Twisha Sharma Death Case

त्विषा शर्मा संदिग्ध मौत मामले में आरोपियों की न्यायिक हिरासत 14 दिन बढ़ी, सीबीआई ने कोर्ट से मांगी वॉयस सैंपल की अनुमति

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एजेंसी, भोपाल। Twisha Sharma Death Case CBI : मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में ब्याही गई नोएडा की प्रसिद्ध मॉडल और अभिनेत्री त्विषा शर्मा की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के मामले में एक बड़ा कानूनी मोड़ सामने आया है। इस हाई-प्रोफाइल मामले की सुनवाई मंगलवार को भोपाल की न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी आरती आर्या की अदालत में संपन्न हुई। मामले की जांच कर रही केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने अदालत के समक्ष कई महत्वपूर्ण दलीलें पेश करते हुए मामले के मुख्य आरोपियों की न्यायिक हिरासत बढ़ाने की पुरजोर मांग की, जिसे कोर्ट ने पूरी तरह स्वीकार कर लिया। इसके साथ ही सीबीआई ने डिजिटल और फॉरेंसिक साक्ष्यों को खंगालने के लिए आरोपियों के वॉयस सैंपल (आवाज के नमूने) लेने और जब्त किए गए कंप्यूटर टूल्स के पासवर्ड हासिल करने की विशेष अनुमति भी अदालत से मांगी है।

डिजिटल सबूतों के लिए लैपटॉप का पासवर्ड और ऑडियो जांच के लिए आवाज का नमूना जरूरी

पीड़ित पक्ष की पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने अदालती कार्यवाही की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि केंद्रीय जांच एजेंसी ने न्यायालय को एक बेहद महत्वपूर्ण तकनीकी समस्या से अवगत कराया है। सीबीआई के वकीलों ने अदालत को बताया कि गिरफ्तार किए गए मुख्य आरोपी समर्थ सिंह का पर्सनल लैपटॉप सुरक्षा कोड (पासवर्ड) न होने के कारण अब तक खोला नहीं जा सका है। लैपटॉप लॉक होने की वजह से उसके भीतर मौजूद महत्वपूर्ण डिजिटल साक्ष्यों और फाइलों की विस्तृत जांच पूरी तरह रुकी हुई है। इसके साथ ही जांच दल ने अदालत को सूचित किया कि अब तक की छानबीन के दौरान उन्हें कुछ बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण ऑडियो रिकॉर्डिंग हाथ लगी हैं। इन कड़ियों की पूरी तरह फॉरेंसिक जांच करने और सच्चाई का पता लगाने के लिए आरोपी मां और बेटे दोनों की आवाज के नमूनों का मिलान कराया जाना बेहद आवश्यक है।

दिल्ली एम्स की पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार, 14 जुलाई तक जेल में रहेंगे आरोपी

जांच एजेंसी ने कोर्ट के सामने यह भी दलील रखी कि दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के विशेषज्ञ डॉक्टरों के बोर्ड से दोबारा कराई गई मृतका त्विषा शर्मा की पोस्टमार्टम रिपोर्ट अभी तक आधिकारिक रूप से प्राप्त नहीं हो सकी है। इन तमाम तकनीकी कारणों, डिजिटल साक्ष्यों की अधूरी पड़ताल और फॉरेंसिक रिपोर्टों के लंबित होने का हवाला देते हुए सीबीआई ने आरोपियों की न्यायिक हिरासत की अवधि को आगे बढ़ाने की लिखित गुहार लगाई। न्यायालय ने इन तर्कों को गंभीरता से स्वीकार करते हुए दोनों आरोपियों की न्यायिक हिरासत को अगले 14 दिनों के लिए बढ़ा दिया है। इस नए आदेश के बाद अब दोनों आरोपियों को 14 जुलाई 2026 को दोबारा अदालत के समक्ष पेश किया जाएगा। वहीं दूसरी तरफ, सीबीआई द्वारा आवाज के नमूने लेने और लैपटॉप का पासवर्ड दिलाने के लिए लगाए गए विशेष आवेदन पर कोर्ट आगामी 3 जुलाई को अपनी विस्तृत सुनवाई करेगा।

अदालती कार्रवाई के दौरान पूर्व जज गिरिबाला सिंह ने उठाया अपने ही घर में हुई चोरी का मुद्दा

