिल्ली हाई कोर्ट में जोरदार बहस देखने को मिली। पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल खुद अदालत में पेश हुए और उन्होंने न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा से अनुरोध किया कि वे आबकारी नीति मामला की सुनवाई से खुद को अलग कर लें। केजरीवाल और अन्य आरोपियों की इस मांग के बाद अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 13 अप्रैल की तारीख तय की है।
VIDEO | Delhi: Advocate Rishikesh Kumar says, “The application was listed today for recusal. Arvind Kejriwal appeared in court and urged that his application be taken on record… As per our Constitution, any person can present their arguments before the court without a lawyer.”… pic.twitter.com/D51Oofa9VN
— Press Trust of India (@PTI_News) April 6, 2026
अदालत में हुई तीखी नोकझोंक
सुनवाई के दौरान सीबीआई की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने केजरीवाल की मौजूदगी और उनकी दलीलों पर कड़ा ऐतराज जताया। उन्होंने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि अदालत कोई ‘नौटंकी का मंच’ नहीं है। मेहता ने कहा कि अगर केजरीवाल खुद अपनी बात रखना चाहते हैं, तो उन्हें अपने वकीलों को हटा देना चाहिए। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री द्वारा जज पर लगाए गए आरोपों को पूरी तरह बेबुनियाद और अपमानजनक करार दिया। न्यायमूर्ति शर्मा ने स्पष्ट किया कि यदि कोई और भी इस तरह की अर्जी देना चाहता है, तो जल्द दे दे ताकि वे एक साथ इस पर अंतिम निर्णय ले सकें।
निचली अदालत का फैसला और सीबीआई की चुनौती
यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब 27 फरवरी को निचली अदालत ने अरविंद केजरीवाल, पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और 21 अन्य लोगों को इस मामले में बरी कर दिया था। उस समय कोर्ट ने सीबीआई को कड़ी फटकार लगाते हुए कहा था कि एजेंसी का मामला पूरी तरह आधारहीन है और न्यायिक कसौटी पर टिक नहीं पाया। हालांकि, सीबीआई ने इस फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी, जिस पर न्यायमूर्ति शर्मा ने सभी 23 आरोपियों को नोटिस जारी किया था। हाई कोर्ट ने प्रथम दृष्टया माना था कि निचली अदालत के निष्कर्षों में कुछ कमियां हो सकती हैं, जिन पर विचार करना जरूरी है।
निष्पक्ष सुनवाई को लेकर केजरीवाल की आशंका
केजरीवाल और सिसोदिया सहित अन्य आरोपियों ने 11 मार्च को एक आवेदन दाखिल कर दावा किया था कि उन्हें न्यायमूर्ति शर्मा की अदालत में निष्पक्ष और तटस्थ सुनवाई की उम्मीद नहीं है। उन्होंने इस मामले को किसी अन्य न्यायाधीश के पास भेजने की मांग की थी, जिसे पहले मुख्य न्यायाधीश डीके उपाध्याय ने यह कहते हुए ठुकरा दिया था कि खुद को अलग करने का फैसला संबंधित जज को ही लेना होगा।
सीबीआई अधिकारी पर कार्रवाई पर रोक
गौरतलब है कि निचली अदालत ने सीबीआई के जांच अधिकारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई करने की सिफारिश भी की थी, जिसे न्यायमूर्ति शर्मा ने फिलहाल रोक दिया है। अब सबकी नजरें 13 अप्रैल पर टिकी हैं, जब अदालत यह तय करेगी कि इस हाई-प्रोफाइल मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा ही जारी रखेंगी या इसे किसी दूसरी बेंच को सौंपा जाएगा।
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