डॉ. मोहन यादव

शिप्रा तीर्थ महोत्सव : उज्जैन में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव चढ़ाएंगे 300 फीट लंबी चुनरी, ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ बनेगा जन-आंदोलन

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एजेंसी, उज्जैन। Shipra Teerth Ujjain : मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जल संरक्षण को लेकर एक बड़ा संदेश देते हुए कहा है कि हमारे पारंपरिक जल स्रोतों को बचाना और उनका संरक्षण करना आज के समय और आने वाले भविष्य की सबसे बड़ी जरूरत है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस पुनीत कार्य में समाज के हर वर्ग की सक्रिय भागीदारी बेहद जरूरी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश की जनता से अपील की है कि हिंदू संस्कृति में पूरी आस्था और श्रद्धा के साथ मनाए जाने वाले गंगा दशहरा के पावन पर्व पर राज्य में चलाए जा रहे ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ को जनभागीदारी के माध्यम से एक विशाल जन-आंदोलन का रूप दिया जाए। इसी दूरगामी सोच के तहत सोमवार, 25 मई को प्रदेश के सभी ग्रामीण और शहरी इलाकों में बड़े पैमाने पर जल संरक्षण की गतिविधियां और भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, ताकि आम नागरिक इस अभियान से सीधे जुड़ सकें। सरकार के सभी प्रभारी मंत्रियों, सांसदों, विधायकों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में सामाजिक संगठनों के साथ मिलकर कुओं, बावड़ियों, तालाबों और नहरों की साफ-सफाई के साथ ही पुराने बंद पड़े बोरवेल के पास रिचार्ज पिट बनाने जैसे कार्यों में श्रमदान के लिए लोगों को प्रेरित करें।

उज्जैन में भव्य ‘शिप्रा तीर्थ परिक्रमा’ और सांस्कृतिक रंग

गंगा दशहरा के पावन अवसर पर धार्मिक नगरी उज्जैन में महाराजा विक्रमादित्य शोधपीठ द्वारा 25 और 26 मई को दो दिनों की भव्य ‘शिप्रा तीर्थ परिक्रमा’ का आयोजन किया जा रहा है, जो सामूहिक जनभागीदारी की एक अनोखी मिसाल बनेगा। यह पवित्र परिक्रमा रामघाट से शुरू होकर नृसिंहघाट, कर्कराज मंदिर, वेधशाला, महामृत्युंजय द्वार और प्रशांतिधाम शनि मंदिर से गुजरते हुए दत्तअखाड़ा घाट पहुंचेगी, जहां सभी श्रद्धालु रात्रि विश्राम करेंगे। इसके अगले दिन यानी गंगा दशमी पर यह यात्रा रणजीत हनुमान मंदिर, भैरवगढ़, सिद्धवट, मंगलनाथ, सांदीपनि आश्रम, गढ़कालिका और गोपाल मंदिर से होते हुए वापस रामघाट पर आकर पूरी होगी। इस बेहद खास मौके पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव खुद माँ शिप्रा को 300 फीट लंबी चुनरी अर्पित कर आशीर्वाद लेंगे। इस धार्मिक उत्सव को और अधिक भव्य बनाने के लिए रामघाट पर 17 मई से हर शाम पंडित ढोली बुवा द्वारा ‘हरिकथा’ का पाठ किया जा रहा है। वहीं दत्तअखाड़ा घाट पर होने वाली भजन संध्या में इंदौर के श्रेयश शुक्ला और जबलपुर की प्रसिद्ध लोक गायिका संजो बघेल अपनी प्रस्तुतियां देंगे। परिक्रमा के मुख्य आकर्षण के रूप में 26 मई को भारतीय नौसेना (इंडियन नेवी) के बैंड का शानदार प्रदर्शन होगा, जिसके साथ ही मुंबई का केशवम् बैंड भजन जैमिंग करेगा और विख्यात लोक गायिका मैथिली ठाकुर अपने सुमधुर भजनों से समां बांधेंगी।

