एजेंसी, भोपाल। MP Weather Update : मध्य प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में सूर्य देव की तपिश और किरणों का प्रभाव इस सीमा तक बढ़ गया है कि सुबह के नौ बजते ही चमचमाती मुख्य सड़कों, व्यस्त बाजारों और चौराहों पर पूरी तरह सन्नाटा पसरने लगा है। रास्तों पर चलने वाले राहगीरों को सुबह के समय ही ऐसा अहसास होने लगता है जैसे दोपहर के दो या तीन बज रहे हों। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के स्थानीय केंद्र ने इस बेहद गंभीर और चिंताजनक स्थिति को देखते हुए राज्य के कई बड़े हिस्सों में पारे के छियालीस डिग्री सेल्सियस के पार चले जाने की बेहद गंभीर चेतावनी जारी की है। इस अप्रत्याशित और जानलेवा गर्मी से सामान्य जनता को बचाने के लिए प्रशासन की तरफ से लाल, नारंगी और पीले रंग के अलर्ट जारी किए गए हैं ताकि समय रहते सभी नागरिक अपनी सुरक्षा के पुख्ता और जरूरी इंतजाम कर सकें। मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि आने वाले दस दिनों का यह बेहद कठिन समय प्रदेशवासियों की सेहत पर बहुत भारी पड़ने वाला है।
HEAT WAVE WARNING | 22 MAY 2026 🌡️
🔴 Red Warning: East Uttar Pradesh, East Madhya Pradesh, Vidarbha & Coastal Andhra Pradesh
🟠 Orange Warning: Punjab, Haryana, West Uttar Pradesh, West Madhya Pradesh, Chhattisgarh, Odisha & Telangana💧 Stay hydrated
🧢 Avoid direct sun… pic.twitter.com/R6VtbD61UY— India Meteorological Department (@Indiametdept) May 22, 2026
मध्य प्रदेश के चार प्रमुख जिलों में अत्यधिक खतरे का सूचक लाल अलर्ट घोषित
मौसम विज्ञान विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों और शोधकर्ताओं द्वारा साझा की गई तकनीकी जानकारी के अनुसार, प्रदेश के चार विशेष जिलों निवाड़ी, छतरपुर, पन्ना और सतना में गर्मी ने अपने पिछले कई दशकों के सारे रिकॉर्ड पूरी तरह ध्वस्त कर दिए हैं। इन विशिष्ट क्षेत्रों के लिए तीव्र लू का सबसे खतरनाक यानी लाल अलर्ट घोषित किया गया है। इन इलाकों में रहने वाले नागरिकों और विशेषकर कामकाजी लोगों को यह सख्त हिदायत दी गई है कि वे केवल और केवल किसी बेहद अनिवार्य या आपातकालीन कार्य के होने पर ही अपने घरों की चौखट से बाहर कदम रखें। इस समय चलने वाली झुलसा देने वाली धूप और गर्म हवाएं मानव शरीर की त्वचा और आंतरिक तंत्र को बहुत ही गंभीर रूप से नुकसान पहुंचा सकती हैं, इसलिए अतिरिक्त सावधानी बरतनी अत्यंत आवश्यक है।
इक्कीस महत्वपूर्ण जिलों में शासन द्वारा सतर्क रहने और तैयारी रखने का नारंगी अलर्ट
इसके अतिरिक्त, राज्य के एक बहुत बड़े भौगोलिक हिस्से को नारंगी अलर्ट की श्रेणी में रखा गया है। इस सूची में ग्वालियर, भिंड, मुरैना, श्योपुर, दतिया, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, आगर-मालवा, राजगढ़, विदिशा, सागर, दमोह, कटनी और मैहर जैसे बड़े और घनी आबादी वाले शहर शामिल हैं। शासन द्वारा जारी निर्देशों के मुताबिक उमरिया, शहडोल, रीवा, मऊगंज, सीधी और सिंगरौली में भी तीव्र गर्म हवाओं का यह दौर लगातार जारी रहेगा। इस अलर्ट का सीधा और साफ मतलब यह है कि इन क्षेत्रों के निवासियों को आने वाले समय में मौसम के और अधिक बिगड़ने की आशंका को देखते हुए मानसिक और शारीरिक रूप से अपनी सुरक्षा की पूरी तैयारी पहले से ही कर लेनी चाहिए ताकि किसी भी प्रकार की जनहानि को समय रहते रोका जा सके।
राजधानी सहित बीस अन्य जिलों में सामान्य से अधिक तापमान का पीला अलर्ट
