Telegram Ban India

नीट-यूजी री-एग्जाम पर संकट के बीच बड़ा कदम : टेलीग्राम पर लगा प्रतिबंध, बैन के खिलाफ अदालत पहुंची कंपनी, सीईओ बोले- 15 करोड़ यूजर्स को मिली सजा

नई दिल्ली राष्ट्रीय

एजेंसी, नई दिल्ली। Telegram Ban India : देश की सबसे बड़ी चिकित्सा प्रवेश परीक्षा यानी नीट-यूजी की दोबारा होने वाली परीक्षा से ठीक पहले केंद्र सरकार ने एक बहुत बड़ा और कड़ा कदम उठाया है। सरकार ने इस लोकप्रिय मैसेजिंग प्लेटफॉर्म टेलीग्राम पर देश भर में अस्थायी रूप से पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया है। सरकार के इस अचानक लिए गए फैसले के खिलाफ टेलीग्राम कंपनी ने सीधे दिल्ली उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है और इस रोक को कानूनी चुनौती दी है। दिल्ली उच्च न्यायालय ने भी मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए बुधवार को ही इस याचिका पर तुरंत सुनवाई करने के लिए अपनी सहमति दे दी है।

प्रतिबंध की समय सीमा और टेलीग्राम प्रमुख का तीखा पलटवार

राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी ने सरकार की ओर से लगाए गए इस प्रतिबंध की विस्तृत जानकारी साझा की है। सरकारी आदेश के मुताबिक, टेलीग्राम एप पर यह पाबंदी 22 जून 2026 तक पूरी तरह लागू रहेगी। इसके साथ ही, ऐप के भीतर संदेशों को बदलने वाले बेहद चर्चित फीचर यानी ‘मैसेज एडिटिंग’ पर भी 30 जून तक के लिए रोक लगा दी गई है। सरकार के इस बड़े फैसले पर टेलीग्राम के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) ने बेहद तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने सरकार की इस कार्रवाई की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि इस फैसले से उन अपराधियों को कोई सजा नहीं मिली है जिन्होंने असल में प्रश्नपत्र लीक किया था, बल्कि भारत के 15 करोड़ से अधिक निर्दोष टेलीग्राम यूजर्स को बिना किसी गलती के सजा भुगतनी पड़ रही है। उन्होंने दावा किया कि इस तरह के प्रतिबंधों से कुछ भी हासिल नहीं होगा और गलत काम करने वाले लोग बहुत आसानी से दूसरे डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर चले जाएंगे।

पहली बार पेपर लीक के डर से बैन, प्ले स्टोर से हटाया गया ऐप

भारत के इतिहास में यह पहला मौका है जब किसी मोबाइल एप्लीकेशन पर केवल इसलिए प्रतिबंध लगाया गया है ताकि किसी बड़ी परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक होने से बचाया जा सके और अफवाहों पर लगाम लगाई जा सके। सरकार ने इस कड़े फैसले के पीछे तर्क दिया है कि कुछ असामाजिक तत्व और जालसाज इस ऐप का गलत इस्तेमाल करके छात्रों के बीच पेपर लीक की झूठी खबरें फैला रहे थे और उनसे भारी रकम ठग रहे थे। राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी के महानिदेशक अभिषेक सिंह ने इस स्थिति पर बात करते हुए साफ किया कि सरकार के पास इस ऐप को बंद करने के अलावा ‘कोई दूसरा विकल्प’ नहीं बचा था, क्योंकि अपराधी इस प्लेटफॉर्म का बेजा इस्तेमाल कर रहे थे। सरकार के सख्त निर्देशों का पालन करते हुए दिग्गज तकनीकी कंपनियों गूगल और एप्पल ने भी अपने-अपने ऑनलाइन प्ले स्टोर से टेलीग्राम ऐप को पूरी तरह से हटा दिया है।

पहचान छिपाने की आजादी और बड़ी फाइलों को भेजने की सुविधा बनी मुसीबत

विशेषज्ञों और जांच एजेंसियों के अनुसार, टेलीग्राम पर प्रतिबंध लगाना इसलिए बेहद जरूरी हो गया था क्योंकि इस प्लेटफॉर्म पर कोई भी व्यक्ति अपनी असली पहचान पूरी तरह छिपाकर बेहद आसानी से एक ऐसा चैनल बना सकता है, जिसमें असीमित संख्या में लोग जुड़ सकते हैं। नीट परीक्षा से जुड़े कुछ फर्जी चैनलों पर लाखों की संख्या में छात्र जुड़े हुए थे, जिनकी सही तरीके से निगरानी कर पाना सुरक्षा एजेंसियों के लिए नामुमकिन साबित हो रहा था। इसके अलावा, ऐप का ‘मैसेज एडिटिंग’ फीचर भी धोखाधड़ी का एक बड़ा जरिया बन चुका था। इस फीचर की कमी यह है कि पुराना संदेश बदलने के बाद भी उसके भेजे जाने का असली समय नहीं बदलता था। जालसाज परीक्षा खत्म होने के बाद अपने पुराने और सामान्य संदेशों को बदलकर वहां असली प्रश्नपत्र की पीडीएफ फाइल डाल देते थे और फिर उसका स्क्रीनशॉट दिखाकर यह झूठा दावा करते थे कि उन्होंने परीक्षा शुरू होने से पहले ही पेपर लीक कर दिया था। साथ ही, इस ऐप पर बिना किसी रुकावट के 2 जीबी तक की भारी-भरकम फाइलें आसानी से भेजी जा सकती हैं, जिसके कारण परीक्षाओं के गोपनीय दस्तावेज और फिल्में बहुत तेजी से वायरल हो जाती हैं।

टेलीग्राम की अपनी कार्रवाई पड़ी फीकी, व्हाट्सएप से तुलना क्यों नहीं?

