एजेंसी, मुंबई। Maharashtra Politics : महाराष्ट्र की राजनीति से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है, जहाँ उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) को एक बहुत बड़ा झटका लगा है। पार्टी के कुल 9 लोकसभा सांसदों में से 6 सांसदों ने मौजूदा नेतृत्व के खिलाफ बगावत का बिगुल फूंक दिया है। अंदरूनी सूत्रों से मिली बेहद पुख्ता जानकारी के अनुसार, इन छह बागी सांसदों ने बुधवार को सुबह साढ़े नौ बजे लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को एक आधिकारिक पत्र भेजा है। इस पत्र में सांसदों ने मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले दल में अपने गुट के विलय की मांग की है। हालांकि, इस पूरे सियासी घटनाक्रम पर अभी तक लोकसभा अध्यक्ष कार्यालय या बागी गुट के नेताओं की तरफ से कोई भी आधिकारिक और अंतिम पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन गलियारों में इसकी चर्चा बेहद तेज है।
#WATCH दिल्ली: शिवसेना UBT में फूट की अटकलों के बीच पार्टी सांसद संजय राउत ने कहा, “अगर कोई जाना चाहता है, तो वो इस्तीफा देकर जा सकता है। अगर हमारे सांसदों के बारे में ऐसी खबरें आती हैं, तो उन्हें उनका खंडन करना चाहिए। इस बार महाराष्ट्र के लोग चुप नहीं रहेंगे।” pic.twitter.com/O1q4fTpQSz
— ANI_HindiNews (@AHindinews) June 17, 2026
बागी नेताओं की सूची और संजय राउत का विवादित बयान
पार्टी छोड़ने वाले इन बागी सांसदों में नागेश पाटिल आष्टीकर और संजय दीना पाटिल जैसे बड़े और कद्दावर नाम शामिल बताए जा रहे हैं। बेहद चौंकाने वाली बात यह है कि सांसद संजय दीना पाटिल ने बुधवार की सुबह ही मीडिया के सामने आकर पार्टी छोड़ने और बगावत करने की तमाम खबरों को पूरी तरह से अफवाह बताते हुए खारिज कर दिया था, लेकिन कुछ ही घंटों बाद पासा पूरी तरह पलट गया। इस बड़े सियासी उलटफेर के बीच देश की राजधानी दिल्ली में उद्धव गुट के मुख्य प्रवक्ता और राज्यसभा सांसद संजय राउत ने एक आपातकालीन प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई। इस बातचीत के दौरान वे अपने गुस्से पर काबू नहीं रख पाए और उन्होंने पाला बदलने वाले बागी सांसदों के खिलाफ बेहद तीखे और अपशब्दों का इस्तेमाल किया।
अपशब्दों पर राउत की सफाई और पार्टी में दूसरी बड़ी ऐतिहासिक टूट
संजय राउत ने बेहद आक्रामक रुख अपनाते हुए बागी नेताओं को पूरी तरह से धोखेबाज और बेईमान करार दिया। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों के खून में ही गद्दारी और बेईमानी समाई हुई है। प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिए गए विवादित बयानों पर जब हंगामा बढ़ा और चौतरफा आलोचना शुरू हुई, तो राउत ने इस पर अपनी सफाई भी पेश की। उन्होंने अपने शब्दों का बचाव करते हुए तर्क दिया कि मराठी भाषा की आम बोलचाल में इस तरह के शब्दों का इस्तेमाल बहुत ही सामान्य बात है और इसे गलत तरीके से नहीं देखा जाना चाहिए। गौर करने वाली बात यह है कि पिछले चार साल के भीतर शिवसेना के भीतर यह दूसरी सबसे बड़ी और ऐतिहासिक टूट है। इससे पहले जून 2022 में भी एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में पार्टी के 39 विधायकों ने तत्कालीन मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के खिलाफ बगावत कर दी थी और अपनी एक अलग शिवसेना बनाकर भाजपा के साथ सरकार का गठन कर लिया था।
विपक्षी खेमे में लगातार बढ़ती जा रही है सांसदों की बगावत
अगर पिछले कुछ महीनों के राष्ट्रीय घटनाक्रमों पर नजर डाली जाए, तो यह साफ हो जाता है कि विपक्षी गठबंधन के भीतर सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। पिछले केवल 3 महीनों के छोटे से कार्यकाल के भीतर विपक्षी दलों के कुल 27 सांसदों ने अपनी मूल पार्टियों से नाता तोड़ा है या बगावत की है। इन सभी बागी नेताओं ने प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से भारतीय जनता पार्टी या राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन यानी एनडीए को अपना समर्थन देने का फैसला किया है। पाला बदलने वाले इन नेताओं में आम आदमी पार्टी के 7 राज्यसभा सांसद और तृणमूल कांग्रेस यानी टीएमसी के 20 लोकसभा सांसद शामिल हैं, जिससे विपक्ष की ताकत संसद में काफी कमजोर हुई है।
उत्तर प्रदेश की राजनीति में भी बड़ी टूट के कयास और अखिलेश यादव का पलटवार
महाराष्ट्र के इस बड़े सियासी घटनाक्रम के बीच अब उत्तर प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने एक बहुत ही सनसनीखेज दावा किया है। राजभर के मुताबिक, बहुत जल्द समाजवादी पार्टी के भीतर भी एक बहुत बड़ी टूट होने जा रही है और सपा के कई बड़े और दिग्गज चेहरे भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने के लिए पूरी तरह से तैयार बैठे हैं। इस बयान के बाद समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने तुरंत सामने आकर अपनी पार्टी में किसी भी तरह की फूट की खबरों को सिरे से खारिज कर दिया। अखिलेश यादव ने कड़े शब्दों में कहा कि समाजवादी पार्टी पूरी तरह से एकजुट, मजबूत और मुस्तैद है। इसके साथ ही उन्होंने पलटवार करते हुए यह बड़ा दावा भी कर दिया कि उत्तर प्रदेश में खुद सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी के कई विधायक पाला बदलने की तैयारी में हैं और वे सपा के संपर्क में हैं।
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