बबीता पांडे

उत्तरकाशी में ट्रैकिंग के दौरान नैनीताल की एमबीए छात्रा पांच दिन से लापता, सेना-पुलिस और वन विभाग का साझा सर्च ऑपरेशन जारी

उत्तराखंड देश/प्रदेश राष्ट्रीय

एजेंसी, उत्तरकाशी। Uttarkashi Trekking Girl Missing : उत्तराखंड के प्रसिद्ध और बेहद दुर्गम पहाड़ी रास्तों पर ट्रैकिंग के रोमांचक सफर पर निकली एक होनहार युवती पिछले पांच दिनों से अत्यंत रहस्यमयी परिस्थितियों में लापता हो गई है। नैनीताल जिले की रहने वाली इस युवती का नाम बबीता पांडे बताया जा रहा है, जो अपने दोस्तों के साथ इस पहाड़ी क्षेत्र में घूमने और ट्रैकिंग का आनंद लेने आई थी। घटना की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने तुरंत हरकत में आते हुए देश की सेना, स्थानीय पुलिस बल और वन विभाग की एक बेहद शक्तिशाली संयुक्त खोजी टीम का गठन किया है, जो लगातार घने जंगलों और गहरी खाइयों में बड़े पैमाने पर तलाशी अभियान चला रही है। इस बचाव अभियान में आधुनिक ड्रोन कैमरों की भी मदद ली जा रही है, जिसके माध्यम से दयारा बुग्याल ट्रैक के सबसे खतरनाक और दुर्गम हिस्सों की हवाई निगरानी की जा चुका है, लेकिन बेहद अफसोस की बात है कि अब तक लापता युवती का कोई भी सुराग या जानकारी सुरक्षा एजेंसियों के हाथ नहीं लग पाई है।

दोस्तों के साथ गढ़वाल के पहाड़ी क्षेत्रों की सैर पर निकली थी बबीता

लापता युवती बबीता पांडे के सगे भाई हर्षित पांडे ने इस पूरे मामले की कड़ियों को जोड़ते हुए बताया कि उनकी बहन अपने दो बेहद करीबी मित्रों, हरमनपाल और हरमनप्रीत के साथ उत्तराखंड के खूबसूरत गढ़वाल मंडल के विभिन्न पर्यटन स्थलों को करीब से देखने और घूमने के उद्देश्य से घर से निकली थी। अपनी इस यात्रा के शुरुआती चरण में इन तीनों मित्रों ने सबसे पहले उत्तरकाशी जिले के बेहद खूबसूरत और ठंडे इलाके हर्षिल की वादियों का दीदार किया था। हर्षिल की यात्रा को सफलतापूर्वक संपन्न करने के बाद इन तीनों दोस्तों का अगला पड़ाव प्रसिद्ध दयारा बुग्याल क्षेत्र में ट्रैकिंग करना था। इसी योजना के तहत तीनों दोस्त आवश्यक साजो-सामान के साथ चढ़ाई पर आगे बढ़ रहे थे, तभी रास्ते में रात होने के कारण उन्हें रुकना पड़ा।

गोई नामक पहाड़ी स्थान पर तंबू गाड़कर रुके थे सभी दोस्त

प्राप्त मीडिया सूचनाओं और जांच अधिकारियों से मिली जानकारियों के अनुसार, अपनी कठिन चढ़ाई के दौरान आगामी 29 मई की रात को यह तीनों सहयात्री रास्ते में पड़ने वाले ‘गोई’ नामक एक बेहद शांत और एकांत पहाड़ी स्थान पर पहुंचे थे। रात के अंधेरे और अत्यधिक ठंड से बचने के लिए उन्होंने वहीं पर अपना अस्थाई तंबू (टेंट) गाड़ा और रात बिताने का फैसला किया। सभी दोस्त रात का भोजन करने के बाद एक साथ सो गए थे। बबीता के साथ गए दोनों दोस्तों ने बाद में पुलिस और पीड़ित परिजनों को दिए अपने आधिकारिक बयानों में बताया कि अगली सुबह यानी 30 मई की भोर में करीब चार बजे जब उन दोनों की आंख खुली, तो उन्होंने देखा कि बबीता तंबू के भीतर मौजूद नहीं थी।

