एजेंसी, पणजी। Tarun Tejpal Conviction : तहलका पत्रिका के पूर्व संपादक-इन-चीफ तरुण तेजपाल को बॉम्बे हाईकोर्ट की गोवा पीठ ने दुष्कर्म और यौन उत्पीड़न के मामले में दोषी करार देते हुए 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही उच्च न्यायालय ने तेजपाल को 2 सप्ताह के भीतर आत्मसमर्पण (सरेंडर) करने का सख्त निर्देश दिया है। अदालत का यह निर्णय निचली अदालत के उस फैसले को पूरी तरह से पलटते हुए आया है, जिसमें मई 2021 में सबूतों के अभाव का हवाला देकर उन्हें बरी कर दिया गया था। हाईकोर्ट के इस कड़े रुख के बाद तेजपाल ने उच्च न्यायालय के निर्णय से निराशा जताते हुए देश की सर्वोच्च अदालत (सुप्रीम कोर्ट) का रुख करने की बात कही है।
Bombay High Court convicts former Tehelka editor Tarun Tejpal in the 2013 sexual assault case involving a former junior colleague.
A Division Bench of the High Court’s Goa Bench convicts Tejpal under provisions of the Indian Penal Code relating to rape by a person in a position… pic.twitter.com/DFRe3REF0F
— All India Radio News (@airnewsalerts) August 6, 2026
जानिए क्या था पूरा मामला और महिला पत्रकार का आरोप
यह पूरा मामला वर्ष 2013 का है, जब गोवा में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम के दौरान तहलका की ही एक महिला सहकर्मी पत्रकार ने तेजपाल पर गंभीर आरोप लगाए थे। पीड़िता की शिकायत के अनुसार, 7 और 8 नवंबर 2013 की मध्यरात्रि गोवा के एक सितारा होटल की लिफ्ट में तरुण तेजपाल ने उनके साथ दो बार यौन उत्पीड़न किया था। इस घटना के सार्वजनिक होने के बाद गोवा पुलिस ने स्वत: संज्ञान लेते हुए प्राथमिकी दर्ज की थी। जांच के दौरान पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज, ई-मेल पत्राचार और गवाहों के बयानों को शामिल करते हुए आरोप पत्र दाखिल किया था, जिसके बाद नवंबर 2013 में ही तेजपाल की गिरफ्तारी हुई थी।
हाईकोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को क्यों किया खारिज
उच्च न्यायालय ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि सत्र अदालत ने साक्ष्यों और तथ्यों का सही तरीके से आकलन नहीं किया था। निचली अदालत ने घटना से जुड़े मुख्य सबूतों के बजाय घटना के बाद पीड़िता के व्यवहार पर अधिक ध्यान देकर गलती की। इसके अतिरिक्त, घटना के बाद तरुण तेजपाल द्वारा पीड़िता को भेजा गया माफी का ई-मेल एक महत्वपूर्ण साक्ष्य था, जिसे सत्र अदालत ने नजरअंदाज कर दिया था। हाईकोर्ट ने तेजपाल को भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 376(2)(f), 376(2)(k), 354A और 354B के तहत महिलाओं के प्रति गंभीर यौन अपराधों का दोषी पाया।
खोजी पत्रकार से विवादों में घिरे संपादक का सफर
तरुण तेजपाल देश के जाने-माने पत्रकारों, लेखकों और प्रकाशकों में गिने जाते रहे हैं, जिन्हें पत्रकारिता क्षेत्र में 30 वर्षों से अधिक का अनुभव है। उन्होंने वर्ष 2000 में खोजी पत्रकारिता आधारित पोर्टल ‘तहलका’ की नींव रखी थी, जो बाद में पत्रिका के रूप में रूपांतरित हुई। तहलका ने देश के कई बड़े राजनीतिक और प्रशासनिक स्टिंग ऑपरेशनों को उजागर किया था। हालांकि, 2013 में लगे दुष्कर्म के आरोपों के बाद उनके करियर पर गंभीर विराम लग गया। अब हाईकोर्ट से सजा मिलने के बाद आरोपी पक्ष का कहना है कि वे कानूनी राहत पाने के लिए सर्वोच्च अदालत में अपील दाखिल करेंगे।
इस पूरे मामले और मुख्य बिंदुओं को समझने के लिए नीचे दिए गए प्रमुख प्रश्नों और उनके उत्तरों को पढ़ें :
प्रश्न 1: बॉम्बे हाईकोर्ट ने पत्रकार तरुण तेजपाल को किस गंभीर अपराध के तहत दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई है?
उत्तर: हाईकोर्ट ने तरुण तेजपाल को वर्ष 2013 में गोवा के एक होटल की लिफ्ट में अपनी ही महिला सहकर्मी के साथ दुष्कर्म और यौन उत्पीड़न करने के मामले में दोषी करार दिया है।
प्रश्न 2: उच्च न्यायालय ने तरुण तेजपाल को कितनी सजा और क्या त्वरित आदेश दिया है?
उत्तर: अदालत ने तेजपाल को 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है और उन्हें जेल जाने के लिए 2 सप्ताह के भीतर पुलिस के समक्ष सरेंडर करने का सख्त आदेश दिया है।
प्रश्न 3: इस मामले में मई 2021 में निचली अदालत (ट्रायल कोर्ट) ने क्या फैसला सुनाया था?
उत्तर: मई 2021 में गोवा की सत्र अदालत ने सबूतों के अभाव और पीड़िता के आचरण का हवाला देते हुए तरुण तेजपाल को सभी आरोपों से बरी कर दिया था।
प्रश्न 4: बॉम्बे हाईकोर्ट ने निचली अदालत के उस फैसले को किस आधार पर पलट दिया?
उत्तर: हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि निचली अदालत ने घटना के बाद तेजपाल द्वारा भेजे गए ‘माफी के ई-मेल’ जैसे अहम साक्ष्यों को नजरअंदाज किया और पीड़िता के व्यवहार पर बेवजह सवाल उठाए।
प्रश्न 5: इस सजा के ऐलान के बाद तरुण तेजपाल के पास अब क्या कानूनी विकल्प शेष है?
उत्तर: हाईकोर्ट के इस कड़े फैसले के बाद तरुण तेजपाल और उनके वकील अब राहत और सजा पर रोक की मांग को लेकर सीधे देश की सर्वोच्च अदालत (सुप्रीम कोर्ट) में अपील दाखिल करेंगे।
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