एजेंसी, पोखरण। Vayu Astra 1 : भारत ने रक्षा तकनीक और सैन्य क्षेत्र में अपनी आत्मनिर्भरता की ओर कदम बढ़ाते हुए एक और बेहद ऐतिहासिक कामयाबी हासिल कर ली है। देश की जानी-मानी पुणे स्थित कंपनी नाइब लिमिटेड ने पूरी तरह से स्वदेशी तकनीक पर आधारित अपने अत्याधुनिक लोइटरिंग म्यूनिशन यानी ‘वायु अस्त्र-1’ नामक घातक ड्रोन का तकनीकी परीक्षण सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। कंपनी द्वारा दी गई आधिकारिक और विस्तृत जानकारी के मुताबिक, इस खतरनाक आत्मघाती ड्रोन को विशेष रूप से भारतीय सेना की आधुनिक और भविष्य की युद्ध आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर ही तैयार किया गया है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस स्वदेशी तकनीक के आने से भारत की सुरक्षा व्यवस्था और मारक क्षमता में कई गुना इजाफा होने वाला है, जिससे सीमा पार बैठे दुश्मनों की नींद उड़ना तय है।
VIDEO | Jaisalmer: Successful test of indigenous Vayu Astra-1 conducted at Pokhran range.
(Source: Third Party)#Jaisalmer pic.twitter.com/751eJV4dth
— Press Trust of India (@PTI_News) May 21, 2026
आसमान में दुश्मन को ढूंढकर सटीक हमला करने में सक्षम
यह आधुनिक स्वदेशी ड्रोन जिसे आम बोलचाल की भाषा में ‘घूमने वाली मिसाइल’ भी कहा जा सकता है, जंग के मैदान में 100 किलोमीटर से भी अधिक की दूरी तक जाकर पूरी सटीकता के साथ अपने लक्ष्य को भेदने की अद्भुत क्षमता रखता है। इस आत्मघाती ड्रोन की सबसे बड़ी ताकत यह है कि यह करीब 10 किलोग्राम वजनी भारी वॉरहेड यानी विस्फोटक सामग्री के साथ एंटी-पर्सनल और एंटी-आर्मर (टैंक रोधी) हमले करने में सक्षम है। यह आधुनिक युद्ध के मैदान में दुश्मन के ठिकानों के ऊपर काफी देर तक हवा में तैरकर नजर रख सकता है और मौका मिलते ही एक झटके में हमला कर देता है। इसके भारतीय सेना में शामिल होने के बाद से सरहद के पास मौजूद पड़ोसी मुल्क के कई बड़े और रणनीतिक शहर इसकी सीधी जद और मारक रेंज के भीतर आ जाएंगे।
राजस्थान के पोखरण में दिखा हवा में लक्ष्य बदलने का जलवा
इस बहुप्रतीक्षित घातक ड्रोन के तकनीकी परीक्षण दो अलग-अलग चरणों में बेहद सावधानी के साथ अप्रैल 2026 के महीने में आयोजित किए गए थे। परीक्षण का पहला चरण आगामी 18 और 19 अप्रैल को राजस्थान के प्रसिद्ध पोखरण फायरिंग रेंज के रेतीले इलाके में संपन्न हुआ। इस चरण में ड्रोन की एंटी-पर्सनल स्ट्राइक क्षमता को परखा गया, जहां 10 किलो विस्फोटक से लैस इस ड्रोन ने 100 किलोमीटर दूर तय किए गए लक्ष्य को एक मीटर से भी कम की दूरी (सीईपी) की बेजोड़ सटीकता के साथ पूरी तरह तबाह कर दिया। इस बेहद कड़े परीक्षण के दौरान ड्रोन की एक और क्रांतिकारी क्षमता का प्रदर्शन किया गया, जिसमें ड्रोन को हमला करने के दौरान बीच में ही रोकने (एबॉर्ट) और फिर से कमांड देकर नया हमला शुरू करने (री-अटैक) की तकनीक को सफलतापूर्वक आजमाया गया।
