एजेंसी, काबुल। अफगानिस्तान में कुदरत का कहर, बरसी आफत ने भारी तबाही मचाई है। देश के विभिन्न हिस्सों में मूसलाधार बारिश के बाद आई अचानक बाढ़ के कारण अब तक 77 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि 137 लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। पहाड़ी और संवेदनशील इलाकों में कुदरत के इस बदले मिजाज ने जनजीवन को पूरी तरह तहस-नहस कर दिया है, जिससे बड़े पैमाने पर जान-माल का नुकसान हुआ है।
रिहायशी इलाकों में घुसा नदियों का पानी
लगातार हो रही भारी बारिश की वजह से नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। उफनती नदियों का पानी तेज रफ्तार के साथ गांवों और रिहायशी बस्तियों में घुस गया है। इस आपदा में कई घर पूरी तरह जमींदोज हो गए हैं, जबकि सड़कों और पुलों जैसे बुनियादी ढांचे को भी भारी क्षति पहुंची है। स्थानीय प्रशासन के अनुसार, ग्रामीण और दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों में तबाही का मंजर सबसे भयानक है, जहां संचार व्यवस्था ठप होने से हालात और बिगड़ गए हैं।
संभलने का मौका मिले बिना बह गए घर और मवेशी
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, कई स्थानों पर बाढ़ इतनी अचानक और तेज आई कि लोगों को अपना सामान समेटने या सुरक्षित स्थान पर जाने तक का समय नहीं मिला। सैलाब अपने साथ उपजाऊ खेत, बेजुबान मवेशी और पक्के मकानों को बहा ले गया। कई परिवारों ने अपनी आंखों के सामने अपनों को खो दिया, जिससे पूरे प्रभावित इलाके में मातम और दहशत का माहौल बना हुआ है।
राहत और बचाव कार्य में टूटी सड़कें बनीं बाधा
आपदा की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन और बचाव दलों ने राहत अभियान तेज कर दिया है। प्रभावित लोगों को निकालकर सुरक्षित कैंपों में पहुंचाया जा रहा है और घायलों को नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। हालांकि, कई प्रमुख रास्तों और पुलों के टूट जाने के कारण दूरदराज के इलाकों तक मदद पहुंचाना बचाव दल के लिए एक बड़ी चुनौती साबित हो रहा है।
अगले कुछ दिनों के लिए मौसम विभाग का अलर्ट
मौसम वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि आने वाले कुछ दिनों तक बारिश का सिलसिला थमने वाला नहीं है। रुक-रुक कर हो रही बारिश से बाढ़ का खतरा अभी टला नहीं है, जिससे हालात और भी गंभीर हो सकते हैं। प्रशासन ने ऊंचे और खतरनाक स्थानों पर रह रहे लोगों से तुरंत सुरक्षित जगहों पर जाने की अपील की है। अफगानिस्तान में कमजोर आपदा प्रबंधन और संसाधनों की कमी के कारण ऐसी प्राकृतिक आपदाएं हर साल भारी मानवीय संकट पैदा करती हैं।
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