सुनवाई के दौरान जेल से कोर्ट में पेश की गई आरोपी सेवानिवृत्त जिला जज गिरिबाला सिंह ने जज के सामने पिछले दिनों अपने सूने पड़े मकान में हुई एक बड़ी चोरी की वारदात का मुद्दा बेहद आक्रामक ढंग से उठाया। उन्होंने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए अदालत से कहा कि उनके पूरे घर के भीतर कौन सी कीमती चीज और दस्तावेज किस अलमारी या लॉकर में रखे हुए हैं, इसकी सटीक जानकारी केवल तीन ही पक्षों को हो सकती थी। उन्होंने काबिलेगौर अंदाज में बताते हुए कहा कि पहली जानकार स्थानीय पुलिस थी, दूसरी जांच कर रही सीबीआई की टीम थी और तीसरे वह खुद या उनका परिवार था। उन्होंने रहस्यमयी अंदाज में कहा कि एक चौथा ऐसा व्यक्ति भी हो सकता है जिसका नाम इस पवित्र न्यायालय के भीतर लेना वह बिल्कुल भी उचित नहीं समझती हैं। उन्होंने हैरान होकर पूछा कि आखिर शातिर चोरों को उनके और उनके बेटे के बेडरूम तथा गुप्त लॉकर की इतनी सटीक और अंदरूनी जानकारी कैसे मिल गई? उन्होंने आशंका जताई कि यह चोरी उनके खिलाफ रची गई किसी बड़ी साजिश का हिस्सा हो सकती है, जिसका मकसद केस से जुड़े सबूतों को नष्ट करना था।

सीबीआई के वकील ने जताई कड़ी आपत्ति, कहा- चोरी और मौत के मामले का कोई सीधा संबंध नहीं

पूर्व जिला जज द्वारा कोर्ट के भीतर चोरी का मुद्दा उठाया जाने पर वहां मौजूद केंद्रीय जांच एजेंसी के सरकारी अधिवक्ता ने तुरंत अपनी कड़ी कानूनी आपत्ति दर्ज कराई। सीबीआई के वकील ने तीखा तर्क देते हुए कहा कि आरोपियों के घर पर हुई चोरी की घटना एक पूरी तरह से अलग आपराधिक मामला है, जिसकी जांच स्थानीय पुलिस प्रशासन अपने स्तर पर बहुत ही मुस्तैदी से कर रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस चोरी की घटना का अभिनेत्री त्विषा शर्मा की संदिग्ध मौत के मुख्य मामले की जांच से दूर-दूर तक कोई भी प्रत्यक्ष या कानूनी संबंध नहीं है। इसलिए मुख्य केस की सुनवाई के दौरान इस तरह के भटकाने वाले मुद्दों को तूल देना कानूनी रूप से सही नहीं है।

जानिए क्या है पूरा मामला और कैसे शुरू हुआ न्याय के लिए बड़ा आंदोलन

इस पूरे संवेदनशील मामले की पृष्ठभूमि पर नजर डालें तो ग्रेटर नोएडा की रहने वाली खूबसूरत मॉडल और अभिनेत्री त्विषा शर्मा का विवाह भोपाल की रहने वाली सेवानिवृत्त जिला जज गिरिबाला सिंह के अधिवक्ता बेटे समर्थ सिंह के साथ बेहद धूमधाम से संपन्न हुआ था। लेकिन शादी के कुछ समय बाद ही, गत 12 मई को भोपाल के कटारा हिल्स थाना क्षेत्र में स्थित त्विषा की ससुराल में उसकी लाश बेहद संदिग्ध और रहस्यमयी परिस्थितियों में पाई गई थी। घटना के तुरंत बाद भोपाल पुलिस द्वारा की गई शुरुआती तफ्तीश और कार्रवाई पर मृतका के माता-पिता तथा मायके पक्ष के लोगों ने गंभीर लापरवाही बरतने और आरोपियों को बचाने के बड़े आरोप लगाए थे। अपनी बेटी को न्याय दिलाने के लिए पीड़ित परिवार और उनके रिश्तेदारों ने भोपाल से लेकर देश की राजधानी दिल्ली तक बड़े पैमाने पर कैंडल मार्च और विरोध प्रदर्शन किए थे, जिसने राष्ट्रीय मीडिया का ध्यान खींचा था। मामले की गंभीरता और चौतरफा बढ़ते जनआक्रोश को देखते हुए मध्य प्रदेश सरकार ने इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच को केंद्रीय जांच एजेंसी यानी सीबीआई को सौंपने की एक बड़ी सिफारिश की थी। केंद्र सरकार की मंजूरी के बाद इस केस को अपने हाथों में लेते ही सीबीआई ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मृतका के पति समर्थ सिंह और सास गिरिबाला सिंह को विभिन्न गंभीर धाराओं के तहत गिरफ्तार कर लिया था। यह दोनों ही हाई-प्रोफाइल आरोपी गत 2 जून से लगातार भोपाल की केंद्रीय जेल (सेंट्रल जेल) में बंद हैं और अपनी सलाखों के पीछे दिन काट रहे हैं।

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