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सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या बढ़ाने वाला विधेयक संसद से पारित : अब शीर्ष अदालत में स्वीकृत पद 34 से बढ़कर 38 हुए

नई दिल्ली राष्ट्रीय

एजेंसी, नई दिल्ली। Supreme Court Judges Bill : संसद के उच्च सदन राज्यसभा ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीशों की संख्या संशोधन विधेयक 2026 को सर्वसम्मति से पारित कर दिया है। इस महत्वपूर्ण वैधानिक संशोधन का मुख्य उद्देश्य देश की शीर्ष अदालत में मुख्य न्यायाधीश सहित न्यायाधीशों की कुल स्वीकृत संख्या को वर्तमान 34 से बढ़ाकर 38 करना है। लोकसभा से पूर्व में ही स्वीकृत हो चुके इस विधेयक को राज्यसभा की मंजूरी मिलने के साथ ही संसदीय अनुमोदन की प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूर्ण हो गई है। यह नया कानून मई 2026 में लागू किए गए उस अध्यादेश का स्थान लेगा, जिसके माध्यम से जजों की संख्या में वृद्धि की व्यवस्था की गई थी। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2019 के उपरांत सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या में किया गया यह पहला महत्वपूर्ण विस्तार है।

बढ़ते कार्यभार और मामलों के त्वरित निपटारे के लिए उठाया कदम

संसदीय चर्चा के उत्तर में केंद्रीय कानून एवं न्याय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने संसद को अवगत कराया कि न्यायपालिका पर निरंतर बढ़ते मुकदमों के दबाव, न्यायिक मामलों की बदलती प्रकृति तथा उभरते संवैधानिक प्रश्नों को देखते हुए यह निर्णय अत्यंत आवश्यक था। उन्होंने बताया कि भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने मई माह में प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर सर्वोच्च न्यायालय में दैनिक आधार पर दर्ज होने वाले मुकदमों की बढ़ती संख्या पर चिंता व्यक्त की थी। मुख्य न्यायाधीश ने रेखांकित किया था कि यदि जजों की संख्या नहीं बढ़ाई गई, तो लंबित मामलों का बैकलॉग प्रतिवर्ष 10,000 मुकदमों तक बढ़ सकता है। केंद्रीय मंत्री ने स्पष्ट किया कि लंबित आपराधिक एवं दीवानी मामलों में होने वाले विलंब को समाप्त करना सरकार की शीर्ष प्राथमिकता है।

मई में कैबिनेट की मंजूरी और जून में हुई थीं विशेष नियुक्तियां

विधेयक के पृष्ठभूमि इतिहास पर प्रकाश डालते हुए कानून मंत्री ने सदन को सूचित किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आयोजित केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में 5 मई 2026 को इस प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की गई थी, जिसके पश्चात तत्काल प्रभाव से अध्यादेश जारी किया गया था। इस व्यवस्था के अंतर्गत 1 जून 2026 को सर्वोच्च न्यायालय में 5 नए न्यायाधीशों की नियुक्ति भी की जा चुकी है। इसके अतिरिक्त, वर्षों से लंबित सबसे पुराने दीवानी और आपराधिक प्रकरणों की त्वरित सुनवाई सुनिश्चित करने के उद्देश्य से शीर्ष अदालत में 4 विशेष पीठों का गठन भी किया गया है।

सुलभ न्याय और न्यायिक क्षमता में वृद्धि का लक्ष्य

संसद के दोनों सदनों से इस विधेयक के पारित होने के उपरांत देश की न्याय प्रणाली को नई गति मिलने की संभावना है। केंद्रीय मंत्री ने बल देकर कहा कि आम नागरिकों तक न्याय की सहज एवं त्वरित पहुंच सुनिश्चित करना लोकतांत्रिक व्यवस्था का मूल दायित्व है। सुप्रीम कोर्ट में स्वीकृत पदों की संख्या में इस वृद्धि से न केवल मामलों के निष्पादन की दर में सुधार होगा, बल्कि महत्वपूर्ण संवैधानिक पीठों के गठन और दैनिक याचिकाओं की सुनवाई में भी गति आएगी। कानून विशेषज्ञों का मानना है कि जजों की संख्या 38 होने से देश की सर्वोच्च अदालत की कार्यक्षमता में व्यापक वृद्धि होगी।

इस पूरे मामले और मुख्य बिंदुओं को समझने के लिए नीचे दिए गए प्रमुख प्रश्नों और उनके उत्तरों को पढ़ें :

प्रश्न 1: सुप्रीम कोर्ट (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन विधेयक 2026 के माध्यम से क्या बड़ा बदलाव किया गया है?

उत्तर: इस संशोधन विधेयक के तहत भारत के सर्वोच्च न्यायालय में मुख्य न्यायाधीश सहित न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या को 34 से बढ़ाकर 38 कर दिया गया है।

प्रश्न 2: सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या में वृद्धि करने का मुख्य कारण क्या था?

उत्तर: देश के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने मुकदमों के बढ़ते बैकलॉग, दैनिक आधार पर नए केसों के पंजीकरण और मामलों के त्वरित निपटारे के लिए अतिरिक्त न्यायाधीशों की आवश्यकता बताई थी।

प्रश्न 3: सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या में इससे पूर्व आखिरी बार कब संशोधन किया गया था?

उत्तर: इससे पूर्व वर्ष 2019 में सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाई गई थी। उसके 7 वर्षों के उपरांत वर्ष 2026 में यह महत्वपूर्ण विस्तार किया गया है।

प्रश्न 4: लंबित सिविल और आपराधिक मामलों की त्वरित सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट में क्या व्यवस्था की गई है?

उत्तर: जजों की संख्या बढ़ने के साथ ही सुप्रीम कोर्ट में सबसे पुराने लंबित दीवानी (सिविल) और आपराधिक मुकदमों का प्राथमिकता से निपटारा करने के लिए 4 विशेष पीठों का गठन किया गया है।

प्रश्न 5: यह विधेयक संसद में कब पारित हुआ और यह किस पूर्व आदेश का स्थान लेगा?

उत्तर: यह विधेयक लोकसभा से पास होने के बाद 5 अगस्त 2026 को राज्यसभा से पारित हुआ। यह कानून मई 2026 में केंद्र सरकार द्वारा जारी अध्यादेश का स्थान लेगा।

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