एजेंसी, वॉशिंगटन/नई दिल्ली। US Removes Ban On 4 Indian Companies : भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते को लेकर बातचीत महत्वपूर्ण चरण में पहुंचती दिखाई दे रही है। इसी बीच अमेरिकी प्रशासन ने एक ऐसा निर्णय लिया है जिसे दोनों देशों के आर्थिक संबंधों के संदर्भ में अहम माना जा रहा है। अमेरिका के वित्त विभाग ने भारत की 4 कंपनियों को अपनी विशेष प्रतिबंध सूची से बाहर कर दिया है। यह फैसला ऐसे समय आया है जब दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश और शुल्क संबंधी मुद्दों पर लगातार संवाद जारी है।
US has lifted sanctions on four Indian companies. 3 of them are in precision manufacturing while the fourth one is in aviation services.
They were sanctioned over allegation of supplying advanced technology and equipment to Russian defence industry.https://t.co/0NEQinaFTa
— OpIndia.com (@OpIndia_com) July 1, 2026
किन भारतीय कंपनियों को मिली राहत
अमेरिकी प्रशासन द्वारा जिन भारतीय कंपनियों को प्रतिबंध सूची से हटाया गया है उनमें हैदराबाद स्थित आरआरजी इंजीनियरिंग टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड, लोकेश मशीन्स लिमिटेड, अहमदाबाद की गैलेक्सी बेयरिंग्स लिमिटेड और नई दिल्ली स्थित शौर्य एरोनॉटिक्स प्राइवेट लिमिटेड शामिल हैं। अमेरिकी वित्त विभाग के विदेशी परिसंपत्ति नियंत्रण कार्यालय ने अपने नवीनतम अद्यतन में इन संस्थाओं को सूची से हटाने की जानकारी दी।
प्रतिबंध सूची से बाहर होने का क्या अर्थ होता है
अमेरिका की विशेष रूप से नामित नागरिक और प्रतिबंधित व्यक्तियों की सूची में शामिल संस्थाओं और व्यक्तियों पर कठोर वित्तीय और कारोबारी सीमाएं लागू होती हैं। इस सूची में नाम आने पर अमेरिकी अधिकार क्षेत्र के भीतर मौजूद परिसंपत्तियां प्रभावित हो सकती हैं और वित्तीय लेनदेन पर भी प्रतिबंध लागू हो सकते हैं। सूची से बाहर होने का अर्थ यह है कि संबंधित कंपनियां अब उन विशेष प्रतिबंधों के दायरे में नहीं रहेंगी जो पहले लागू थे।
2024 में लगाया गया था प्रतिबंध
यह निर्णय लगभग 2 वर्ष बाद सामने आया है। वर्ष 2024 में अमेरिकी प्रशासन ने रूस से जुड़े प्रतिबंध ढांचे के अंतर्गत भारत की कई संस्थाओं और व्यक्तियों पर कार्रवाई की थी। उस समय कुल 21 भारतीय इकाइयों को निशाने पर लिया गया था, जिनमें कंपनियां और व्यक्ति दोनों शामिल थे। अमेरिकी पक्ष का आरोप था कि कुछ संस्थाएं ऐसे कारोबारी नेटवर्क से जुड़ी थीं जो रूस से संबंधित प्रतिबंधों के प्रभाव को सीमित करने में भूमिका निभा रहे थे।
रूस-यूक्रेन संघर्ष के बाद बदला था वैश्विक प्रतिबंध ढांचा
वर्ष 2022 में रूस-यूक्रेन संघर्ष शुरू होने के बाद अमेरिका और उसके सहयोगी देशों ने रूस पर कई आर्थिक और व्यापारिक प्रतिबंध लागू किए थे। इसके बाद उन विदेशी कंपनियों पर भी निगरानी बढ़ाई गई जिन पर रूस से जुड़े औद्योगिक या तकनीकी लेनदेन में शामिल होने के आरोप लगे। इसी व्यापक रणनीति के तहत भारतीय कंपनियों पर भी कार्रवाई की गई थी।
जिन आरोपों के आधार पर हुई थी कार्रवाई
पूर्व कार्रवाई के दौरान कुछ कंपनियों पर रूस से जुड़े औद्योगिक क्षेत्रों को तकनीकी उपकरण, मशीनरी, सूक्ष्म इलेक्ट्रॉनिक सामग्री और अन्य उपयोगी वस्तुओं की आपूर्ति के आरोप लगाए गए थे। कुछ संस्थाओं पर उन्नत औद्योगिक उपकरणों और विमानन संबंधी सामग्री के निर्यात को लेकर भी सवाल उठाए गए थे। हालांकि अब अमेरिकी प्रशासन ने इन 4 भारतीय कंपनियों को सूची से हटाने का फैसला किया है, लेकिन सार्वजनिक रूप से हटाने के कारणों का विस्तृत विवरण जारी नहीं किया गया है।
व्यापार समझौते की पृष्ठभूमि में फैसले के मायने
यह फैसला ऐसे समय सामने आया है जब भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक संबंधों को और मजबूत करने को लेकर चर्चा चल रही है। दोनों देश लंबे समय से निवेश, शुल्क व्यवस्था, आपूर्ति शृंखला सहयोग और आर्थिक साझेदारी के कई मुद्दों पर बातचीत कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे फैसले भविष्य की कारोबारी बातचीत के माहौल को प्रभावित कर सकते हैं, हालांकि आधिकारिक तौर पर इस निर्णय को व्यापार वार्ता से जोड़कर नहीं देखा गया है।
भारतीय उद्योग और वैश्विक निवेशकों की नजर आगे की दिशा पर
प्रतिबंध सूची से हटाई गई कंपनियों में कुछ सार्वजनिक रूप से सूचीबद्ध कंपनियां भी शामिल हैं, इसलिए इस फैसले पर उद्योग जगत और निवेशकों की भी नजर बनी हुई है। आने वाले समय में यह देखा जाएगा कि इस निर्णय का इन कंपनियों के कारोबारी विस्तार, वैश्विक साझेदारियों और अंतरराष्ट्रीय लेनदेन पर किस तरह का असर पड़ता है। साथ ही भारत-अमेरिका आर्थिक संबंधों के अगले चरण को लेकर भी इस फैसले को महत्वपूर्ण संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
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