एजेंसी, रोहतक। Ram Rahim Parole : डेरा सच्चा सौदा के विवादित प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह को हरियाणा सरकार की तरफ से एक बार फिर बहुत बड़ी कानूनी राहत प्रदान की गई है। राज्य सरकार ने राम रहीम की ताजा अर्जी को स्वीकार करते हुए उसे इस बार पूरे तीस दिनों के पैरोल की मंजूरी दे दी है। इस प्रशासनिक आदेश के बाद जेल प्रशासन ने सभी जरूरी और महत्वपूर्ण कानूनी औपचारिकताएं तेजी से पूरी कीं। कागजी प्रक्रिया संपन्न होने के तुरंत बाद आज तड़के करीब साढ़े छह बजे राम रहीम को रोहतक की सुनारिया जेल से रिहा कर दिया गया। जेल की चहारदीवारी से बाहर कदम रखते ही राम रहीम को पंजाब और हरियाणा पुलिस की विशेष टीमों ने अपनी कड़ी सुरक्षा के घेरे में ले लिया। इलाके की संवेदनशीलता, स्थानीय कानून व्यवस्था और सुरक्षा कारणों को ध्यान में रखते हुए पुलिस के एक अत्यंत विशाल और अभेद्य सुरक्षा काफिले के साथ उसे सीधे सिरसा में स्थित डेरा सच्चा सौदा के मुख्य मुख्यालय के लिए रवाना कर दिया गया है।
#WATCH | Haryana | Rape convict Dera Sacha Sauda chief Gurmeet Ram Rahim Singh, who has been released from Sunaria prison in Rohtak after being granted 30-day parole, arrives in Sirsa pic.twitter.com/ifkW47oXNI
— ANI (@ANI) May 26, 2026
पैरोल और फरलो का लंबा इतिहास
अदालती रिकॉर्ड और जेल प्रशासन से प्राप्त जानकारी के अनुसार, राम रहीम को अब तक रिकॉर्ड सोलहवीं बार पैरोल या फरलो की विशेष सुविधा का लाभ मिला है। इससे ठीक पहले चालू वर्ष में ही पांच जनवरी दो हजार छब्बीस को उसे चालीस दिनों का लंबा पैरोल दिया गया था। उस समय अवधि के दौरान भी उसने सिरसा स्थित अपने डेरा सच्चा सौदा आश्रम में ही वक्त गुजारा था। पैरोल की तय समय सीमा पूरी हो जाने के बाद उसे दोबारा कड़ी सुरक्षा के बीच सुनारिया जेल की कोठरी में वापस भेज दिया गया था। बार-बार मिलने वाली इस वीआईपी राहत के कारण राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था और गृह मंत्रालय पर विपक्षी दलों द्वारा लगातार कई तीखे सवाल भी दागे जाते रहे हैं।
दुष्कर्म और हत्या के गंभीर मामलों में काट रहा है सजा
उल्लेखनीय है कि गुरमीत राम रहीम सिंह साल दो हजार सत्रह से ही रोहतक की सुनारिया जेल में अपनी गंभीर सजा काट रहा है। उसे सीबीआई की विशेष अदालत ने दो महिला अनुयायियों (साध्वियों) के साथ यौन शोषण और दुष्कर्म के बेहद संगीन मामले में दोषी करार देते हुए दस-दस साल की कठोर कारावास की सजा सुनाई थी। इसके अतिरिक्त, प्रखर पत्रकार रामचंद्र छत्रपति की दिनदहाड़े की गई नृशंस हत्या के सनसनीखेज मामले में भी उसे अदालत से आजीवन कारावास की कठोर सजा मिली हुई है। हालांकि, कुछ समय पहले पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय से पत्रकार हत्याकांड मामले में उसे बड़ी राहत भी मिल चुकी है। इसके बावजूद, इतने गंभीर अपराधों में संलिप्त होने के बाद भी उसे लगातार मिलने वाले पैरोल को लेकर कई सामाजिक और मानवाधिकार संगठन हरियाणा सरकार की मंशा पर लगातार सवाल उठाते रहे हैं। आलोचकों का आरोप है कि पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और पश्चिमी उत्तर प्रदेश जैसे कई राज्यों में फैले डेरा सच्चा सौदा के लाखों वोट बैंक और अनुयायियों के राजनीतिक प्रभाव के कारण ही सरकार उस पर बार-बार मेहरबान होती रही है।
साल दो हजार बीस से अब तक कब-कब जेल से बाहर आया राम रहीम
साल दो हजार बीस से लेकर अब तक के छह वर्षों के भीतर राम रहीम को अलग-अलग मौकों पर कई महीनों के लिए जेल से बाहर रहने की छूट मिली है। जेल विभाग के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार उसकी रिहाई की सूची इस प्रकार है:
- अक्टूबर दो हजार बीस में सबसे पहले उसे केवल एक दिन का पैरोल दिया गया था। इसके बाद मई दो हजार इक्कीस में दोबारा उसे एक दिन की विशेष राहत मिली। फरवरी दो हजार बाइस में उसे इक्कीस दिनों का फरलो मंजूर हुआ, जिसके तुरंत बाद उसी साल जून दो हजार बाइस में तीस दिनों का पैरोल दे दिया गया। अक्टूबर दो हजार बाइस में फिर से उसे चालीस दिनों की लंबी राहत मिली।
- राहत का यह सिलसिला लगातार जारी रहा और जनवरी दो हजार तेईस में उसे फिर से चालीस दिनों का पैरोल मिला, जबकि जुलाई दो हजार तेईस में उसे तीस दिनों के लिए जेल से बाहर आने की अनुमति मिली। नवंबर दो हजार तेईस में उसे इक्कीस दिनों का फरलो दिया गया। साल दो हजार चौबीस की शुरुआत में ही जनवरी में उसे पूरे पचास दिनों का सबसे लंबा पैरोल मिला, जिसके बाद अगस्त दो हजार चौबीस में इक्कीस दिन का फरलो और अक्टूबर दो हजार चौबीस में चुनाव के वक्त बीस दिन का पैरोल दिया गया। पिछले साल जनवरी दो हजार पच्चीस में उसे तीस दिन का पैरोल, अप्रैल दो हजार पच्चीस में इक्कीस दिन का फरलो और अगस्त दो हजार पच्चीस में चालीस दिन का पैरोल दिया गया। अब इस साल जनवरी दो हजार छब्बीस में चालीस दिन की पैरोल काटने के बाद, मई दो हजार छब्बीस में उसे एक बार फिर तीस दिनों के लिए जेल से मुक्ति मिल गई है।
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