हालांकि, टेलीग्राम कंपनी ने अदालत में अपना पक्ष रखते हुए कहा है कि वह अपनी तरफ से गलत गतिविधियों के खिलाफ लगातार बड़ी कार्रवाइयां करती रही है। कंपनी ने साल 2025 के भीतर करीब 4.35 करोड़ से अधिक संदिग्ध चैनलों को पूरी तरह बंद किया था। इसके अलावा, साल 2026 में कंपनी ने हर दिन हटाए जाने वाले चैनलों की संख्या को 80,000 से बढ़ाकर सीधे 1,40,000 तक कर दिया था, लेकिन जांच एजेंसियों के मुताबिक अपराधियों पर लगाम कसने के लिए यह प्रयास बहुत कम साबित हो रहे थे। कई लोग यह सवाल भी उठा रहे हैं कि टेलीग्राम पर प्रतिबंध लगाया गया, तो व्हाट्सएप पर क्यों नहीं? इसके पीछे मुख्य वजह यह है कि व्हाट्सएप पूरी तरह से भारतीय कानूनों और नियमों का पालन करता है और वहां किसी भी संदिग्ध यूजर को ढूंढना बेहद आसान है, क्योंकि व्हाट्सएप इस्तेमाल करने के लिए मोबाइल नंबर अनिवार्य होता है, जबकि टेलीग्राम पर केवल ‘यूजरनेम’ की मदद से पहचान को आसानी से छिपाया जा सकता है। व्हाट्सएप पर ग्रुप में जुड़ने वाले लोगों की संख्या भी अधिकतम 1024 तक ही सीमित होती है, जबकि टेलीग्राम में असीमित लोग जुड़कर किसी भी सामग्री को पल भर में वायरल कर देते हैं। साथ ही व्हाट्सएप का भारत में अपना आधिकारिक दफ्तर भी है जो कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के जरिए हर संदिग्ध गतिविधि पर नजर रखता है, जिसकी कमी टेलीग्राम में देखी गई है।

दोबारा होने वाली परीक्षा के समय में बदलाव और अतिरिक्त रफ शीट की सुविधा

राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी ने आगामी नीट-यूजी की दोबारा होने वाली परीक्षा को लेकर कुछ बेहद महत्वपूर्ण तकनीकी बदलाव भी किए हैं। 12 जून को जारी की गई नई आधिकारिक मार्गदर्शिका के अनुसार, छात्रों की सहूलियत के लिए परीक्षा के कुल समय को अब 180 मिनट से बढ़ाकर सीधे 195 मिनट कर दिया गया है, यानी छात्रों को अब परीक्षा के लिए पूरे सवा तीन घंटे का समय मिलेगा। इसके अलावा, गणितीय और वैज्ञानिक गणनाओं को हल करने के लिए आंसर शीट के भीतर रफ वर्क की जगह को भी काफी बढ़ा दिया गया है और छात्रों को रफ काम के लिए 4 विशेष शीट अलग से दी जाएंगी।

गड़बड़ी के आरोपों के बाद रद्द हुई थी मई महीने की मुख्य परीक्षा

गौरतलब है कि इस साल 3 मई 2026 को नीट-यूजी की मुख्य परीक्षा पूरे देश में एक साथ आयोजित की गई थी। परीक्षा संपन्न होते ही देश के कई राज्यों से प्रश्नपत्र लीक होने और कुछ खास उम्मीदवारों को परीक्षा से पहले ही पूरा पेपर मिल जाने के बेहद गंभीर आरोप सामने आए थे। सरकार और पुलिस की शुरुआती जांच में जब बड़े पैमाने पर अनियमितताओं और धांधली के पुख्ता संकेत मिले, तो राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी ने कड़ा फैसला लेते हुए 12 मई को पूरी परीक्षा को रद्द घोषित कर दिया था। इसके बाद देश के शिक्षा मंत्रालय, केंद्र सरकार और विभिन्न जांच एजेंसियों की उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक के बाद छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए इस परीक्षा को दोबारा पारदर्शी तरीके से आयोजित करने का फैसला लिया गया।

देश के एक लाख से ज्यादा मेडिकल सीटों पर दाखिले का एकमात्र जरिया

नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट यानी नीट भारत के भीतर चिकित्सा और दंत चिकित्सा के तमाम बड़े कोर्सेज में दाखिला लेने के लिए आयोजित होने वाली एकमात्र और सबसे बड़ी राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षा है। इस ऐतिहासिक परीक्षा की शुरुआत साल 2013 में की गई थी ताकि देश भर के मेडिकल दाखिलों में पारदर्शिता लाई जा सके। इस बेहद कठिन परीक्षा को पास करने के बाद ही देश के तमाम सरकारी और निजी मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस, बीडीएस, आयुष और नर्सिंग जैसे महत्वपूर्ण पाठ्यक्रमों में मेरिट के आधार पर सीटें मिलती हैं। देश के सबसे प्रतिष्ठित और बड़े चिकित्सा संस्थान जैसे एम्स और जिपमेर भी इसी परीक्षा के दायरे में आते हैं और इनमें दाखिले के लिए हर साल देश के लाखों छात्र दिन-रात मेहनत करते हैं।

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