धार्मिक मान्यताएं और दो चरणों में आयोजित होंगे कार्यक्रम

पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ज्येष्ठ महीने के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाया जाने वाला गंगा दशहरा का यह पावन पर्व मुख्य रूप से माँ गंगा के स्वर्ग से धरती पर अवतरित होने की स्मृति में मनाया जाता है, जिससे पूरी प्रकृति और मानव जीवन धन्य हुआ था। ऐसी अटूट मान्यता है कि इस पवित्र दिन पर नदियों में स्नान, विधि-विधान से पूजा और जल स्रोतों की रक्षा करने से मनुष्य के दस प्रकार के पापों का सर्वनाश होता है और राजा भगीरथ के पूर्वजों की तरह ही आत्मा को मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस पर्व की महत्ता को देखते हुए पूरे मध्य प्रदेश में कार्यक्रमों को दो मुख्य चरणों में बांटा गया है। पहले चरण में आम लोगों के सहयोग से स्थानीय जल स्रोतों की साफ-सफाई और घाटों की स्वच्छता के कार्य किए जाएंगे। इसके बाद दूसरे चरण में गंगा दशहरा के आध्यात्मिक महत्व पर केंद्रित सांस्कृतिक शाम का आयोजन होगा, जिसमें हर जिले से 4-5 ऐसे बेहतरीन कार्यों को चुना जाएगा जिन्हें राष्ट्रीय स्तर पर एक मॉडल के रूप में पेश किया जा सके। इन कार्यक्रमों के सफल संचालन के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) और शहरी क्षेत्रों में नगर निगम आयुक्त या परियोजना अधिकारी को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है।

‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ के तहत कार्यों का बना नया कीर्तिमान

इस पूरे जन-आंदोलन का मुख्य आधार ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ है, जिसके जरिए प्रदेश में जल आत्मनिर्भरता के क्षेत्र में ऐतिहासिक सफलताएं मिल रही हैं। यह अभियान पूरे राज्य में 19 मार्च से 30 जून 2026 तक चलाया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के कुशल नेतृत्व में अब तक प्रदेश भर में 1 लाख 91 हजार 294 जल संरक्षण के कार्यों को सफलतापूर्वक पूरा किया जा चुका है। अभियान के लिए तय किए गए कुल 3,68,673 कार्यों के लक्ष्य में से 1,91,294 कार्य पूरे हो चुके हैं, जिनमें 84,468 कार्य पूरी तरह संपन्न और 1,06,826 कार्य भौतिक रूप से पूर्ण हो चुके हैं। विशेष तौर पर 19 मार्च के बाद से इस अभियान की गति में अभूतपूर्व तेजी आई है, जिसके तहत 1,41,540 कार्यों को आगे बढ़ाया गया। इस युगांतकारी अभियान को सुचारू रूप से चलाने के लिए सरकार द्वारा 10,666.62 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि मंजूर की गई है, जिसमें से अब तक 6,293.48 करोड़ रुपये (59 प्रतिशत) का उपयोग किया जा चुका है।

भूजल संवर्धन और ग्रामीण समृद्धि को मिली नई रफ्तार

इस महाअभियान के अंतर्गत जमीन के अंदर पानी के स्तर को सुधारने के लिए रिकॉर्ड 90,814 डग वेल रिचार्ज का काम किया गया है और गांवों की आर्थिक समृद्धि का आधार बनने वाले 56,198 फार्म पॉन्ड (खेत तालाब) के कार्यों को भी सफलता के साथ पूरा किया गया है। इसके अलावा, पर्यावरण और जल के संतुलन को बेहतर बनाने के लिए जल संरक्षण एवं रिचार्ज श्रेणी में 29,096 कार्य पूरे किए जा चुके हैं। बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए 4,678 वाटरशेड से जुड़े कार्य, 2,663 पारंपरिक जल ढांचों का रिपेयर व मेंटेनेंस और 1,133 सिंचाई से जुड़े निर्माण कार्य कुशलता के साथ पूरे किए गए हैं। इस सफल आंदोलन के तहत जहां 115 अमृत सरोवरों का पुनरुद्धार किया गया है, वहीं आने वाली पीढ़ी के बेहतर स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए ‘वॉव’ ऐप के माध्यम से स्कूलों में बनी 3,670 पानी की टंकियों की सफाई पूरी तरह सुनिश्चित की गई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में मध्य प्रदेश को जल समृद्धि की ओर ले जाने वाला यह विशाल अभियान राज्य में एक युगांतकारी जल क्रांति का सबसे बड़ा और बेहतरीन उदाहरण बनकर सामने आ रहा है।

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