प्रदेश की प्रशासनिक राजधानी भोपाल सहित राज्य के बीस अन्य जिलों जैसे बालाघाट, नीमच, मंदसौर, सीहोर, रतलाम, उज्जैन, खरगोन, खंडवा, बुरहानपुर, शाजापुर, रायसेन, पांढुर्णा, छिंदवाड़ा, नरसिंहपुर, जबलपुर, सिवनी, मंडला, डिंडौरी और अनूपपुर में पीले रंग का अलर्ट घोषित किया गया है। इन सभी चिन्हित स्थानों पर आगामी दिनों में तापमान औसतन तैंतालीस से पैंतालीस डिग्री सेल्सियस के आसपास बने रहने का अनुमान लगाया गया है। यह तापमान भी सामान्य मानवीय गतिविधियों को ठप करने के लिए पर्याप्त माना जाता है। हालांकि इंदौर, देवास, धार, झाबुआ, आलीराजपुर और नर्मदापुरम जैसे कुछ पश्चिमी इलाकों में सीधी लू चलने की आधिकारिक आशंका तो नहीं जताई गई है, परंतु वहां भी हवा में नमी की अत्यधिक मात्रा के कारण भयंकर उमस और भारी बेचैनी से लोग दिन-रात बेहाल रहेंगे।
शरीर को झुलसाने वाली इस मौसमी बीमारी के मुख्य लक्षण और उसकी पहचान
चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, जब बाहरी वातावरण का तापमान हमारे मानव शरीर के आंतरिक तापमान की तुलना में बहुत अधिक बढ़ जाता है, तो शरीर का अपना प्राकृतिक शीतलन तंत्र काम करना बंद कर देता है और इसी खतरनाक स्थिति को आम बोलचाल में लू लगना कहा जाता है। इसके मुख्य और प्रारंभिक लक्षणों में अचानक से तेज सिरदर्द होना, चक्कर आना, आंखों के सामने अचानक से घने अंधेरे का छा जाना, त्वचा का पूरी तरह से सूखा, लाल और गर्म हो जाना, भयंकर शारीरिक कमजोरी महसूस होना और कभी-कभी अचानक तेज बुखार आना शामिल है। यदि इन लक्षणों को समय रहते न पहचाना जाए और पीड़ित का इलाज न किया जाए, तो यह इंसान के लिए जानलेवा भी साबित हो सकता है। विशेषकर छोटे बच्चों, नवजातों और बुजुर्गों को इसका खतरा सबसे ज्यादा रहता है।
भीषण गर्मी के इस दौर में खान-पान और दिनचर्या में बदलाव के कुछ जरूरी नियम
इस जानलेवा और कष्टदायक दौर से खुद को और अपने पूरे परिवार को सुरक्षित रखने का सबसे पहला और बुनियादी नियम यह है कि शरीर में पानी की कुल मात्रा को कभी कम न होने दिया जाए। इसके लिए जरूरी नहीं कि केवल सादा पानी ही बार-बार पिया जाए, बल्कि प्रकृति द्वारा इस मौसम में दिए गए बेहतरीन उपहारों जैसे ताजी मथकर बनाई गई छाछ, नींबू का शिकंजी पानी, नारियल का प्राकृतिक पानी और कच्चे आम से बने पन्ने का नियमित अंतराल पर सेवन करना चाहिए। इसके साथ ही इस बात का विशेष ध्यान रखें कि दोपहर के बारह बजे से लेकर शाम के चार बजे तक बहुत आवश्यक न हो तो यात्रा करने से पूरी तरह परहेज करें और भोजन में ज्यादा तेल, मिर्च तथा गरम मसालों से बने भारी भोजन की जगह बेहद हल्के और सुपाच्य आहार को ही अपनी थाली में प्राथमिकता दें।
घर से बाहर कदम रखते समय अपनाए जाने वाले कुछ बेहद व्यावहारिक सुरक्षा उपाय
यदि किसी अनिवार्य और टाले न जा सकने वाले कार्यवश आपको इस तपती धूप में बाहर जाना ही पड़ता है, तो हमेशा अपने साथ एक बड़ा और गहरे रंग का छाता या सिर को पूरी तरह ढकने वाली टोपी जरूर रखें। इसके अलावा हमारे देश में पारंपरिक रूप से इस्तेमाल होने वाले सूती गमछे या स्कार्फ से अपने चेहरे और कानों को अच्छी तरह लपेट लें ताकि गर्म हवा सीधे शरीर में प्रवेश न कर सके। शरीर पर हमेशा ढीले-ढाले और हल्के रंग के सूती वस्त्र ही धारण करें ताकि हवा का आवागमन बना रहे और धूप का सीधा कुप्रभाव आपकी कोमल त्वचा पर न पड़े। अपने झोले में पानी की एक शीतल बोतल और जीवन रक्षक घोल ओआरएस का पैकेट हमेशा साथ रखें ताकि अचानक तबीयत बिगड़ने, जी मिचलाने या चक्कर आने पर इसका तुरंत घोल बनाकर पिया जा सके और किसी भी अप्रिय हादसे से बचा जा सके।
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