एजेंसी, राजगढ़। Jal Ganga Samvardhan Abhiyan : मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले में भव्यता के साथ जल गंगा संवर्धन अभियान 2026 के समापन समारोह का आयोजन किया गया। इस विशेष अवसर पर सूबे के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जनता को संबोधित करते हुए एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने गौरव के साथ रेखांकित किया कि मध्य प्रदेश आज पूरे देश के बड़े राज्यों की सूची में जल संरक्षण (वॉटर कंजर्वेशन) के क्षेत्र में नंबर 1 और अग्रणी राज्य बनकर उभरा है। इस महाअभियान के अंतर्गत कपिल मुनि की पावन तपोभूमि राजगढ़ जिला पूरे प्रदेश में जल संचय के उत्कृष्ट कार्यों को करने में सबसे आगे रहा है। सरकार द्वारा संचालित इस योजना के भीतर सबसे शानदार प्रदर्शन करने वाले शीर्ष 6 जिलों में राजगढ़ ने अपना विशिष्ट स्थान बनाया है, जो पूरे जिले के लिए एक बड़ी उपलब्धि है।
भावी पीढ़ियों के बेहतर भविष्य के लिए पानी की बूंद-बूंद बचाना जरूरी है…
आज राजगढ़ जिले में ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ के राज्य स्तरीय समापन कार्यक्रम में विभिन्न विकास कार्यों की सौगात दी और हितग्राहियों को हितलाभ वितरित किए।
प्रदेश लगातार तीसरे वर्ष जल संरक्षण अभियान… pic.twitter.com/hEPHSpiBs3
— Dr Mohan Yadav (@DrMohanYadav51) June 30, 2026
दस हजार करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से संवरे 3.62 लाख जल स्रोत
समापन समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बताया कि राज्य सरकार ने 19 मार्च से लेकर 30 जून तक पूरे 100 दिनों का एक व्यापक और विशेष अभियान चलाया था। इस समय सीमा के भीतर प्रदेश के प्राचीन और पारंपरिक कुओं, ऐतिहासिक बावड़ियों, बड़े तालाबों, जीवनदायिनी नदियों, अमृत सरोवरों और अन्य सदियों पुराने जल स्रोतों का जीर्णोद्धार करने का एक कड़ा संकल्प लिया गया था। यह पूरे प्रदेश के लिए बेहद हर्ष और गर्व का विषय है कि इस ऐतिहासिक जल गंगा संवर्धन अभियान 2026 के अंतर्गत राज्य सरकार ने लगभग 10 हजार करोड़ रुपये की विशाल धनराशि खर्च की है। इस भारी-भरकम बजट की सहायता से समूचे मध्य प्रदेश के भीतर 3 लाख 62 हजार से भी अधिक जल स्रोतों का पूरी तरह से कायाकल्प और पुनरोद्धार किया गया है, जो अपने आप में एक बड़ा रिकॉर्ड है।
राजगढ़ जिले को मिली 341 करोड़ रुपये के विकास कार्यों की सौगात
मुख्यमंत्री ने इस पावन अवसर पर राजगढ़ क्षेत्र के सर्वांगीण विकास के लिए खजाना खोल दिया। उन्होंने जिले में 341 करोड़ रुपये से भी अधिक की लागत वाले 30 से ज्यादा बड़े विकास कार्यों की सौगात दी। इस महासमारोह के दौरान मुख्यमंत्री ने 247 करोड़ 40 लाख रुपये की अनुमानित लागत वाली 14 नई परियोजनाओं का विधि-विधान से भूमि-पूजन किया। इसके साथ ही उन्होंने लगभग 100 करोड़ रुपये के बजट से बनकर तैयार हुए 17 तैयार विकास कार्यों का लोकार्पण कर उन्हें जनता को समर्पित किया। इन लोकार्पित होने वाले कार्यों में जीरापुर का सुप्रसिद्ध सांदीपनि विद्यालय और जिले के आवागमन को सुगम बनाने वाला 30 करोड़ रुपये की भारी लागत से निर्मित एक विशाल पुल भी मुख्य रूप से शामिल है।
सनातन संस्कृति में पंच तत्वों के भीतर जल का सर्वोच्च महत्व