उत्तराखंड के जोशीमठ में 14 हजार फीट की बर्फीली ऊंचाई पर भरी उड़ान
पोखरण के सफल परीक्षण के तुरंत बाद इसका दूसरा चरण आगामी 26 और 27 अप्रैल को देवभूमि उत्तराखंड के बेहद दुर्गम और पहाड़ी जोशीमठ (मलारी) क्षेत्र में आयोजित किया गया। यहां बेहद बर्फीले, कम ऑक्सीजन वाले और ऊंचे पहाड़ी इलाके की कठिन चुनौतियों के बीच ‘वायु अस्त्र-1’ ने 14,000 फीट से भी ज्यादा की अत्यधिक ऊंचाई पर 90 मिनट से अधिक समय तक बिना किसी रुकावट के लगातार उड़ान भरकर अपनी ताकत का लोहा मनवाया। इस चुनौतीपूर्ण मिशन के सफलतापूर्वक पूरा होने के बाद ड्रोन को बिना किसी नुकसान के सुरक्षित तरीके से वापस रिकवर भी कर लिया गया, जिससे इस तकनीक को अगले किसी नए सैन्य मिशन के लिए बहुत ही आसानी से दोबारा इस्तेमाल में लाया जा सकेगा।
इंफ्रारेड कैमरे की मदद से रात के घने अंधेरे में भी मचेगी तबाही
इस स्वदेशी ड्रोन की तकनीकी खूबियां यहीं खत्म नहीं होतीं, इसमें अत्याधुनिक इंफ्रारेड कैमरे और थर्मल विजन सिस्टम लगाए गए हैं, जो इसे रात के घने से घने अंधेरे में भी दुश्मन के छिपकर बैठे टैंकों और बख्तरबंद गाड़ियों को ढूंढकर उन पर अचूक एंटी-टैंक हमला करने की पूरी आजादी देते हैं। इसके सफल प्रदर्शन के दौरान कंपनी ने 70 किलोमीटर की लंबी दूरी से अपनेग्राउंड कंट्रोल स्टेशन से फॉरवर्ड कंट्रोल यूनिट को पूरी कमान आसानी से ट्रांसफर करने की क्षमता का भी बेहतरीन प्रदर्शन किया। इसका फायदा यह होगा कि युद्ध के मैदान में पल-पल बदलती परिस्थितियों के अनुसार कमांडर बेहद आसानी से दूर बैठे ही ड्रोन का रास्ता और उसका टारगेट बदल सकते हैं। नाइब लिमिटेड ने भारतीय सेना के सामने यह पूरा प्रदर्शन ‘नो कॉस्ट, नो कमिटमेंट’ (एनसीएनसी) यानी बिना किसी अग्रिम शुल्क और शर्त के मोड के तहत किया था।
आत्मनिर्भर भारत और स्वदेशी रक्षा नीति के लिए एक ऐतिहासिक मील का पत्थर
सैन्य और रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक, आधुनिक युद्धों की रणनीति में इस प्रकार के लोइटरिंग म्यूनिशन बहुत ही निर्णायक और बड़ी भूमिका निभाते हैं। यह पूरी सफलता भारत की आत्मनिर्भर रक्षा नीति को एक नई और मजबूत दिशा देने वाली साबित होगी। ‘वायु अस्त्र-1’ पूरी तरह से भारतीय इंजीनियरों और स्वदेशी तकनीक पर आधारित है, जिससे अब भारतीय थल सेना को लंबी दूरी के हमलों के लिए विदेशों से महंगे ड्रोन आयात करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। चाहे सीमा पर अचानक पैदा होने वाला तनाव हो या फिर देश के भीतर आतंकवाद विरोधी कोई बड़ा और गुप्त सैन्य अभियान, यह स्वदेशी ड्रोन हर प्रकार की कठिन चुनौतियों का सामना करने के लिए पूरी तरह से तैयार है। इस ऐतिहासिक परीक्षण की भारी सफलता की खबर आते ही शेयर बाजार में कंपनी के शेयरों में भी भारी उछाल देखने को मिला है और अब देश को उम्मीद है कि जल्द ही इसका बड़े पैमाने पर उत्पादन शुरू कर इसे सेना में आधिकारिक तौर पर शामिल कर लिया जाएगा।
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