सुबह से ही बंद आ रहा है लापता छात्रा का मोबाइल फोन

तंबू में बबीता को न पाकर दोनों दोस्त अचानक घबरा गए और उन्होंने तुरंत आसपास उसकी खोजबीन शुरू कर दी। जब पहाड़ों पर कहीं भी उसका पता नहीं चला, तो उन्होंने बबीता के व्यक्तिगत मोबाइल नंबर पर संपर्क करने का प्रयास किया। लेकिन, उस समय से ही बबीता का मोबाइल फोन लगातार पूरी तरह से बंद (स्विच ऑफ) आ रहा है, जिसके कारण उनसे संपर्क करना बिल्कुल नामुमकिन हो गया। इस रहस्यमयी गुमशुदगी के बाद बबीता के भाई हर्षित ने अपनी बहन के दोनों दोस्तों पर सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। भाई का स्पष्ट तौर पर कहना है कि चूंकि उसकी बहन उन दोनों मित्रों के भरोसे और उनके साथ ही इस सुनसान इलाके में आई थी, इसलिए उसकी सुरक्षा और भलाई की पूरी नैतिक और कानूनी जिम्मेदारी उन्हीं दोनों दोस्तों की बनती है।

दिल्ली से उच्च शिक्षा ग्रहण कर रही थी होनहार बेटी

लापता बबिता पांडे मूल रूप से उत्तराखंड के नैनीताल जिले के अंतर्गत आने वाले रामनगर क्षेत्र के चिल्किया गांव की स्थाई निवासी है। वह अपने मध्यमवर्गीय परिवार की सबसे बड़ी संतान है और अपने दो सगे भाइयों, हर्षित और तनुज की इकलौती और बेहद लाडली बहन है। बबीता बेहद होनहार है और देश की राजधानी दिल्ली में रहकर व्यवसाय प्रबंधन में स्नातकोत्तर (एमबीए) की उच्च शिक्षा ग्रहण कर रही है। अपनी पढ़ाई के भारी खर्च को खुद उठाने के लिए वह शिक्षा के साथ-साथ एक निजी संस्थान में अंशकालिक (पार्ट-टाइम) नौकरी भी कर रही थी। बबीता के दोनों भाई रामनगर के स्थानीय क्षेत्र में पर्यटन व्यवसाय से जुड़े काम करते हैं।

उत्तरकाशी में डेरा डाले हुए हैं परिजन, घर पर पिता और दादी बेहद परेशान

इस दर्दनाक हादसे की खबर जैसे ही रामनगर में रहने वाले बबीता के परिवार को मिली, पूरे घर में कोहराम मच गया। अपनी इकलौती बेटी की सलामती की दुआ मांगते हुए बबीता की बूढ़ी मां और उनका बड़ा भाई हर्षित तुरंत उत्तरकाशी के लिए रवाना हो गए और पिछले कई दिनों से वहीं कैंप करके पुलिस और सेना के साथ खोजबीन में जुटे हुए हैं। वहीं दूसरी तरफ, रामनगर स्थित उनके गृह आवास पर बबीता के छोटे भाई तनुज, बुजुर्ग दादी और उनके दिव्यांग पिता घर पर मौजूद हैं, जिनका अपनी बेटी के लापता होने की खबर सुनकर रो-रोकर बुरा हाल है और वे लगातार भगवान से अपनी बेटी की सुरक्षित वापसी की मन्नतें मांग रहे हैं। स्थानीय पुलिस प्रशासन ने दोनों दोस्तों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है ताकि घटना के पीछे की असली सच्चाई का पता लगाया जा सके।

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