Asaram Bapu

नाबालिग से दुष्कर्म मामले में आसाराम को सुप्रीम कोर्ट से लगा करारा झटका : अदालत ने कहा- सेहत बेहद नाजुक होने पर ही मिलेगी जमानत

नई दिल्ली राष्ट्रीय

एजेंसी, नई दिल्ली। Asaram Bapu Supreme Court : नाबालिग लड़की के साथ दुष्कर्म के गंभीर मामले में जेल की सजा काट रहे विवादित कथावाचक आसाराम को देश की सर्वोच्च अदालत से एक बार फिर बहुत बड़ा झटका लगा है। मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने आसाराम की उस विशेष याचिका पर सुनवाई करते हुए राजस्थान सरकार से कड़ा जवाब तलब किया है, जिसमें आसाराम ने राजस्थान हाईकोर्ट के पिछले फैसले को चुनौती दी थी। गौरतलब है कि हाईकोर्ट ने वर्ष 2013 के एक नाबालिग लड़की से जुड़े यौन उत्पीड़न मामले में आसाराम की दोषसिद्धि और उन्हें मिली उम्रकैद की सजा को पूरी तरह बरकरार रखा था। सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल आसाराम की जेल की सजा को निलंबित करने या उन्हें अंतरिम राहत देने से साफ इनकार कर दिया है।

सुप्रीम कोर्ट की खंडपीठ ने राजस्थान सरकार को जारी किया नोटिस

सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस शील नागू की दो सदस्यीय विशेष खंडपीठ ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए सुनवाई की। बेंच ने आसाराम की याचिका पर राजस्थान राज्य सरकार को एक औपचारिक नोटिस जारी किया है और दो सप्ताह के भीतर इस पूरे मामले पर अपना विस्तृत जवाब दाखिल करने का सख्त निर्देश दिया है। अदालत इस मामले में राज्य सरकार का पक्ष जानने के बाद ही आगे की कोई कार्रवाई तय करेगी, तब तक आसाराम को जेल में ही रहना होगा।

गंभीर चिकित्सीय आपातकाल जैसी स्थिति में ही जमानत पर होगा विचार

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने जेल प्रशासन को मानवीय आधार पर आसाराम को जेल के भीतर ही सभी उचित और आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। हालांकि, कोर्ट ने जमानत के प्रावधानों को लेकर अपनी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट कर दी। पीठ ने मौखिक रूप से टिप्पणी करते हुए कहा कि हम इस चरण पर याचिकाकर्ता को किसी भी प्रकार की जमानत नहीं दे रहे हैं। राज्य सरकार का पक्ष सुनने के बाद ही हम इस बात का आकलन करेंगे कि क्या वाकई जमानत देने की कोई गंभीर और वास्तविक आवश्यकता है। अदालत ने बहुत कड़े शब्दों में स्पष्ट किया कि जमानत पर विचार केवल और केवल तभी किया जा सकता है, जब याचिकाकर्ता की सेहत बहुत ज्यादा खराब हो या उसकी जान को कोई गंभीर खतरा हो।

बढ़ती उम्र और बीमारियों का हवाला देकर वकील ने मांगी थी राहत

अदालत की इस सख्त टिप्पणी के बीच याचिकाकर्ता आसाराम की ओर से पेश हुए देश के वरिष्ठ अधिवक्ता डीएस नायडू ने अपनी दलीलें रखीं। उन्होंने कोर्ट को बताया कि आसाराम की उम्र इस समय 80 वर्ष से अधिक हो चुकी है और वह वृद्धावस्था के कारण कई प्रकार की गंभीर और पुरानी शारीरिक बीमारियों से पीड़ित हैं। उन्होंने गिरते स्वास्थ्य का हवाला देते हुए कोर्ट से मानवीय दृष्टिकोण अपनाने और सजा को निलंबित कर जमानत देने की पुरजोर गुहार लगाई, जिसे अदालत ने मौजूदा परिस्थितियों में स्वीकार नहीं किया।

राजस्थान हाईकोर्ट का विस्तृत फैसला और कानूनी बरी होना

इससे पहले, 27 मई को राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर पीठ ने इस पूरे मामले में आसाराम की दोषसिद्धि को मुख्य रूप से बरकरार रखा था, लेकिन तकनीकी और कानूनी आधार पर उन्हें भारतीय दंड संहिता (IPC) और पॉक्सो (POCSO) एक्ट के तहत लगे सामूहिक दुष्कर्म (गैंगरेप) और बच्चे के साथ क्रूर यौन उत्पीड़न के कुछ अति गंभीर आरोपों से बरी कर दिया था। हाईकोर्ट ने आसाराम को IPC की धारा 376(D) और पॉक्सो एक्ट की धारा 5(G)/6 के आरोपों से पूरी तरह मुक्त कर दिया था। इसके साथ ही, अदालत ने उन्हें आपराधिक साजिश रचने से संबंधित IPC की धारा 120(B) के आरोपों से भी पूरी तरह बरी कर दिया था।

उम्रकैद की मूल सजा और अन्य धाराएं अभी भी बरकरार

भले ही हाईकोर्ट ने कुछ धाराओं में राहत दी हो, लेकिन अदालत की खंडपीठ ने एक नाबालिग लड़की के साथ दुष्कर्म करने से संबंधित बेहद गंभीर धारा IPC 376(2)(F) के तहत आसाराम की दोषसिद्धि को पूरी तरह से बरकरार रखा था। इसी मुख्य धारा की वजह से निचली ट्रायल कोर्ट द्वारा उन्हें सुनाई गई उम्रकैद की मूल सजा पूरी तरह से कायम रही। इसके अतिरिक्त, हाईकोर्ट की बेंच ने भारतीय दंड संहिता की कई अन्य धाराओं के तहत भी दोषसिद्धि को सही ठहराया, जिनमें धारा 342 (किसी को गलत तरीके से बंधक बनाकर रखना), 370(4) (मानव तस्करी), 506 (आपराधिक रूप से डराना-धमकाना), 509 (किसी महिला की शालीनता और गरिमा को ठेस पहुंचाना), और 354(A) (यौन उत्पीड़न) शामिल हैं। इसके साथ ही पॉक्सो एक्ट की धारा 7/8 और जुवेनाइल जस्टिस एक्ट की धारा 23 के तहत भी उन्हें दोषी बनाए रखने का फैसला बरकरार रखा गया। हाईकोर्ट ने IPC की धारा 376 और पॉक्सो एक्ट की धारा 34 के तहत भी उनकी सजा को सही माना था, जबकि इसी मामले में सह-आरोपी रहीं संचिता गुप्ता उर्फ शिल्पी और शरत चंद्र को अदालत ने साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया था।

वर्ष 2018 में जोधपुर ट्रायल कोर्ट ने सुनाया था ऐतिहासिक फैसला

इस पूरे मामले की पृष्ठभूमि की बात करें तो आसाराम को 25 अप्रैल 2018 को जोधपुर की एक विशेष ट्रायल कोर्ट ने अपने ही आश्रम में पढ़ने वाली एक नाबालिग छात्रा का यौन उत्पीड़न करने का मुख्य दोषी पाया था। उस समय अदालत ने देश को झकझोर देने वाले इस मामले में आईपीसी, पॉक्सो कानून और जुवेनाइल जस्टिस एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत आसाराम को दोषी ठहराते हुए आखिरी सांस तक जेल में रहने यानी उम्रकैद की ऐतिहासिक सजा सुनाई थी, जिसके बाद से वह लगातार जेल में बंद हैं।

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