एजेंसी, भोपाल। मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश अब अपनी साझा संस्कृति और विकास की एक नई गाथा लिख रहे हैं। दोनों राज्य अपनी गौरवशाली विरासत को साथ लेकर उन्नति के पथ पर अग्रसर हैं। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि वह समय बीत गया जब दो राज्य पानी के बंटवारे जैसे मुद्दों पर आपस में टकराते थे। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कुशल मार्गदर्शन में आज कई कीर्तिमान स्थापित किए जा रहे हैं। केन-बेतवा लिंक परियोजना इसका जीवंत प्रमाण है, जिससे समूचे बुंदेलखंड क्षेत्र का कायाकल्प होगा। पूर्ववर्ती सरकारों ने केवल सुनहरे सपने दिखाए, जो कभी सच नहीं हुए, किंतु वर्तमान केंद्र सरकार के नेतृत्व में देश ने असंभव लगने वाले कार्यों को सिद्ध कर दिखाया है।
यशस्वी प्रधानमंत्री श्री @narendramodi जी के नेतृत्व में मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश अपनी विरासतों के साथ विकास की नई-नई ऊंचाइयों को स्पर्श कर रहे हैं।
आज वाराणसी में एमपी-यूपी सहयोग सम्मेलन 2026 में दोनों राज्यों की साझी प्रगति और म.प्र. में विद्यमान संभावनाओं पर चर्चा की।
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— Dr Mohan Yadav (@DrMohanYadav51) March 31, 2026
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने ये विचार वाराणसी में आयोजित मध्यप्रदेश-उत्तरदेश सहयोग सम्मेलन के दौरान व्यक्त किए। उन्होंने दोनों राज्यों के मध्य हुई इस नई शुरुआत पर हर्ष व्यक्त करते हुए कहा कि दोनों प्रदेश मिलकर अब प्रगति का नया अध्याय लिखेंगे। उन्होंने उल्लेख किया कि उत्तर प्रदेश और मध्यप्रदेश का नाता भगवान राम और कृष्ण के युग से अत्यंत गहरा है। प्रभु श्री राम ने अपने वनवास काल के ग्यारह वर्ष चित्रकूट में व्यतीत किए थे, वहीं भगवान श्री कृष्ण ने कंस वध के पश्चात उज्जैन स्थित सांदीपनि ऋषि के आश्रम में अपनी शिक्षा पूर्ण की थी।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि इस ऐतिहासिक मिलन का मुख्य उद्देश्य युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा करना, निर्धन वर्ग के जीवन स्तर को सुधारना और स्थानीय उत्पादों को उचित मूल्य दिलाना है। दोनों राज्यों के लघु उद्योगों के बीच बेहतर तालमेल बिठाने की दिशा में भी कार्य किया जाएगा। उन्होंने जानकारी दी कि सम्राट विक्रमादित्य के गौरवशाली जीवन पर शोध हेतु फेलोशिप दी जा रही है। इसी कड़ी में काशी विश्वनाथ धाम में आगामी 3 से 5 अप्रैल तक एक भव्य महानाट्य का मंचन होगा, जिसमें लगभग 400 कलाकार अपनी कला का प्रदर्शन करेंगे।
दोनों राज्य मिलकर दो हजार मेगावाट की सौर ऊर्जा परियोजना पर भी कार्य कर रहे हैं। केंद्र सरकार की एक लाख करोड़ की विशाल योजना में दोनों राज्यों की पांच-पांच प्रतिशत और भारत सरकार की नब्बे प्रतिशत भागीदारी होगी। यह परियोजना किसानों को सिंचाई और शहरों को पेयजल उपलब्ध कराने में मील का पत्थर साबित होगी। मुरैना के समीप एक बड़ी इकाई स्थापित की जा रही है, जिससे आवश्यकतानुसार दोनों राज्यों के किसानों को लाभ मिल सकेगा।
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इस अवसर पर औद्योगिक, पर्यटन और आर्थिक विकास को गति देने के लिए महत्वपूर्ण सहमति पत्रों पर हस्ताक्षर किए गए। इसका प्राथमिक लक्ष्य ‘एक जिला एक उत्पाद’, निवेश और धार्मिक पर्यटन सर्किट (वाराणसी-उज्जैन-चित्रकूट) को प्रोत्साहित करना है। उज्जैन के महाकाल मंदिर और काशी विश्वनाथ मंदिर के मध्य भीड़ प्रबंधन की आधुनिक तकनीक साझा करने हेतु भी समझौता हुआ है।
समझौते के मुख्य बिंदुओं के अनुसार, दोनों राज्य अपनी औद्योगिक क्षमताओं, जीआई टैग प्राप्त उत्पादों, कृषि और लघु उद्योग क्षेत्र में एक-दूसरे का सहयोग करेंगे। साथ ही वाराणसी, उज्जैन और चित्रकूट को जोड़कर एक विशाल धार्मिक पर्यटन मार्ग विकसित किया जाएगा। मध्यप्रदेश अपने सफल ‘एक जिला एक उत्पाद’ मॉडल के अनुभवों को उत्तर प्रदेश के साथ साझा करेगा। इस सहयोग का अंतिम लक्ष्य अंतरराष्ट्रीय निवेश को आकर्षित करना और व्यावहारिक औद्योगिक विकास का एक अनुकरणीय मॉडल तैयार करना है।


