एजेंसी, नागपुर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने कहा है कि वर्तमान युग में सोशल मीडिया का प्रभाव बहुत अधिक है, इसलिए संघ को भी एक नेक मकसद के साथ इन आधुनिक मंचों पर अपनी सक्रियता बढ़ानी चाहिए। नागपुर में मराठी समाचार पत्र ‘तरुण भारत’ के सौ साल पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए भागवत ने कहा कि समाज में बदलाव लाने के लिए इन माध्यमों का सकारात्मक उपयोग समय की मांग है।
उन्होंने अपने संबोधन में विशेष रूप से रील और मीम जैसे डिजिटल माध्यमों का जिक्र करते हुए कहा कि ये चीजें आज के दौर में काफी चलन में हैं। संघ प्रमुख ने जानकारी दी कि आरएसएस का संचार विभाग पहले से ही सोशल मीडिया पर सामग्री साझा कर रहा है और स्वयंसेवक भी व्यक्तिगत स्तर पर इन मंचों का उपयोग कर रहे हैं। हालांकि, उन्होंने जोर देकर कहा कि इस प्रभाव को और अधिक व्यापक बनाने की जरूरत है ताकि संघ के विचारों और रचनात्मक कार्यों को समाज के हर वर्ग तक पहुंचाया जा सके। उनके अनुसार, जब एक समर्पित स्वयंसेवक तैयार होता है, तो उसके कार्यों से ही समाज में वांछित परिवर्तन आता है।
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मोहन भागवत ने संघ के विस्तार पर चर्चा करते हुए कहा कि जैसे-जैसे संगठन का काम बढ़ रहा है, इसके विकेंद्रीकरण की आवश्यकता भी महसूस की जा रही है। जनता की बढ़ती उम्मीदों और अलग-अलग क्षेत्रों में स्वयंसेवकों की मांग को देखते हुए अब छोटी और अधिक कुशल इकाइयों पर ध्यान दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि बेहतर कार्यक्षमता के लिए संगठन के ढांचे में बदलाव जरूरी है ताकि जमीनी स्तर पर काम और प्रभावी तरीके से हो सके।
आरएसएस प्रमुख ने यह भी स्पष्ट किया कि संगठन के बढ़ते दायरे के साथ सरकार और प्रशासन के साथ निरंतर संवाद बनाए रखना आवश्यक है। इसके लिए एक विशेष समन्वय तंत्र विकसित किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि सरकारी कामकाज में आने वाली बाधाओं को दूर करने और बेहतर तालमेल बिठाने के लिए ‘प्रदेश स्तर’ पर विशेष इकाइयां गठित की जा रही हैं। इस पहल का उद्देश्य समाज सेवा के कार्यों को और अधिक गति देना और प्रशासनिक स्तर पर आने वाली चुनौतियों का समाधान निकालना है।