जल की महत्ता पर गहराई से प्रकाश डालते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कुशल मार्गदर्शन और आशीर्वाद से आज पूरे देश के भीतर जल गंगा संवर्धन अभियान 2026 के तहत जल संचयन के अभूतपूर्व कार्य किए जा रहे हैं। उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि पानी के बिना इस धरती पर जीवन या किसी भी सुंदर सृष्टि की कल्पना करना पूरी तरह से असंभव है। जल ही इस वसुंधरा पर प्रकृति, वनस्पति और हर जीवधारी के जीवन का असली आधार है। हमारी महान सनातन संस्कृति में प्रकृति के पंच तत्वों के भीतर जल को एक बहुत ही पवित्र और सर्वोच्च स्थान प्रदान किया गया है। मानव शरीर की संरचना में भी 70 प्रतिशत से अधिक मात्रा केवल जल की ही होती है। यही मुख्य कारण है कि जब भी हम किसी साफ नदी, सुंदर तालाब, कुएं या बावड़ी जैसी जल रचनाओं को देखते हैं, तो हमारा मन पूरी तरह से आनंदित और प्रफुल्लित हो उठता है।
चंबल, पार्वती और क्षिप्रा जैसी पावन नदियों के कारण नाम पड़ा जल गंगा
मुख्यमंत्री ने इस अनूठे अभियान के नामकरण के पीछे का एक बहुत ही सुंदर और तार्किक कारण भी जनता के सामने रखा। उन्होंने बताया कि मध्य प्रदेश की पावन धरा से निकलने वाली प्रमुख नदियां जैसे पार्वती, चंबल, कालीसिंध और क्षिप्रा आगे जाकर अंततः देश की सबसे पवित्र गंगा नदी के विशाल बेसिन में समाहित हो जाती हैं। चूंकि प्रदेश का यह पूरा हिस्सा भौगोलिक दृष्टि से गंगा बेसिन के क्षेत्र के अंतर्गत ही आता है, इसी पावन और पवित्र उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने जल संचयन के इस महाभियान का नाम अत्यंत सोच-विचार कर ‘जल गंगा’ रखा था, जिसे जनता का भरपूर जनसहयोग प्राप्त हुआ है।
अलनीनो के खतरे के बीच भावी पीढ़ियों के लिए पानी की एक-एक बूंद बचाना जरूरी
भविष्य की गंभीर चुनौतियों का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने राज्य के नागरिकों को सचेत किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के मजबूत नेतृत्व में मध्य प्रदेश ने लगातार तीसरे वर्ष भी जल संरक्षण के इस सालाना अभियान को बहुत ही सफलता के साथ पूरा किया है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार इस साल अलनीनो के वैश्विक प्रभाव के कारण देश और प्रदेश में सामान्य से काफी कम वर्षा होने का एक चिंताजनक अनुमान जताया गया है। इसी संभावित सूखे के खतरे को देखते हुए प्रदेश में अमृत सरोवर योजना, रेन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम (वर्षा जल संचयन प्रणाली) और नदी संरक्षण जैसे महत्वपूर्ण कार्य मानसून के दौरान भी निरंतर जारी रखे जाएंगे। उन्होंने जनता से भावुक अपील करते हुए कहा कि आज भले ही इस आधिकारिक अभियान का समापन हो रहा है, लेकिन हमारी आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित और खुशहाल भविष्य के लिए हमें जीवनभर पानी की एक-एक बूंद को संचित करने का एक मजबूत संकल्प अपने मन में लेना होगा।
सिंचित भूमि के रकबे में ऐतिहासिक उछाल और लाड़ली बहनों को वित्तीय सहायता
अपनी सरकार के कल्याणकारी कार्यों की रिपोर्ट कार्ड पेश करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार किसानों और समाज के हर वर्ग के उत्थान के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। वर्ष 2023 के दौरान पूरे मध्य प्रदेश में कुल सिंचित भूमि का क्षेत्रफल केवल 44 लाख हेक्टेयर था, जिसे हमारी सरकार के कड़े प्रयासों से अब बढ़ाकर सीधे 65 लाख हेक्टेयर के ऐतिहासिक स्तर तक पहुंचा दिया गया है। यदि केवल राजगढ़ जिले की बात करें, तो बीते 3 वर्षों के भीतर ही यहां सिंचाई का रकबा 50 हजार हेक्टेयर से बढ़कर सीधे ढाई लाख हेक्टेयर हो चुका है, जिसके कारण क्षेत्र से होने वाला पलायन पूरी तरह रुक गया है और स्थानीय युवाओं को अपने ही घर में रोजगार के नए अवसर मिल रहे हैं। इसके साथ ही सरकार कृषि उत्पादक किसानों को समृद्ध बनाने के लिए 100 लाख मीट्रिक टन से अधिक गेहूं का उपार्जन कर उन्हें 2625 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से सीधे बैंक खातों में भुगतान कर रही है। सरकार हर महीने लाड़ली बहनों के खातों में 1500 रुपये की वित्तीय सहायता राशि भेजकर समय से पहले ही रक्षाबंधन का पावन पर्व मना रही है। इसके अतिरिक्त विद्यार्थियों को मुफ्त ड्रेस, किताबें और साइकिलें प्रदान की जा रही हैं।
