एजेंसी, नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यस्थ दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021 में बड़े बदलावों का सुझाव दिया है। इस नए प्रस्ताव के अंतर्गत सोशल मीडिया और अन्य डिजिटल मंचों के लिए सरकार द्वारा जारी निर्देशों का पालन करने की अनिवार्यता को और अधिक कड़ा करने तथा ऑनलाइन उपलब्ध सामग्री पर निगरानी के दायरे को विस्तृत करने की योजना है। इसमें वे लोग भी शामिल होंगे जो समाचार प्रकाशक नहीं हैं, फिर भी सोशल मीडिया पर समाचार और समसामयिक घटनाओं से जुड़ी जानकारियां साझा करते हैं।
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— KNN INDIA #MSME (@knnindia) March 31, 2026
सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने इन प्रस्तावित संशोधनों पर संबंधित पक्षों और जनता से उनके विचार मांगे हैं, जिसके लिए 14 अप्रैल, 2026 तक का समय तय किया गया है। इन बदलावों का मुख्य उद्देश्य उन मध्यस्थों या सोशल मीडिया मंचों पर जवाबदेही तय करना है, जो ऐसे उपयोगकर्ताओं की सामग्री को अपने पास सुरक्षित रखते हैं जो आधिकारिक तौर पर पंजीकृत समाचार प्रकाशक नहीं हैं, लेकिन निरंतर समाचार और सामयिक विषयों पर पोस्ट साझा करते हैं।
इस महत्वपूर्ण कदम से अब सामान्य उपयोगकर्ताओं द्वारा फैलाए जाने वाले समाचारों को भी उस कानूनी ढांचे के भीतर लाया जा रहा है, जो डिजिटल मीडिया की नैतिकता और अनुशासन को नियंत्रित करता है। मसौदे के प्रावधानों के अनुसार, यह नियम समाचार और समसामयिक विषयों से जुड़ी उन सभी सामग्रियों पर लागू होंगे जिन्हें किसी भी कंप्यूटर संसाधन या डिजिटल मंच पर उन लोगों द्वारा अपलोड, संशोधित, प्रकाशित, प्रसारित या साझा किया जाता है, जो स्वयं अधिकृत प्रकाशक की श्रेणी में नहीं आते हैं।
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प्रस्तावित मसौदे में एक और महत्वपूर्ण बदलाव नियम 3(4) को जोड़ना है। यह नया नियम सोशल मीडिया कंपनियों और अन्य बिचौलियों के लिए यह स्पष्ट रूप से अनिवार्य कर देगा कि वे सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 79 के अंतर्गत अपनी ‘उचित सावधानी’ के दायित्वों को निभाते हुए मंत्रालय द्वारा समय-समय पर जारी किए जाने वाले स्पष्टीकरणों, परामर्शों, आदेशों और दिशानिर्देशों का कड़ाई से पालन करें। इसके अतिरिक्त, ड्राफ्ट में यह भी साफ किया गया है कि डेटा को सुरक्षित रखने के नियम अन्य लागू कानूनों के साथ प्रभावी बने रहेंगे।
सरकार ने नियम 14 को और अधिक शक्तिशाली बनाने का भी प्रस्ताव रखा है, जिसके तहत अंतर-विभागीय समिति की शक्तियों का विस्तार किया जाएगा। इस समिति को अब न केवल प्राप्त शिकायतों पर कार्रवाई करने का अधिकार होगा, बल्कि वह उन मामलों की भी समीक्षा कर सकेगी जिन्हें मंत्रालय स्वयं जांच के लिए भेजेगा। इस बदलाव से डिजिटल सामग्री के नियमन और निगरानी में कार्यपालिका की भूमिका पहले से कहीं अधिक प्रभावशाली हो जाएगी।


