Ladli Behna Yojana

लाड़ली बहना योजना की 38वीं किस्त के लिए मुख्यमंत्री का भिंड दौरा : बहनों के खाते में आएंगे 1500 रुपए 

प्रादेशिक मध्‍य प्रदेश मुरैना

एजेंसी, भिंड। Ladli Behna Yojana 38 installment : मध्य प्रदेश में महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को एक नया आयाम देने के उद्देश्य से रविवार 12 जुलाई को एक बेहद महत्वपूर्ण कार्यक्रम आयोजित होने जा रहा है। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भिंड जिले के लहार दौरे पर रहेंगे, जहां वे राज्य की करोड़ों महिलाओं के कल्याण के लिए संचालित लाड़ली बहना योजना की 38वीं किस्त की राशि सीधे उनके बैंक खातों में हस्तांतरित करेंगे। दोपहर 1 बजकर 15 मिनट पर आयोजित होने वाले इस मुख्य कार्यक्रम के माध्यम से प्रदेश की पात्र बहनों के खातों में 1500 रुपए की सहायता राशि भेजी जाएगी। इस भव्य कार्यक्रम को लेकर स्थानीय प्रशासन द्वारा लहार में व्यापक स्तर पर तैयारियां शुरू कर दी गई हैं।

लहार में 2 घंटे का विशेष संवाद कार्यक्रम, पहले मेहगांव में होना था आयोजन

निर्धारित समयसारिणी के अनुसार, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव लहार में लगभग 2 घंटे रुकेंगे, जहां लाड़ली बहना योजना का यह विशेष कार्यक्रम दोपहर 1 बजे से प्रारंभ होकर दोपहर 3 बजे संपन्न होगा। इस दौरान मुख्यमंत्री प्रदेश की महिलाओं से सीधा संवाद भी करेंगे। कूटनीतिक और व्यावहारिक दृष्टिकोण से पहले इस भव्य कार्यक्रम का आयोजन मेहगांव के मंडी परिसर में होना सुनिश्चित किया गया था। परंतु, क्षेत्र में लगातार हो रही बारिश की प्रबल संभावना को देखते हुए और प्रशासनिक अधिकारियों तथा जनप्रतिनिधियों के स्थलीय निरीक्षण के बाद अंतिम समय में सुरक्षा और व्यवस्था के मद्देनजर कार्यक्रम का स्थान परिवर्तित कर लहार तय किया गया। मुख्य कार्यक्रम के समापन के पश्चात मुख्यमंत्री स्थानीय विधायक के निवास पर जाकर शोक संवेदना भी व्यक्त करेंगे।

लखपति गोपालक दीदी योजना की नई सौगात, महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की बड़ी पहल

लाड़ली बहना योजना की मासिक किस्त जारी करने के साथ ही मोहन सरकार प्रदेश की महिलाओं की आर्थिक स्थिति को और अधिक सुदृढ़ करने के लिए लखपति गोपालक दीदी योजना के रूप में एक और नई सौगात देने जा रही है। इस अभिनव योजना के अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं को दुधारू नस्ल के मवेशी तैयार करने में वैज्ञानिक और तकनीकी सहायता प्रदान की जाएगी। सरकार का मुख्य ध्यान ग्रामीण अंचलों में मौजूद गैर-नस्लीय मवेशियों के कृत्रिम गर्भाधान पर होगा, जिससे उच्च नस्ल की बछिया और पड़िया का जन्म हो सके। इस नस्ल सुधार प्रक्रिया के माध्यम से लाभार्थियों के घरों में ही बिना किसी बड़े अतिरिक्त वित्तीय बोझ के उच्च कोटि के दुधारू पशु तैयार हो जाएंगे, जिससे ग्रामीण स्तर पर दुग्ध उत्पादन में भारी वृद्धि होगी।

सालाना 3 से 4 लाख रुपए की अतिरिक्त आय का लक्ष्य, इस प्रकार मिलेगा योजना का लाभ

राज्य सरकार के पशुपालन विभाग का प्रारंभिक दावा है कि इस वैज्ञानिक पद्धति के सफल क्रियान्वयन से महिलाओं को अपने घरों में मवेशियों से अतिरिक्त दूध प्राप्त होगा, जिससे उनकी वार्षिक आय में 3 से 4 लाख रुपए तक की भारी बढ़ोतरी हो सकती है। इस महत्वाकांक्षी योजना को धरातल पर पूरी तरह प्रभावी बनाने के लिए विभाग ने निम्नलिखित कड़े दिशा-निर्देश जारी किए हैं:

  • विकासखंड स्तर पर गैर-नस्लीय मवेशियों की सटीक पहचान के लिए एक सघन अभियान चलाया जाएगा।

  • ग्रामीण क्षेत्रों में कृत्रिम गर्भाधान के लिए प्रशिक्षण सत्रों की संख्या में अभूतपूर्व वृद्धि की जाएगी।

  • मैदानी स्तर पर लापरवाही बरतने वाले कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से हटाकर उनसे किट वापस ली जाएगी।

  • प्रत्येक ग्राम पंचायत में कम से कम 1 मैत्री कार्यकर्ता की अनिवार्य तैनाती सुनिश्चित की जाएगी।

  • खंड स्तर पर एक विशेष दक्षता मूल्यांकन समिति का गठन होगा, जो हर महीने इस पूरी प्रक्रिया की प्रगति की बारीकी से समीक्षा करेगी।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को पूरी तरह बदलने का एक वैज्ञानिक और व्यावहारिक मॉडल

पशुपालन एवं डेयरी विभाग के प्रमुख सचिव उमाकांत उमराव ने योजना के दूरगामी परिणामों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह पहल केवल एक सामान्य डेयरी विकास कार्यक्रम मात्र नहीं है, बल्कि यह मध्य प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों की संपूर्ण अर्थव्यवस्था को समूल बदलने का एक अत्यंत वैज्ञानिक और व्यावहारिक मॉडल है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस योजना के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को न केवल नियमित वित्तीय सहायता मिलेगी, बल्कि वे पशुपालन के क्षेत्र में आधुनिक तकनीकों को अपनाकर पूर्णतः आत्मनिर्भर बन सकेंगी। विभाग ने राज्य से लेकर पंचायत स्तर तक के सभी अधिकारियों को इस कार्ययोजना को पूरी गंभीरता से लागू करने के सख्त निर्देश दिए हैं, जिसकी उच्च स्तर पर हर माह कड़ी निगरानी की जाएगी।

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