सिंहस्थ 2028 की भव्य तैयारियां जोरों पर, 40 करोड़ श्रद्धालुओं के आने का अनुमान
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उज्जैन में आयोजित होने वाले आगामी सिंहस्थ 2028 के महाकुंभ को लेकर भी एक बड़ा और महत्वपूर्ण अपडेट साझा किया। उन्होंने कहा कि बाबा महाकाल के परम आशीर्वाद से सिंहस्थ मेले के भव्य और दिव्य आयोजन के लिए सरकार की तरफ से अभी से सभी प्रकार के विश्वस्तरीय प्रबंधन और विकास कार्य बहुत तेजी से किए जा रहे हैं। इस ऐतिहासिक महाकुंभ के दौरान देश-विदेश से लगभग 40 करोड़ श्रद्धालुओं और संतों के पावन नगरी उज्जैन आने का एक बड़ा अनुमान लगाया गया है। श्रद्धालुओं की सुगम और सुरक्षित यात्रा के लिए राजधानी भोपाल से राजगढ़, उज्जैन और मंदसौर तक की सभी कनेक्टिंग सड़कों को फोरलेन और नई शानदार सड़क परियोजनाओं में बदलने का काम युद्ध स्तर पर चल रहा है। उन्होंने विरोधियों पर तीखा हमला करते हुए कहा कि इस महामेले के भव्य प्रबंधों को देखकर कुछ विपक्षी दल पूरी तरह नाखुश हैं, लेकिन हमारी लोक-कल्याणकारी सरकार विकास की इस अविरल यात्रा को जारी रखने के लिए किसी भी राजनीतिक दबाव या डर के आगे झुकने वाली नहीं है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा की गई कई बड़ी और महत्वपूर्ण घोषणाएं
इस भव्य समापन समारोह के मंच से मुख्यमंत्री ने राजगढ़ क्षेत्र की जनता को खुश करते हुए कई बड़ी विकास योजनाओं की घोषणाएं भी कीं, जो इस प्रकार हैं:
सरकार की महत्वाकांक्षी द्वारिका योजना के अंतर्गत सारंगपुर, पचोर सहित राजगढ़ जिले की सभी छोटी-बड़ी नगरपालिकाओं के भीतर सड़कों के आधुनिक विकास और चौड़ीकरण के कार्यों को तुरंत मंजूरी दी जाएगी।
क्षेत्र की धार्मिक आस्था के प्रमुख केंद्र भैंसवामाता मंदिर के परिसर को एक भव्य और दिव्य धार्मिक स्थल (लोक) के रूप में विकसित करने के लिए सरकार ने आधिकारिक प्रस्ताव को अपनी मंजूरी दे दी है।
भैंसवामाता लोक निर्माण परियोजना के पहले चरण के निर्माण कार्यों को बिना किसी रुकावट के तुरंत शुरू करने के लिए मुख्यमंत्री ने ऑन-द-स्पॉट 20 करोड़ रुपये की भारी प्रारंभिक राशि भी आवंटित कर दी है।
नदियों के उद्गम स्थल सूखे, कम वर्षा से बिना डरे जनभागीदारी से करेंगे सामना
इस समारोह को संबोधित करते हुए प्रदेश के पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के कैबिनेट मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत प्रदेशभर में जितने भी कार्य किए गए हैं, सरकार उन सभी के जमीनी स्तर पर सफल होने को पूरी तरह प्रमाणित करती है। उन्होंने राजगढ़ की भौगोलिक स्थिति पर बात करते हुए कहा कि यह जिला हमेशा से ही पानी की भारी कमी से जूझता रहा है, लेकिन यहां के निवासियों ने बाहर के पानी का बेहतर संचय कर अपनी आवश्यकताओं को पूरा करना सीखा है। इस साल वर्षा ऋतु में कम बारिश होने का अंदेशा है और कई छोटी-बड़ी नदियों के मुख्य उद्गम स्थल पूरी तरह सूखे पड़े हैं। ऐसी स्थिति में कम वर्षा के अनुमान से डरने की बिल्कुल जरूरत नहीं है, बल्कि हमें पूरी जनभागीदारी, सरकारी मशीनरी और समाज के सहयोग से पानी की हर एक बूंद को सहेज कर अपनी भावी पीढ़ी के कल को पूरी तरह सुरक्षित करना होगा।
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